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  • Fake news about India to head World Health Organization from 22nd May is technically incorrect

फैक्ट चेक / 'विश्व स्वास्थ्य संगठन की बागडोर भारत के हाथ' वाला मैसेज गलत, फैसले लेने वाली बॉडी में चेयरमैन नहीं, महानिदेशक पोस्ट होती है

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  • क्या वायरल: वाट्सऐप पर एक मैसेज वायरल - हमारा भारत बना W.H.O का चेयरमैन !! 22 मई से भारत के हाथों में बागडोर, गौरवान्वित क्षण सभी को बहुत-बधाई
  • सच्चाई: दुनिया के सबसे बड़े स्वास्थ्य संगठन की बागडोर किसी देश के हाथ नहीं होती, इसमें चेयरमैन जैसा पद नहीं होता, हेल्थ असेंबली ही सर्वोपरि

दैनिक भास्कर

May 20, 2020, 04:20 PM IST

कोरोना महामारी को रोकने के लिए उठाए जा रहे कदमों में विश्व स्वास्थ्य संगठन की भूमिका सबसे अहम है। भारत में भी कोरोना का संक्रमण एक लाख से ऊपर चला गया है और लॉकडाउन का चौथा चरण चल रहा है। इसी बीच कुछ शरारती तत्व भारत को विश्व स्वास्थ्य संगठन का मुखिया बनाने पर तुले हैं। ऐसे लोग सोशल मीडिया पर मैसेज वायरल करके एक-दूसरे को बधाई भी दे रहे हैं।
 
पड़ताल में यह मैसेज पूरी तरह से गलत साबित हुआ क्योंकि दुनिया के सबसे बड़े स्वास्थ्य संगठन की बागडोर किसी देश के हाथ नहीं होती। इसकी सर्वोच्च बॉडी में चेयरमैन जैसा पद नहीं होता और हेल्थ असेंबली ही सारे फैसले लेती है। हां, ये खबर जरूर है कि संगठन की सहयोगी एक्जक्यूटिव बॉडी की कमान भारत को सौंपी जा सकती है।

भारत मंगलवार को डब्ल्यूएचओ के कार्यकारी बोर्ड के लिए चुना गया था। बोत्सवाना, कोलंबिया, घाना, गिनी बिसाऊ, मेडागास्कर, ओमान, कोरिया, रूस और यूके कार्यकारी बोर्ड के लिए चुने गए अन्य देश हैं। कार्यकारी बोर्ड का काम हेल्थ असेंबली के निर्णयों और नीतियों को प्रभावी बनाना, इसे सलाह देना और इसके कार्य को सुविधाजनक बनाना है। भारत की डॉ सौम्या स्वामीनाथन संगठन की उप महानिदेशक हैं।

क्या वायरल हो रहा 
वॉट्सऐप पर एक टेक्स्ट मैसेज वायरल हो रहा जिसमें कहा जा रहा है कि - हमारा भारत बना W.H.O का चेयरमैन !! 22 मई से भारत के हाथों में बागडोर, गौरवान्वित क्षण सभी को बहुत-बधाई। सर्वे सन्तु: निरामया।

वाट्सऐप पर ये मैसेज वायरल हो रहा है और इसके जरिये लोग एक-दूसरे को बधाई दे रहे हैं।

फैक्ट चेक पड़ताल

  • इस मैसेज की सच्चाई जानने के लिए हमने खबराें के साथ विश्व स्वास्थ्य संगठन की स्थापना और काम करने के नियमों के बारे में जानकारी जुटाई और भारत में संगठन से जुड़े एक वरिष्ठ कंसल्टेंट डॉ. शेखावत भारती से बात भी की।

  • जानकारी से स्पष्ट हुआ कि 7 अप्रैल 1948 को स्थापित स्विट्जरलैंड के जेनेवा से संचालित होने वाला विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यूएचओ दुनिया का सबसे बड़ा स्वास्थ्य संगठन है। यह संयुक्त राष्ट्र संघ की इकाई है। कोरोना महामारी पर दुनियाभर के देशों के लिए सुझाव और बड़े फैसले लेने की जिम्मेदारी इसी संगठन की है।
  • वर्तमान में 72 साल पुराने इस संगठन के महानिदेशक इथियोपिया के डॉ टैड्रोस ऐडरेनॉम गैबरेयेसस हैं और उन्हीं की लीडरशिप में सारे फैसले लिए जाते हैं। डॉ ट्रेडोस ने 1 जुलाई 2017 को पांच साल के लिए पदभार संभाला था और वे 2022 तक बने रहेंगे।
  • इस संगठन की दो प्रमुख बॉडी हैं - हेल्थ असेम्बली और एक्जीक्यूटिव बोर्ड। इनमें से हेल्थ असेम्बली ही सर्वोपरि बॉडी है और सारे फैसले यही करती है। एक्जीक्यूटिव बोर्ड इस बॉडी को सलाह देता है। 
  • हेल्थ असेम्बली में सर्वोच्च पद महानिदेशक या डायरेक्टर जनरल का होता है और पूरे संगठन में चेयरमैन जैसा कोई पद नहीं होता है। (विस्तृत जानकारी के लिए WHO का लिंक)
WHO की मीटिंग का एक दृश्य। 
  • अलबत्ता, ये बात जरूर है कि एक्जीक्यूटिव बोर्ड में दुनिया के कुल 34 देशाें की तरह भारत की भी हिस्सेदारी है। इसकी लीडरशिप 1 साल के लिए किसी देश को मिलती है। अभी तक जापान इस बोर्ड का प्रमुख था और इसी महीने इसका कार्यकाल पूरा हो रहा है। 
  • बीते दिनों इसके लिए भारत का नाम भी चर्चा में आया है, लेकिन इस पर अभी तक कोई फैसला नहीं हुआ है। संभावना है कि 22 मई को इस बारे में कोई फैसला हो जाए। हालांकि भारत को 10 देशों के साथ अगले 3 साल के लिए बोर्ड में चुन लिया गया है।
  • संगठन से जुडे कंसल्टेंट डॉ. शेखावत ने स्पष्ट किया कि डब्ल्यूएचओ पूरी तरह से एक गैर राजनीतिक संगठन है और देशों की सीमाओं से परे, पूरी दुनिया के लिए है। ऐसे में यह कहना कि संगठन की बागडोर पूरी तरह से भारत के हाथ में होगी तकनीकी तौर पर कहना गलत होगा।

    निष्कर्ष:  हमारा भारत बना W.H.O का चेयरमैन !! 22 मई से भारत के हाथों में बागडोर वाला मैसेज तकनीकी तौर पर गलत है क्योंकि भारत को अगर एक्जीक्यूटिव बोर्ड की लीडरशिप मिलती भी है तो भी सारे फैसले हेल्थ असेम्बली ही लेगी।

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