रिसर्च / प्लास्टिक के खतरनाक तत्व पर लगाम लगाना मुमकिन

It is possible to rein in the hazardous plastic element
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It is possible to rein in the hazardous plastic element

  • पॉलीस्टाइरीन को सूरज की रोशनी से तोड़ा जा सकता है
     

दैनिक भास्कर

Oct 14, 2019, 12:38 PM IST

विलियम ब्रॉड. प्लास्टिक से प्रदूषण की बढ़ती चिंता के बीच एक थोड़ी राहत देने वाली खबर आई है। दो अमेरिकी संगठनों के वैज्ञानिकों का कहना है, प्लास्टिक के एक खतरनाक तत्व को नियंत्रित करना संभव है। वुड्स होल ओशनोग्राफिक इंस्टीट्यूट और मेसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के पांच वैज्ञानिकों ने पाया कि सूर्य का प्रकाश प्लास्टिक के प्रमुख तत्व पॉलीस्टाइरीन को कुछ दशकों में नष्ट कर देता है। वैसे, कई पुराने अध्ययनों में अनुमान लगाया गया था कि पॉलीस्टाइरीन को खत्म होने में हजारों साल लगते हैं।

 

स्टडी के प्रमुख लेखक कोलिन वार्ड ने बताया कि सरकारों व विशेषज्ञों का अनुमान रहा है कि पॉलीस्टाइरीन हमेशा बना रहता है। हमारी टीम ने पाया है कि सूर्य का प्रकाश पॉलीस्टाइरीन को ऑर्गेनिक कार्बन के केमिकल टुकड़ों में तोड़ता है। ये समुद्र के पानी में घुल जाते हैं। उनसे निकलने वाली कार्बन डाई ऑक्साइड इतनी कम रहती है कि जलवायु परिवर्तन पर ज्यादा असर नहीं पड़ता है। इस प्रक्रिया के अंत में प्लास्टिक गायब हो जाता है। स्टडी में कहा गया कि समुद्रों से प्लास्टिक निकालने के कई अभियानों के दौरान उनमें मिले प्लास्टिक की मात्रा काफी कम पाई गई है।

 

हर कोई जानता है कि सूर्य के प्रकाश से प्लास्टिक प्रभावित होता है। डॉ. वार्ड ने लिखा है, मैदान में पड़े प्लास्टिक के खिलौनों, पार्क की कुर्सियों और बेंच का रंग सूर्य के प्रकाश से फीका पड़ जाता है। शोधकर्ताओं ने अपनी स्टडी को प्राकृतिक वातावरण में पॉलीस्टाइरीन के टूटने का पहला सबूत बताया है। वैज्ञानिकों ने लैब में पॉलीस्टाइरीन के पांच सैंपलों का परीक्षण पानी से भरे बंद कंटेनर में किया। उसे सूर्य की रोशनी जैसे विशेष लैम्प के सामने रखा गया। उसके बाद प्लास्टिक के टूटे हिस्सों को जानने के लिए पानी की जांच की। स्टडी से यह भी पता लगा कि पॉलीस्टाइरीन से प्लास्टिक के खत्म होने की प्रक्रिया धीमी होती है। पॉलीस्टाइरीन का उपयोग सिर्फ एक बार उपयोग किए जाने वाले कप, स्ट्रा, कंटेनर आदि में होता है।

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