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फैक्ट चेक / एनआरसी को लेकर फैलाया जा रहा झूठ, सिर्फ घुसपैठियों को बाहर करना है इसका मकसद



No Fake News; Misinformation spreading Fake News About NRC National Citizenship Amendment Bill
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No Fake News; Misinformation spreading Fake News About NRC National Citizenship Amendment Bill

  • क्या वायरल : NRC कानून पास हो चुका है। पूरे परिवार की पहचान के कागजात जैसे  आधार, वोटर कार्ड और रिहायश के कम से कम 50 साल के सबूत तैयार कर लें (रिहायश के सबूत के तौर पर जगह-जमीन के कागजात, बाप-दादाओं की पहचान के कागजात, सज़रा आदि काम आएंगे) क्योंकि जब रजिस्ट्रेशन का काम शुरू होगा तो तहसीलों, आधार केंद्रों, जिला मुख्यालयों आदि में जबरदस्त भीड़ होगी और कोई आपकी बात सुनने वाला न होगा। यदि आप अपनी पहचान साबित करने में नाकाम रहे तो सरकार आपका घर-संपत्ति जब्त कर लेगी।
  • क्या सच : अभी एनआरसी सिर्फ असम में लागू किया गया है। पूरे देश में इसे लागू करने से पहले सरकार सिटिजनशिप एक्ट में बदलाव करेगी और शरणार्थियों को नागरिकता दी जाएगी। गृहमंत्री के मुताबिक, एनआरसी के तहत सिर्फ अवैध रूप से देश में घुसे लोगों को बाहर किया जाएगा

Dainik Bhaskar

Oct 03, 2019, 01:16 PM IST

फैक्ट चेक डेस्क. असम में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन्स (एनआरसी) लागू होने के बाद से ही सोशल मीडिया पर इसे लेकर काफी अफवाहें उड़ाई जा रही हैं। असम में एनआरसी की फाइनल लिस्ट 31 अगस्त को जारी की जा चुकी है। इसमें 19 लाख 6657 लोगों के नाम नहीं हैं। यह वह लोग हैं जो देश में अपनी नागरिकता को साबित नहीं कर सके।

 

इसी बीच सोशल मीडिया में एक मैसेज वायरल हो रहा है। इसमें दावा किया जा रहा है कि एनआरसी कानून पास हो चुका है। जल्द ही रजिस्ट्रेशन का काम शुरू होगा। इसमें आप अपनी पहचान साबित करने में नाकाम रहे तो आपकी घर-संपत्ति जब्त कर ली जाएगी। एक पाठक ने हमें यह मैसेज पुष्टि के लिए भेजा। पड़ताल में इसकी सच्चाई सामने आई। 

 

क्या वायरल

  • कई यूजर्स ने यह मैसेज फेसबुक, वॉट्सऐप पर वायरल किया है। 


इसमें लिखा है कि 'यह NRC कानून पास हो चुका है। ध्यान से पढे़ं और समय रहते अपने पूरे परिवार की पहचान के कागजात जैसे  आधार, वोटर कार्ड और रिहायश के कम से कम 50 साल के सबूत तैयार कर लें (रिहायश के सबूत के तौर पर जगह-जमीन के कागजात, बाप-दादाओं की पहचान के कागजात, सज़रा आदि काम आएंगे) क्योंकि जब रजिस्ट्रेशन का काम शुरू होगा तो तहसीलों, आधार केंद्रों, जिला मुख्यालयों आदि में जबरदस्त भीड़ होगी और कोई आपकी बात सुनने वाला न होगा। यदि आप अपनी पहचान साबित करने में नाकाम रहे तो सरकार आपका घर-संपत्ति जब्त कर लेगी। मैसेज को बिल्कुल हल्के में न लें। अपने जानकारों-रिश्तेदारों को भी भेजें ताकि आसाम जैसे हालात यहां न पैदा हों'।

 

क्या है सच्चाई

  • केंद्र सरकार ने असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) लागू किया है। इसका मकसद देश में गैर-कानूनी तौर पर रह रहे विदेशी लोगों को बाहर करना है।
  • असम में आजादी के बाद 1951 में पहली बार नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन बना था। राजीव गांधी सरकार के समय हुए असम समझौते के तहत मोदी सरकार ने असम में एनआरसी को लागू किया है। अभी इसके लिए अलग से कोई एनआरसी कानून पारित नहीं किया गया। 
  • गृहमंत्री अमित शाह यह कह चुके हैं कि एनआरसी पूरे देश में लागू करने का विचार है, लेकिन किसी भी शरणार्थी को इसके तहत बाहर नहीं किया जाएगा। 
  • सरकार सिटिजनशिप बिल में पहले संशोधन करेगी। इसके बाद सभी हिंदू, सिख, जैन और बौद्ध शरणार्थियों को नागरिकता दी जाएगी।
  • शाह यह भी स्पष्ट कर चुके हैं कि सरकार किसी भी अवैध घुसपैठिए को देश में रहने नहीं देगी। शाह के मुताबिक, कोई भी देश घुसपैठियों का भार सहन नहीं कर सकती। 
  • बता दें कि, अभी एनआरसी सिर्फ असम में लागू किया गया है। इसके तहत सरकार देश में रहने वाले अवैध घुसपैठियों को बाहर कर रही है। 
  • ऐसे में देश के वैध नागरिकों, शरणार्थियों को चिंता करने की कोई बात नहीं है। सिर्फ घुसपैठियों को ही बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा।
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