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अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव भारतीय मूल की तुलसी गबार्ड के तेवरों से विवाद

10 महीने पहले
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  • डेमोक्रेटिक दावेदार के कई बयानों से पार्टी के नेता हतप्रभ
  • ट्रम्प समर्थकों, श्वेत राष्ट्रवादियों, रूसियों ने उनकी प्रशंसा की है
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अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवारी की दावेदार तुलसी गबार्ड के रुख ने उनकी पार्टी को हैरत में डाल दिया है। उन्होंने प्रारंभिक चुनाव में थोड़ी अराजकता की स्थिति पैदा कर दी है। भारतीय मूल की तुलसी ने अगले सप्ताह होने वाली बहस के बहिष्कार की धमकी देकर सनसनी फैला दी है। उनका आरोप है कि पार्टी के लोग ही 2020 के चुनाव में सेंध लगा रहे हैं।

1) अमेरिकी, ट्रम्प के समर्थकों के समर्थन में आए

डेमोक्रेटिक दावेदारों के बीच तुलसी की रेटिंग दो अंक तक नहीं पहुंच पाई है। अगले सप्ताह होने वाली बहस में हिस्सा लेने के लिए दो अंक की रेटिंग जरूरी है। सबसे आश्चर्यजनक बात है कि ऐसे अमेरिकी उनके समर्थन में आगे आए हैं जो रिपब्लिकन पार्टी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के समर्थक हैं। ऑनलाइन वीडियो, टि्वटर मैसेज और इंटरव्यू में सभी दक्षिणपंथी इंटरनेट सितारों, श्वेतों की श्रेष्ठता के हिमायती श्वेत राष्ट्रवादियों ने हवाई की संसद सदस्य का तारीफ की है। उन्हें विदेश नीति पर तुलसी का अलग रुख पसंद है। ट्रम्प के पूर्व मुख्य रणनीतिकार स्टीव बैनन उनके राजनीतिक कौशल से प्रभावित हैं। कई डेमोक्रेट नेता ऑनलाइन रोबोट गतिविधि और रुसी मीडिया से समर्थन के संकेत मिलने से चिंतित हैं। हिलेरी क्लिंटन की पूर्व सहयोगी लॉरा रोसेनबर्गर का कहना है, रूसी रणनीतिकार डेमोक्रेटिक पार्टी के भीतर मतभेद पैदा करने के लिए तुलसी को उपयोगी मानते हैं। 

रुसी गतिविधि डेमोक्रेट्स के बीच विभाजन करने का प्रयास है। इससे 2016 के चुनाव में रूसी दखल जैसी ध्वनि मिल रही है। कट्‌टर और संकीर्ण दक्षिणपंथी मैसेज देने वाली साइट 4चान पर कई दक्षिणपंथी ट्रोल्स और यहूदी विरोधियों ने तुलसी को मम्मी संबोधित किया है। वे उनके इजरायल विरोधी बयानों को सही बताते हैं। अप्रैल में नव नाजी वेबसाइट डेली स्टॉर्मर ने दावा किया है कि दो प्रायमरी बहस में तुलसी की हिस्सेदारी सुनिश्चित करने में उसका हाथ है। अधिक लोगों का ध्यान खींचने के कारण तुलसी को दानदाताओं और अन्य लोगों का समर्थन मिल सकता है। इस कारण वे उम्मीदवारी की होड़ में बनी रहेंगी।

तुलसी गबार्ड भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की समर्थक हैं। हालांकि उन्होंने मध्य पूर्व में ताजा सैनिक हस्तक्षेप की आलोचना की है, तो तानाशाही प्रवृत्तियों के लिए कुख्यात नेताओं से रिश्ते भी बनाए हैं। वे 2015 में पेरिस में मिस्र के तानाशाह अब्दुल अल फत्ता सिसी से मिल चुकी हैं। उनके साथ रुसियों के साथ संबंध रखने वाली पूर्व रिपब्लिकन सांसद डाना रोहराबेचर भी थीं। तुलसी ने बार-बार सीरियाई तानाशाह बशर अल असद का बचाव किया है।  

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफ महाभियोग चलाने के प्रस्ताव पर मसाले बनाने वाली कंपनी पेंजी स्पाइसेस ने फेसबुक पर विज्ञापनों में 92 हजार डॉलर खर्चकिए हैं। पेंजी ने यह विज्ञापन 29 सितंबर से 5 अक्टूबर के बीच दिए हैं। वैसे, ट्रम्प समर्थकों ने सात लाख डॉलर से अधिक खर्चकिए हैं। पेंजी ऑनलाइन मसाले बेचती है। उसके अमेरिका में कई स्टोर हैं। फेसबुक के डेटा से पता लगा है, पेंजी सामाजिक मसलों, चुनाव या राजनीति पर विज्ञापन खर्च के मामले में सातवें नंबर पर है। 

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