चीन / विश्व के फाइनेंशियल सिस्टम पर नियंत्रण का इरादा, चीन अपनी डिजिटल करंसी लॉन्च करने के रास्ते पर तेजी से बढ़ा



China is fast on track to launch its digital currency
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China is fast on track to launch its digital currency

  • चीन अपनी करंसी रेनमिनबी का उपयोग बढ़ाना चाहता है
  • लिब्रा को सुपर करंसी बनने से रोकने का प्रयास

Dainik Bhaskar

Oct 21, 2019, 12:27 PM IST

रेमंड झोंग, बीजिंग. फेसबुक को अपनी डिजिटल करंसी लिब्रा लॉन्च करने की दिशा में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। उधर, चीन चाहता है कि उसकी डिजिटल मुद्रा जल्दी ही बाजार में आ जाए। दूसरी तरफ चीन पूरी गति से क्रिप्टोकरंसी पर काम कर रहा है। बिटकॉइन और अन्य करंसी से चीन की करंसी अलग हो सकती है। फेसबुक को अमेरिका के सरकारी रेगुलेटरों से जूझना पड़ रहा है। कई कार्पोरेट पार्टनर प्रोजेक्ट से पीछे हट चुके हैं। सरकारी ई-करंसी से चीन सरकार को अपने नागरिकों के पैसा खर्च करने के संबंध में और अधिक जानकारी मिल सकेगी। उसे अपराधों पर काबू पाने और अर्थव्यवस्था के प्रबंध के लिए अधिक शक्तियां मिलेंगी। 

फेसबुक के लिब्रा प्रोजेक्ट की घोषणा के बाद चीन ने काम शुरू किया

  1. नागरिकों की प्राइवेसी से जुड़ी चिंताएं भी सामने आएंगी। चीनी सेंट्रल बैंक के एक बड़े अधिकारी मू छांगचुन ने एक ऑनलाइन लेक्चर में कहा कि ‘अगर लिब्रा को हर किसी ने स्वीकार कर लिया तो उसके ग्लोबल सुपर करंसी बनने की संभावना है। हमें अपनी मौद्रिक संप्रभुता बनाए रखने के लिए आगे निकलने की जरूरत है’। पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने 2014 में क्रिप्टोकरंसी रिसर्च ग्रुप शुरू किया था। 2016 में सेंट्रल बैंक के गवर्नर झाउ शियाओचुआन ने डिजिटल सिक्का जारी करने पर भी विचार किया था। 2017 में बिटकॉइन का मूल्य उछलने के बाद चीन ने क्रिप्टोकरंसी एक्सचेंज बंद कर दिए। ई-करंसी के जरिये पैसा जुटाने के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई। इसके बाद अधिकारियों ने भाषणों और लेखों में डिजिटल करंसी पर चर्चा जारी रखी। लिब्रा की घोषणा होने के बाद चीन ने कहा कि वह अपने प्रयास तेज कर रहा है। चीनी अधिकारियों ने नहीं बताया है कि प्रोजेक्ट कब पूरा होगा। पिछले माह एक पत्रकार वार्ता में सेंट्रल बैंक के गवर्नर यी गांग ने बताया कि नया ई-कॉइन नकद के केवल एक हिस्से की जगह लेगा।

  2. चीन सरकार ने डेटा जानकारी साझा करेगा

    चीन की प्रस्तावित करंसी के कुछ तत्व फेसबुक की लिब्रा के समान होंगे। फेसबुक ने कहा था, उसके डिजिटल वालेट केलिब्रा के माध्यम से लिब्रा खर्च किया जाएगा। आईडी की पुष्टि जरूरी होगी। कंपनी का कहना है, वह लोगों के फाइनेंशियल डेटा का उपयोग जिम्मेदारी से करेगी। चीन का कहना है, वह डेटा की जानकारी बाजार से तो अलग रखेगा लेकिन सरकार से नहीं। लेनदेन का डेटा सेंट्रल बैंक देख सकेगा। चीनी कंज्यूमर वर्षों से अपने फोन और दो मोबाइल पेमेंट सर्विस के माध्यम से भुगतान करते हैं। अलीपे और वीचैटपे चीनी अर्थव्यवस्था के आधार स्तंभ हैं। अलीपे प्रति सेकंड दो लाख 56 हजार पेमेंट का दावा करता है। वीजा का कहना है, वह 65000 करती है। लिब्रा ने शुरुआत में 1000 प्रति सेकंड का दावा किया है। चीनी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि उनका लक्ष्य लिब्रा की नकल करने का नहीं होगा। इसकी बजाय हम ग्लोबल फाइनेंशियल व्यवस्था में परिवर्तन पर आगे बढ़ना चाहते हैं। 

  3. रेनमिनबी बन सकती है पसंदीदा करंसी

    बीजिंग लंबे समय से चाहता है कि चीन की करंसी रेनमिनबी का अंतरराष्ट्रीय व्यापार और फाइनेंस में अधिक उपयोग हो। वैसे, डिजिटल रेनमिनबी के रातों-रात विश्व की नई पसंदीदा करंसी बनने संभावना नहीं है। सेंट्रल इकोनॉमिक्स, फाइनेंस यूनिवर्सिटी, बीजिंग के प्रोफेसर डेंग जियानपेंग का कहना है, लिब्रा की जैसी भी स्थिति हो, फेसबुक ने एक ऐसी चीज शुरू कर दी है जिसे रोकना असंभव है। फेसबुक सफल नहीं हुआ तो कोई अन्य कंपनी कामयाब होगी।

  4. ई करंसी का आइडिया बहुत नया नहीं है, कई देशों ने परीक्षण किया

    राष्ट्रीय क्रिप्टोकरंसी का आइडिया नया नहीं है। ब्रिटेन, सिंगापुर और कनाडा के सेंट्रल बैंक फाइनेंशियल सिस्टम में डिजिटल टोकन को शामिल करने का परीक्षण कर चुके हैं। यूरोपियन सेंट्रल बैंक बोर्ड के एक सदस्य ने बताया कि लिब्रा की लॉन्चिंग का ऐलान हमारे लिए नींद से जागने जैसा था। इसके बाद बैंक ने इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट के प्रयासों को नए सिरे से शुरू किया।

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