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  • Donald Trump Withdrew His Order Ten Minutes Before The US Attack On Iran

ईरान पर अमेरिकी हमले से दस मिनट पहले ही डोनाल्ड ट्रम्प ने अपना आदेश वापस ले लिया

एक वर्ष पहले
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  • राष्ट्रपति ने पीछे हटने के फैसले की जानकारी उपराष्ट्रपति और सलाहकारों तक को नहीं दी थी
  • एयरक्राफ्ट कैरियर और नेवी के जहाजों ने हमले की पूरी तैयारी कर रखी थी
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पीटर बेकर, एरिक श्मिट, माइकेल क्राउली. वाशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 20 जून की दोपहर जब संसद के नेताओं से मुलाकात की तब वे पहले ही ईरान पर हमले का फैसला ले चुके थे। एक अमेरिकी जासूसी ड्रोन विमान को मार गिराने का बदला लेने के लिए ट्रम्प ने हवाई हमले का रास्ता चुना था। लेकिन, तीन घंटे बाद ही निर्णय बदल दिया गया। उन्होंने, उपराष्ट्रपति, विदेश सचि‌व और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार से सलाह तक नहीं ली थी। एयरक्राफ्ट कैरियर और अन्य जहाजों पर मिसाइल, एयरप्लेन हमले के लिए तैयार थे।  ट्रम्प ने रक्षा विभाग- पेंटागन को हमला शुरू होने से दस मिनट पहले ही आगे न बढ़ने का आदेश दिया। उपराष्ट्रपति माइक पेंस और अन्य अधिकारी व्हाइट हाउस लौटे तो हमले से पीछे हटने का फैसला सुनकर स्तब्ध रह गए थे। वे इस प्रत्याशा में गए थे कि अब पूरी रात फौजी अभियान पर नजर रखेंगे। 
 
तीन माह बाद ट्रम्प के कुछ सहयोगी ही आशंका जताते हैं कि अमेरिका के बदला न लेने को ईरान ने कमजोरी का संकेत माना है। इससे उसका सितंबर में सऊदी अरब के तेल ठिकानों पर हमला करने का हौसला बुलंद हुआ। व्हाइट हाउस के सहायकों, पेंटागन के अधिकारियों, सैनिक अफसरों, अमेरिकी और विदेशी राजनयिकों, संसद सदस्यों से बातचीत के आधार पर उस दिन का ब्योरा सामने आया है। इन सभी ने अपना नाम न बताने की शर्त रखी है। 925 करोड़ रुपए का ग्लोबल हॉक ड्रोन गिराए जाने के दूसरे दिन सुबह 7 बजे तब के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जान बोल्टन के दफ्तर में विदेशमंत्री माइक पोम्पियो, चेयरमैन जाइंट चीफ ऑफ स्टाफ जनरल जोसेफ डनफोर्ड, दो कार्यकारी प्रतिरक्षा सचिव- पैट्रिक शनाहन और मार्क एस्पर के बीच नाश्ते पर चर्चा हुई। बैठक में हमले के कई विकल्पों पर विचार किया गया। 11 बजे सभी अधिकारी राष्ट्रपति से मिले। एक घंटे तक चर्चा हुई। इन लोगों ने बताया कि तीन ईरानी ठिकानों पर हमले में 150 लोगों की मौत हो सकती है। जब सबृ लोग बैठक से बाहर आए तो उन्हें भरोसा था कि ट्रम्प ने हमले का फैसला ले लिया है। 
 
वाशिंगटन के समयानुसार रात 8 बजे या इलाके में सुबह होने से पहले हमला किया जाना था। दरअसल ट्रम्प संदेह के घेरे में थे। इस आशय की खबरें आई कि ड्रोन गिराने वाले ईरानी कमांडर ने स्वयं फैसला लिया है। सरकार ने कोई आदेश नहीं दिया। बोल्टन हमले के पक्ष में थे। ट्रम्प ने फॉक्स न्यूज के एंकर टकर कार्लसन से कुछ दिन पहले चर्चा की थी। उन्होंने ट्रम्प को याद दिलाया कि वे अमेरिका को अंतहीन लड़ाइयों से बाहर निकालने की बात कहकर सत्ता में आए हैं। क्या अब वे नया युद्ध शुरू करेंगे। कार्लसन ने ट्रम्प से कहा कि वे ऐसा करके दोबारा अपने चुनाव जीतने की बात भूल जाएं।
 
पीछे हटने का आदेश आ गया जनरल डनफोर्ड ने टेम्पा, फ्लोरिडा में अमेरिकी मध्य कमान के प्रमुख जनरल कैनेथ मेकेंजी को व्हाइट हाउस के हमला न करने के नए आदेश की सूचना दी। फौरन टोमाहाक मिसाइलों को निष्क्रिय कर दिया गया। हमलावर विमान वापस बुला लिए गए। एयरक्राफ्ट कैरियर अब्राहम लिंकन के कमांड सेंटर में रियर एडमिरल माइकेल बॉयल हमले के अंतिम आदेश की प्रतीक्षा कर रहे थे। एडमिरल बॉयल याद करते हैं, हमारे सभी सिस्टम चालू थे। सभी लाइट्स ग्रीन थीं। हम अंतिम आदेश का इंतजार कर रहे थे। और पीछे हटने का ऑर्डर आया। स्तब्ध रह गए थे सलाहकार राष्ट्रपति के उच्च सलाहकार 20 जून को रात में जब व्हाइट हाउस लौटे तो हमले का आदेश वापस लिए जाने पर हतप्रभ रह गए थे। पोम्पियो ने इसे अविश्वसनीय कहा। बोल्टन उत्तेजित थे। सलाहकार फिर स्तब्ध रह गए जब दूसरे दिन सुबह ट्रम्प ने टि्वटर पर हमला रद्द करने की जानकारी दी।
 
हमले के लिए दस हजार सैनिक और कई जहाज तैयार थे उत्तर अरब सागर में हमले के लिए दस हजार से अधिक नौसैनिक और एयरमैन तैयार थे। इलाके में नेवी के दो जहाजों से टोमाहाक क्रूज मिसाइल छोड़ने की योजना थी। एयरक्राफ्ट कैरियर पर तैनात लड़ाकू विमान हमले में हिस्सा नहीं लेते। वे किसी ईरानी हमले का जवाब देने के लिए उत्तर अरब सागर पर हवा में उड़ान भरते।

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