कल से आपके व्हाट्सऐप-फेसबुक पर होगी सरकार की नजर! कॉल भी रिकॉर्ड होंगे! पर ये पुराना और झूठा मैसेज है

3 वर्ष पहले
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  • वॉट्सऐप पर वायरल मैसेज में दावा- कल से नए नियम लागू होने जा रहे हैं
  • ये भी दावा कि गलत मैसेज भेजने पर बिना वारंट के पुलिस गिरफ्तार करेगी
  • ऐसा ही मैसेज 2017 में भी वायरल हुआ था और बाद में फर्जी निकला था

नो फेक न्यूज डेस्क. इन दिनों वॉट्सऐप पर एक मैसेज जमकर वायरल हो रहा है। इस मैसेज में दावा किया जा रहा है कि कल से नए नियम लागू होने जा रहे हैं, जिसके तहत सरकार सभी के कॉल रिकॉर्ड करेगी और उन रिकॉर्डिंग को सेव किया जाएगा। इसके साथ ही फेसबुक, वॉट्सऐप और ट्विटर जैसी सोशल मीडिया साइट पर भी सरकार नजर रखेगी। वायरल मैसेज में ये भी दावा किया गया है कि अगर कोई व्यक्ति सरकार या प्रधानमंत्री के खिलाफ और धार्मिक या राजनीतिक मुद्दे पर कोई मैसेज भेजता है तो पुलिस उसे बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकती है।

 

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हालांकि, ऐसा ही मैसेज दो साल पहले भी वायरल हुआ था। फर्क सिर्फ इतना है कि दो साल पहले यही मैसेज अंग्रेजी भाषा में वायरल हो रहा था जबकि इस बार ये मैसेज हिंदी में भेजा जा रहा है। इस मैसेज में जो भी बातें और दावे किए गए हैं, वो सब गलत हैं। क्योंकि सरकार ने ऐसे कोई नियम बनाए ही नहीं हैं।

 

 

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कारण : क्यों फर्जी है ये वायरल मैसेज?

  • कारण 1: इस मैसेज में दावा किया जा रहा है कि सरकार सभी लोगों के कॉल रिकॉर्ड करेगी और उसे सेव भी करेगी। साथ ही वॉट्सऐप, फेसबुक और ट्विटर जैसी सोशल मीडिया वेबसाइट पर भी नजर रखी जाएगी। ये सभी चीजें भारत सरकार के आईटी मंत्रालय के तहत आती हैं, लेकिन मंत्रालय की वेबसाइट पर ऐसा कोई भी नोटिफिकेशन नहीं है जिससे मैसेज की सच्चाई साबित हो सके। 
  • कारण 2: इसके अलावा, अगस्त 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने पुट्टास्वामी केस में फैसला देते हुए निजता को मौलिक अधिकार बताया था। साथ ही संविधान के आर्टिकल 21 के तहत सभी नागरिकों को जीने और स्वतंत्रता का अधिकार है। जिस कारण, हमारी कॉल रिकॉर्डिंग करना निजता के अधिकार का हनन होने के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट के फैसले की अवमानना भी होगी और ऐसा करने के लिए सरकार को कानून में संशोधन करना होगा।
  • कारण 3: तीसरी बात कि, भारत में अभी भी कोई ऐसा कानून नहीं है जिसके तहत वॉट्सऐप, फेसबुक और ट्विटर जैसी सोशल मीडिया वेबसाइट पर नजर रखी जा सके। हालांकि, सरकार सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल रोकने के लिए आईटी एक्ट की धारा-79 में बदलाव की तैयारी कर रही है, जिसके बाद सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए कंटेंट की जिम्मेदारी कंपनियों की होगी और कंपनियों को कंटेंट के सोर्स की जानकारी देनी होगी। लेकिन, अभी ऐसा कोई कानून नहीं है जिससे सरकार इन कंपनियों की निगरानी कर सके।
  • कारण 4: वायरल मैसेज में आगे ये भी दावा किया गया है कि प्रधानमंत्री या सरकार के खिलाफ या धार्मिक या राजनीतिक मुद्दे पर मैसेज भेजना भी अपराध होगा और इसके लिए पुलिस बिना वारंट के भी गिरफ्तार कर सकती है। सोशल मीडिया या कम्प्यूटर रिसोर्सेस या किसी भी संचार माध्यम के जरिए अपमानजनक, धमकी भरे या नफरत फैलाने वाले मैसेज भेजने पर पहले आईटी एक्ट की धारा-66ए के तहत गिरफ्तारी हो सकती थी लेकिन मार्च 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने इस धारा को निरस्त कर दिया। हालांकि, अभी भी सोशल मीडिया पर गलत या आपत्तिजनक मैसेज भेजने पर आईपीसी की अन्य धाराओं के तहत गिरफ्तारी हो सकती है।


क्या सरकार आपकी निगरानी कर सकती है?

  • नहीं, लेकिन जरूरत पड़ने पर ऐसा किया जा सकता है। सरकार ने दो महीने पहले ही देश की 10 बड़ी सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों को किसी भी व्यक्ति या संस्था के कम्प्यूटर की जांच करने का अधिकार दिया है। इनमें इंटेलीजेंस ब्यूरो, नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, प्रवर्तन निदेशालय, सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज, डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलीजेंस, सीबीआई, एनआईए, कैबिनेट सचिवालय (रॉ), डायरेक्टोरेट ऑफ सिग्नल इंटेलीजेंस और दिल्ली पुलिस कमिश्नर शामिल हैं।
  • इसके अलावा, सरकार चाहे तो फोन भी टैप करवा सकती है। इसके लिए 1885 में ब्रिटिश राज में \'इंडियन टेलीग्राफ एक्ट\' बनाया गया था, जिसके तहत सुरक्षा एजेंसियों को टेलीफोन पर बातचीत को टैप करने का अधिकार मिला था। सरकार उन सभी मामलों में किसी भी व्यक्ति के सोशल मीडिया अकाउंट की निगरानी कर सकती है या किसी वेबसाइट को ब्लॉक कर सकती है जिससे देश की सुरक्षा, संप्रभुता और अखंडता को खतरा हो।

 

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