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फेक vs फैक्ट / भारत के नक्शे के साथ कम्युनिटी ट्रांसमिशन के अलर्ट वाला वायरल ग्राफिक झूठा, सरकार और विशेषज्ञों ने इसे खारिज किया

The warning of community transmission being given along the map of India is misleading, the government and experts reject it
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The warning of community transmission being given along the map of India is misleading, the government and experts reject it

दैनिक भास्कर

Jun 24, 2020, 05:10 PM IST

क्या वायरल : India in Pixels की तरफ से जारी किया गया एक इंफोग्राफिक। इसमें देश के नक्शे पर चिन्हित करके बताया गया है कि किन-किन राज्यों में कोविड-19 का कम्युनिटी ट्रांसमिशन दस्तक दे सकता है। सबसे ज्यादा खतरा तेलंगाना राज्य में दिखाया गया है। 

  • नक्शे में हर राज्य के ऊपर एक प्रतिशत लिखा हुआ है। इसी प्रतिशत के आधार पर कम्युनिटी ट्रांसमिशन के खतरे का आकलन किया गया है। अब ये प्रतिशत कहां से आया? इस प्रतिशत को निकालने के लिए एक फॉर्मूला है, जो नक्शे पर ही लिखा है। 
  • दिए गए फॉर्मूले के अनुसार, राज्य में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या में से ठीक होने वाले मरीजों की संख्या को घटाना है। फिर इसे 100 से गुणा (मल्टीप्लाई) करना है। अब इस संख्या को क्वारैंटाइन लोगों की संख्या से भाग (डिवाइड) करना है। 

सोशल मीडिया पर इस नक्शे को शेयर करते हुए कम्युनिटी ट्रांसमिशन की चेतावनी दी जा रही है 

https://www.facebook.com/pushpendra.awadhiya.9/posts/10158643429201202

https://www.facebook.com/theUniversityofentertainment/posts/587334278586192

https://twitter.com/vidyasagarallam/status/1275075307855208462

फैक्ट चेक पड़ताल

  • नक्शे पर India in Pixels लिखा हुआ है। हमने इस नाम के पेज सोशल मीडिया पर ढूंढना शुरू किए। इस नाम का एक फेसबुक पेज मिला, जहां कई आंकड़ों को भारत के नक्शे पर इंफोग्राफिक के रूप में पोस्ट किया जाता है। बड़ी संख्या में लोग इन पोस्ट्स को शेयर भी करते हैं।
  • कम्युनिटी ट्रांसमिशन वाले नक्शे का यहां लंबा स्पष्टीकरण भी दिया गया है। ये स्पष्टीकरण बाद में जोड़ा गया है। क्योंकि इसके आगे एडिटेड लिखा हुआ है। शेयर करने वाले यूजर यदि इसे ही ध्यान से पढ़ लेते तो न ही इसे सही माना जाता न ही शेयर किया जाता। डिस्कलेमर में साफ लिखा है कि इस इंफोग्राफिक को देखकर घबराएं नहीं। हम संक्रमण को लेकर कोई दावा नहीं कर रहे हैं।
  • गौर करने वाली बात है कि पहले ये डिस्कलेमर नहीं डाला गया था। पोस्ट सोशल मीडिया पर जब वायरल हो गई उसके बाद कैप्शन को एडिट करके स्पष्टीकरण लिखा गया।
  • ऐसी ही स्पष्टीकरण ट्विटर पर भी है। 
  • तेलंगाना सरकार ने खास तौर पर इस नक्शे को लेकर एक प्रेस नोट जारी किया है। इसमें न सिर्फ कम्युनिटी ट्रांसमिशन के आकलन के लिए उपयोग किए गए फॉर्मूले को बेबुनियाद बताया है। बल्कि इसे तथ्यात्मक रूप से भी गलत कहा है।
वायरल नक्शे को लेकर जारी किया गया तेलंगाना सरकार का प्रेस नोट
  • तेलंगाना सरकार के प्रेस नोट में यह भी कहा गया है कि आईसीएमआर पहले ही घोषित कर चुका है कि राज्य में कम्युनिटी ट्रांसमिशन नहीं है। 
  • तेलंगाना सरकार ने नक्शे में दिए गए फॉर्मूले के आधार पर राज्य में क्वारैंटाइन मरीजों की संख्या और पॉजिटिव व ठीक होने वाले मरीजों की संख्या का कैलकुलेशन करके बताया है। इस कैलकुलेशन के अनुसार तेलंगाना का आंकड़ा 0.198% होगा। जबकि नक्शे में इसे 122% बताया गया है। हालांकि, ये भी स्पष्ट किया गया है कि इस्तेमाल किया गया फॉर्मूला रैंडम है। जिसका कोई आधार नहीं है।
प्रेस नोट का ही एक हिस्सा
  • वायरल दावे के फॉर्मूले के आधार पर कम्युनिटी ट्रांसमिशन की दलील में कितनी सच्चाई है। यह जानने के लिए हमने आईसीएमआर के महामारी एवं संक्रमण से जुड़ी बीमारियों के एक विशेषज्ञ से बात की। उन्होंने बताया कि वर्तमान में वैज्ञानिक डॉ. रेड्डी की थ्योरी के आधार पर ही कम्युनिटी ट्रांसमिशन घोषित किया जाता है। वह ये है कि अगर वायरस से संक्रमित 70% मरीजों के संक्रमण की जानकारी ही सरकार के पास न हो, तो वह कम्युनिटी ट्रांसमिशन होगा। इस थ्योरी के आधार पर कम्युनिटी ट्रांसमिशन की दस्तक वाली बात भ्रामक है। 
  • आईसीएमआर के महामारी विशेषज्ञ ने स्पष्ट कहा : नक्शे में जिन पैमानों पर कम्युनिटी ट्रांसमिशन की बात कही जा रही है। वह बेबुनियाद हैं।

निष्कर्ष : वायरल नक्शे में जिस फॉर्मूले के आधार पर कम्युनिटी ट्रांसमिशन की बात कही जा रही है वह निराधार है। तेलंगाना सरकार के साथ ही आइसीएमआर के विशेषज्ञ ने भी इसे सिरे से खारिज कर दिया है। 

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