जीने की राह / प्रयास के हर नतीजे को स्वीकारना ही संतोष



Accepting every conclusion of the effort is satisfying.
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Accepting every conclusion of the effort is satisfying.

  • आलसी आदमी दूसरों पर आरोप लगाकर खुद के पक्ष में बड़े सुंदर तर्क देता है

पं. विजयशंकर मेहता

पं. विजयशंकर मेहता

Nov 21, 2018, 11:34 PM IST

जीवन में संतोष उतर आना अच्छी बात है, लेकिन संतोष यदि समझ के साथ नहीं आया तो हो सकता है आप ज़िंदगी में एक गलत कदम उठा लें जिसका नाम है आलस्य। संतोष को ठीक से संभालकर जीवन में उपयोग नहीं किया तो वह पहले आपको आराम में पटकेगा फिर यही आराम आलस्य में बदल जाएगा। आलसी आदमी दूसरों पर आरोप लगाकर खुद के पक्ष में बड़े सुंदर तर्क देता है। वह दूसरों को कोसता है कि ये लालची हैं, इतनी भागमभाग कर रहे हैं, क्या मिलने वाला है?

 

यह दुनिया किसी को कुछ नहीं देती..। कहने और सुनने में सतही तौर पर ये बातें अच्छी लग सकती हैं, पर यह कहने वाले के आलस्य की घोषणा है। खुद कुछ करना नहीं चाहते तो ऐसा ताना-बाना बुनकर जो कर रहे हैं उनकी आलोचना शुरू कर देते हैं। संतोष का अर्थ है, जिसे प्राप्त करने के लिए प्रयास करें और यदि वह नहीं मिले तो परेशान न हों। सबको सबकुछ नहीं मिलता, लेकिन प्राप्त करने का प्रयास ही नहीं करें यह संतोष नहीं है।

 

दुनिया में जो कुछ भी परमात्मा ने बनाया है उसका सही पक्ष आपके जीवन में प्राप्त होना चाहिए और इसके लिए घोर परिश्रम करना पड़े तो करिए। किंतु संतोष को नहीं समझा तो वह आपके परिश्रम को ही पी जाएगा। संतोष का संबंध परिणाम से है। परिणाम आपके पक्ष में है तब तो प्रयास अच्छा होगा ही, लेकिन यदि परिणाम आपके अनुसार नहीं आया, जैसा चाहते थे वैसा नहीं हुआ तो फिर उस स्थिति में संतोष का भाव आपको निराश नहीं होने देगा। 

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