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डेटा दुरुपयोग का मामला / फेसबुक के खिलाफ जुर्माना और जकरबर्ग पर कार्रवाई के मामले में मतभेद उभरे



Facebook Faces a Big Penalty, but Regulators Are Split Over How Big
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Facebook Faces a Big Penalty, but Regulators Are Split Over How Big

  • अमेरिका के फेडरल ट्रेड कमीशन के चेयरमैन समझौते को मंजूरी देने के पक्ष में 
  • कमीशन के रिपब्लिकन सदस्य जकरबर्ग पर कार्रवाई के लिए तैयार नहीं 

Dainik Bhaskar

May 06, 2019, 01:05 PM IST

सेसिला किंग
सोशल मीडिया दिग्गज फेसबुक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के मामले में अमेरिकी नियामक संस्था फेडरल ट्रेड कमीशन (एफटीसी) में मतभेदों के संकेत मिले हैं। कंपनी ने अप्रैल में घोषणा की थी कि यूजर के निजी डेटा के दुरुपयोग पर दावों का निपटारा करने के लिए उसने 21 हजार करोड़ रुपए से लेकर 35 हजार करोड़ रुपए तक अलग रख दिए हैं। इससे पता लगता था, फेडरल रेगुलेटर चाहते हैं कि कंपनी की जवाबदेही तय की जाए। अब स्थिति ऐसी नहीं है।

क्या है मामला?

  1. जुर्माने की रकम को लेकर है असहमति

    कई माह पहले एफटीसी के कमिश्नर सहमत थे कि कंपनी पर ऐतिहासिक जुर्माना लगाया जाए। लेकिन, अब टेक्नोलॉजी कंपनी को दंड के आकार और उसके दायरे पर कमीशन के सदस्य विभाजित हैं।

    • मामले की जानकारी रखने वाले तीन लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जुर्माने की रकम को लेकर असहमति है। इसके साथ फेसबुक के प्रमुख मार्क जकरबर्ग को निजी तौर पर जवाबदेह मानने पर भी मतभेद हैं।
    • फेसबुक ने बचाव में कहा है कि अपने 35000 कर्मचारियों के कारनामों के लिए जकरबर्ग को कानूनी रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए।

  2. रेगुलेटरों और कंपनी के बीच कुछ दिन में बातचीत खत्म होने की संभावना

    कमीशन के चेयरमैन, रिपब्लिकन पार्टी के जोसफ सिमन्स के पास दो अन्य रिपब्लिकन कमिश्नरों की सहमति है। फैसले के लिए जरूरी तीन वोट उनके पास हैं। दो अन्य कमिश्नर डेमोक्रेटिक पार्टी के हैं। इसलिए सिमन्स चाहते हैं कि पार्टी आधार पर 3-2 से कोई निर्णय न हो।

    • ऐसा होने पर संसद की जबर्दस्त आलोचना झेलनी पड़ेगी। रेगुलेटरों और कंपनी के बीच कुछ दिन के भीतर बातचीत खत्म होने की संभावना है। उसके बाद फैसले की घोषणा कर दी जाएगी।

  3. 2012 में गूगल पर लगाया गया था 157 करोड़ रुपए का जुर्माना

    इस मामले पर दुनियाभर की नजर है। इससे परीक्षा होगी कि अमेरिकी सरकार किस तरह टेक्नोलॉजी दिग्गजों की नाक में नकेल कसती है। कमीशन ने कुछ सख्त फैसले किए हैं। उसने 2012 में यूजरों को गुमराह करने के लिए गूगल पर 157 करोड़ रुपए जुर्माना लगाया था।

    • डेमोक्रेटिक पार्टी के कई सदस्य सिलिकॉन वैली की बड़ी कंपनियों को नियंत्रण में रखने के लिए अभियान चला रहे हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी के कमिश्नर रोहित चोपड़ा ने कमीशन के नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाई है। उन्होंने कमीशन के सदस्यों से सीनियर मैनेजमेंट को बर्खास्त करने की अपील की है।

  4. समझौता प्रस्ताव प्राइवेसी में उल्लंघन के नए मापदंड तय करना चाहता है

    प्रस्तावित समझौते में फेसबुक की यूजर को ट्रैक करने और अपने पार्टनरों से उनका डेटा शेयर करने की सीमा तय करने का कोई प्रावधान संभवत: नहीं होगा। अमेरिका में डेटा प्राइवेसी की वकालत करने वाले लोग ऐसा प्रावधान चाहते हैं। फेसबुक इसका विरोध कर रही है।

    • सिमन्स का कहना है, समझौता प्रस्ताव प्राइवेसी में उल्लंघन के नए मापदंड तय करना चाहता है। इस मामले की तह में कंपनी और कमीशन के बीच 2011 में हुआ एक समझौता है। इसके तहत फेसबुक ने अपनी प्राइवेसी प्रक्रिया में परिवर्तन का वादा किया था। लेकिन, ब्रिटिश कंसल्टिंग फर्म कैम्ब्रिज एनालिटिका ने बड़े पैमाने पर फेसबुक के डेटा का उपयोग किया था। यह समझौते का उल्लंघन था। 

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