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  • A whatsapp message circulating, claims that workers who worked during 1990 2020 are entitled to receive Rs 120000 from Labour Ministry.

फैक्ट चेक / 30 साल काम कर चुके श्रमिक को 1 लाख 20 हजार रुपये देने का मैसेज झूठा, साथ में दी जा रही लिंक फर्जी और विदेशी है

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  • क्या वायरल: अंग्रेजी में लिखे मैसेज में दावा-1990 से 2020 के बीच काम कर चुके हर एक मजदूर-कर्मचारी को श्रम व रोजगार मंत्रालय 1.20 लाख रुपए दे रहा है
  • सच्चाई:  ऐसा कोई प्रावधान भारत सरकार ने नहीं किया, दक्षिण अफ्रीका के श्रम मंत्रालय की वेबसाइट का लिंक और पीआईबी ने भी इसे फेक बताया 

दैनिक भास्कर

May 16, 2020, 11:51 AM IST

फैक्ट चेक डेस्क. कोरोना लाॅकडाउन के बीच अर्थव्यवस्था और रोजगार के लिए पीएम मोदी ने 20 लाख करोड़ रुपए का राहत पैकेज घोषित किया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण हर दिन इसके बारे में नई जानकारियां दे रही हैं। अब इन जानकारियों के नाम पर फेक लिंक के साथ फेक मैसेज भी वायरल किए जा रहे हैं।

वॉट्सऐप और फेसबुक पर अंग्रेजी ऐसे एक वायरल मैसेज में दावा किया जा रहा है कि 1990 से 2020 के बीच काम कर चुके हर एक मजदूर-कर्मचारी को श्रम व रोजगार मंत्रालय 1.20 लाख रुपए दे रहा है।

इस मैसेज की पड़ताल में यह सच निकल कर आया कि ऐसा कोई प्रावधान न तो वित्त मंत्री ने बताया है और न ही श्रम व रोजगार मंत्रालय ने ऐसा कुछ कहा है। इस मैसेज के साथ दी जा रही वेबसाइट दक्षिण अफ्रीका के श्रम मंत्रालय की है। इसके साथ ही भारत की पीआईबी ने अपने फैक्ट चेक हैंडल पर भी इसे फेक मैसेज बताया है। 

  • वायरल मैसेज: 
  • 13 और 14 मई को अंग्रेजी भाषा में वायरल मैसेज में लिखा है- ‘1990 से 2020 तक काम कर चुके श्रमिकों के पास श्रम व रोजगार मंत्रालय से 1,20,000 रुपये पाने का अधिकार है। (workers who worked between 1990 and 2020 have a right to receive a benefit of 1,20,000 rupees from the Ministry of Labour and Employment.)
  • वायरल मैसेज में एक लिंक दिया गया है। इस लिंक में उन लोगों की लिस्ट है जो यह फायदा फायदा उठा सकते हैं।
वॉट्सऐपर पर वायरल हो रहा 1 लाख 20 हजार रुपए देने का झूठा मैसेज।

ऐसा ही मैसेज दक्षिण अफ्रीका की लिंक के साथ फेसबुक पर भी वायरल हो रहा।
  • फैक्ट चेक पड़ताल: 

  • जब हमने इस मैसेज की पड़ताल की तो पता चला कि 13 और 14 मई को सरकार के किसी मंत्रालय की ओर से ऐसा कोई बयान नहीं दिया गया।
  • इसके बाद हमने इस मैसेज के साथ दिए गए ऊपर दिए वेब लिंक पर क्लिक किया तो पता चला कि वह वेब एड्रेस तो भारत के श्रम मंत्रालय का है, लेकिन नीचे दिया गया https:II.IIIII.shop लिंक किसी फर्जी साइट का है जो अब बंद है।
  • इसके अलावा इसी मैसेज के साथ एक और वेब लिंक labour.gov.za शेयर किया जा रहा जो दक्षिण अफ्रीका के रोजगार व श्रम मंत्रालय की साइट का है अैर इसका भारत से कोई लेना-देना नहीं है।
  • भारत सरकार के  प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) ने भी अपने ट्विटर हैंडल पर इस मैसेज को फेक बताया है। 
लिंक पर क्लिक करने पर दक्षिण अफ्रीका की वेबसाइट खुल रही है।
  • PIB फैक्ट चेक के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ‍लिखा गया है- ‘दावा: व्हाट्सऐप मैसेज में दावा किया जा रहा है कि जो श्रमिक 1990 से 2020 के बीच काम कर चुके हैं, उन्हें श्रम मंत्रालय की ओर से 1 लाख 20,000 रुपये मिलेंगे। फैक्ट चेक: यह फेक खबर है। भारतीय सरकार द्वारा ऐसी कोई घोषणा नहीं की गई है। इस तरह की फर्जी वेबसाइट्स से सतर्क रहें।’

  • निष्कर्ष: 1990 से 2020 के दौरान काम करने वाले वर्कर्स को श्रम मंत्रालय की ओर से 1 लाख 20,000 रुपये  दिए जाने का मैसेज पूरी तरह से झूठा है। आपके पास भी ऐसा मैसेज आए तो उसे किसी अन्य को फॉरवर्ड न करें और उसके साथ दिए गए लिंक को ओपन न करें।             

  

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