फैक्ट चेक:क्या पीएम मोदी ने कोरोनावायरस का केस आने के पहले ही स्क्रीनिंग शुरू होने का झूठा दावा किया?

नईदिल्ली2 वर्ष पहले
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  • क्या वायरल : सोशल मीडिया पर दावा किया गया है कि पीएम मोदी ने 14 अप्रैल को दी गई स्पीच में झूठे दावे किए
  • क्या सच : पड़ताल में पीएम का दावा सही निकला, भारत में कोरोनावायरस का पहला मामला दर्ज होने के पहले ही एयरपोर्ट्स पर स्क्रीनिंग शुरू हो चुकी थी

14 अप्रैल को पीएम नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित करते हुए 3 मई तक लॉकडाउन बढ़ाने की घोषणा की। अपनी स्पीच में उन्होंने कहा कि 'कोरोनावायरस समस्या को रोकने के लिए भारत ने काफी पहले कदम उठा लिए थे। कोविड-19 का एक भी मामला नहीं आया था, तब ही भारत में स्क्रीनिंग शुरू हो चुकी थी। हमने समस्या के हाथ से निकलने का इंतजार नहीं किया।' पीएम की इस स्पीच के बाद से ही सोशल मीडिया पर कई पोस्ट वायरल हो रही हैं। इसमें पीएम मोदी द्वारा किए गए दावे पर सवाल उठाते हुए लिखा गया है कि 'प्यारे मोदी जी, फिर 4 मार्च को दिल्ली में 15 इतालवी पर्यटक का टेस्ट पॉजिटिव कैसे हुआ। तब्लीगी फॉरेनर्स ने निजामुद्दीन में कैसे प्रवेश किया और 13 से 15 मार्च को आयोजन किया। गायिका कैरिसा मोंटेइरो ने इस पीएम मोदी की फोटो को शेयर करते हुए लिखा कि 'इफ लाइंग वॉज एन आर्ट, ही हेड बी द विंची'। यानी यदि झूठ बोलना एक कला है तो मोदी इसके विंची हैं।

गायिका कैरिसा मोंटेइरो द्वारा 14 मार्च को किया गया ट्वीट।
गायिका कैरिसा मोंटेइरो द्वारा 14 मार्च को किया गया ट्वीट।

एक अन्य यूजर ऑगस्टाइन वर्के ने पीएम की फोटो को शेयर करते हुए लिखा कि 'अगर झूठ बोलना एक कला है तो यह आदमी इसका पिकासो है'। कैरिसा ने एक अन्य इमेज शेयर करते हुए लिखा कि भारत में कोरोना का पहला मामला 30 जनवरी को दर्ज हुआ था, उसके बाद से सरकार ने यह किया। इस पोस्ट में लिखा है कि '1 से 20 फरवरी तक 'नमस्ते ट्रंप की तैयारियां'। 23 फरवरी 'दिल्ली दंगे'। '24 से 25 फरवरी नमस्ते ट्रंप इवेंट'। 4 मार्च 'कोरोना को लेकर अधिकारियों की पहली मीटिंग।' 9 मार्च एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग टेस्ट शुरू। 11 मार्च डब्ल्यूएचओ ने कोरोना को महामारी घोषित किया। 11 से 12 मार्च मप्र में बीजेपी के विधायकों को बस से रिजॉर्ट ले जाया गया। 13 मार्च सरकार ने कहा, 'कोरोना हेल्थ इमरजेंसी नहीं है'। 14 से 15 मार्च 'बीजेपी मप्र में सरकार बनाने में व्यस्त'। 16 मार्च 'पीआर के लिए मोदी की कोरोना पर सार्क मीटिंग'। 19 मार्च मोदी ने 'कोरोना पर भारत को पहली बार संबोधित किया' और 1 दिन के 'जनता कर्फ्यू का ऐलान किया'। 20 से 21 मार्च 'मप्र में बीजेपी सरकार का गठन'। 22 मार्च एक दिन का जनता कर्फ्यू। 25 मार्च सभी फ्लाइट्स पर रोक। 26 मार्च को 14 अप्रैल तक के लिए लॉकडाउन किया गया। 

कैरिसा द्वारा ट्वीट की गई दूसरी इमेज।
कैरिसा द्वारा ट्वीट की गई दूसरी इमेज।

क्या है सच्चाई

  • पड़ताल में पीएम मोदी की कोविड-19 का एक भी मामला सामने आने के पहले ही स्क्रीनिंग होने की बात सही निकली।
  • 17 जनवरी को हेल्थ मिनिस्ट्री ने चाइना से दिल्ली-मुंबई और कोलकाता एयरपोर्ट्स पर आने वाले सभी यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग शुरू करने के निर्देश दिए थे।
  • इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 21 जनवरी से देश के सात एयरपोर्ट पर चाइना से आने वाले यात्रियों की स्क्रीनिंग शुरू हो गई थी। इनमें दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता एयरपोर्ट भी शामिल थे। जनवरी के आखिरी तक देश के 20 एयरपोर्ट्स में स्क्रीनिंग शुरू हो चुकी थी।
  • भारत में कोरोना वायरस का पहला मामला 30 जनवरी को केरल के त्रिशूर जिले में आया था।
  • फरवरी के मध्य तक थाइलैंड, सिंगापुर, हांगकांग, जापान और साउथ कोरिया से आने वाले यात्रियों की स्क्रीनिंग भी शुरू हो चुकी थी। फरवरी फरवरी आखिर तक नेपाल, वियतनाम, इंडोनेशिया और मलेशिया का नाम भी इस लिस्ट में जुड़ चुका था।
  • 5 मार्च को भारत आने वाले सभी यात्रियों के लिए स्क्रीनिंग को अनिवार्य कर दिया गया।
  • हालांकि, स्क्रीनिंग कोरोनावायरस का पक्का टेस्ट नहीं होता। इसके लक्षण 14 दिनों बाद भी दिख सकते हैं। इसके जरिए लक्षण दिखने पर यात्रियों को होम आइसोलेशन की सलाह दी जाती है।

निष्कर्ष : पड़ताल में पीएम मोदी द्वारा कही गई बात सही निकली। भारत में स्क्रीनिंग 17 जनवरी से ही शुरू हो गई थी, जबकि पहली मामला 30 जनवरी को दर्ज हुआ।