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  • 65 Percent Students Apply For Education Loan In America Says Newyork Times Report

अमेरिका में 65% छात्र स्टूडेंट लोन लेते हैं, हर एक पर औसत 20 लाख रु. का बोझ

एक वर्ष पहले
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  • सरकारी सहायता से पब्लिक कॉलेजों के खर्च की केवल 30 फीसदी भरपाई हो पाती है, 2018 में 25% लोगों ने स्टूडेंट लोन नहीं चुकाया था

एन कार्न्स
अमेरिका में छात्रों का पढ़ाई के लिए कर्ज लेना जिंदगी की हकीकत बन चुका है। कॉलेज स्टूडेंट पर कर्ज का औसत बोझ बीस लाख रुपए से अधिक है। स्वयंसेवी संगठन- कॉलेज एक्सेस और सक्सेस इंस्टीट्यूट की सालाना रिपोर्ट के अनुसार 2018 में निजी और सरकारी मदद से चलने वाले पब्लिक कॉलेजों से बैचलर डिग्री लेने वाले तीन में से दो छात्रों (65%) पर कर्ज था। इससे एक वर्ष पहले ग्रेजुएट होने वाले छात्रों का कर्ज दो प्रतिशत की दर से बढ़ा है। 1996 से 2012 के बीच छात्र ऋण में औसतन हर वर्ष चार प्रतिशत बढ़ोतरी हुई थी।
राष्ट्रीय कंज्यूमर कानून सेंटर में छात्र ऋण प्रोजेक्ट की डायरेक्टर परसिस यू कहती हैं, \'विकास दर धीमी पड़ने के बावजूद छात्र ऋण का वर्तमान स्तर बहुत ज्यादा है। यह संख्या चिंताजनक गति से बढ़ रही है\'। पश्चिम की तुलना में उत्तरपूर्वी राज्यों में औसत छात्र ऋण ज्यादा है। यह उटा में 13 लाख रु. और कनेक्टीकट में 27 लाख रु. से अधिक है। इंस्टीट्यूट के अनुमान कॉलेजों द्वारा दी गई केंद्र सरकार और निजी स्टूडेंट कर्ज की जानकारी पर आधारित हैं। इनमें मुनाफे में चलने वाले कॉलेजों के कर्ज शामिल नहीं हैं क्योंकि बहुत कम कॉलेज छात्र ऋण की जानकारी देते हैं। रिपोर्ट में बताया गया है, पब्लिक कॉलेजों के लिए सरकारों और स्थानीय संस्थाओं की सहायता बढ़ने के कारण कर्ज वृद्धि की दर धीमी है। इन कॉलेजों में 75% से अधिक छात्र पढ़ते हैं।
महामंदी के समय टैक्स की आय में कमी की वजह से सरकारों और स्थानीय संस्थाओं की प्रति छात्र सहायता में एक लाख 40 हजार रु. की गिरावट आई थी। दूसरी तरफ प्रति छात्र कर्ज 77 हजार रु. से अधिक बढ़ गया था। उच्च शिक्षा अधिकारी एसोसिएशन के मुताबिक अब भी मंदी से पहले जारी सरकारी सहायता की आधी भरपाई हो पाई है। कॉलेजों की आमदनी का मुख्य स्रोत ट्यूशन फीस है। रिपोर्ट में कहा गया है, केन्द्र सरकार की मदद में थोड़ी बढ़ोतरी से राहत तो मिली है, लेकिन 2018 में अधिकतम मदद से कॉलेज के खर्च की 30 % भरपाई हुई।
रिपोर्ट में बताया गया है, 2018 के अंत में केंद्र सरकार से ऋण लेने वाले 25 % छात्रों ने कर्ज नहीं चुकाया था। लगातार नौ माह तक भुगतान न करने वालों की गिनती डिफाल्टर के बतौर होती है। शिक्षा विभाग ने बताया, डिफाल्टरों की संख्या कम हो रही है। 2016 में अपना ऋण चुकाने की शुरुआत करने वाले लगभग 10% लोग 2018 तक डिफाल्टर हो गए थे। इससे पूर्व के वर्ष में डिफाल्टरों का प्रतिशत 11 था।
© The New York Times

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