अस्तित्व / मेरी जींस क्या देखतेे हो, संसद में अपराधियों के सफेद कुर्तों केे दाग देखो



astitva article on controversy over Nusrat Jahan and Mimi Chakraborty dress in parliament
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astitva article on controversy over Nusrat Jahan and Mimi Chakraborty dress in parliament

Dainik Bhaskar

May 30, 2019, 11:33 PM IST

दो लड़कियां हैं। एक 29 साल की और दूसरी 30 साल की- मिमी चक्रवर्ती और नुसरत जहां। दोनों इस लोकसभा चुनाव में तृणमूल से चुनाव जीतकर संसद में पहुंची हैं। दोनों पहले दिन संसद गईं, आम लड़कियों की तरह जींस-शर्ट में संसद के सामने अपनी तस्वीर खींची और ट्विटर पर डाल दी।


यूं तो न जींस कोई बड़ी बात है और न फोटो डालना, लेकिन यह फोटो ऐतिहासिक थी, क्योंकि यह बदलते भारत की बदलती राजनीति की तस्वीर थी। जींस-शर्ट में संसद पहुंचीं लड़कियां देश की आधी आबादी और उसके पहनावे का प्रतीक थीं, वो आज़ादी, आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास का प्रतीक थीं। लेकिन हमारे मुल्क को तो अब भी यही मुगालता है कि देश मर्द चलाते हैं। औरतें पारंपरिक परिधान में सिर झुकाए ही अच्छी लगती हैं। तो जैसा कि होना ही था, लोगों को यह बात नागवार गुज़री और उन्होंने ट्रोलिंग शुरू कर दी। लोग बोले, ‘ये देखिए, संसद का फैशन शो।’ कोई और वक्त होता तो शायद लड़कियां डर जातीं। सोचतीं कि घर पर भले जींस पहनें, पब्लिक में तो साड़ी वाली पारंपरिक छवि ही बनाकर रखनी होगी। लेकिन ये क्या, इन युवा सांसदों ने ट्रोल की सार्वजनिक रूप से जमकर धुनाई कर डाली। 


वो बोलीं, ‘हमारी जींस से लोगों को दिक्कत है, उन दागी सांसदों से नहीं, जिन्होंने संतों जैसे कपड़े पहन रखे हैं, लेकिन जिन पर आपराधिक मामले चल रहे हैं और जो सिर से लेकर पांव तक भ्रष्टाचार में डूबे हैं।’ उनकी राय बिल्कुल दो-टूक थी। ‘हम युवाओं का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। हम वही कपड़े पहनते हैं, जो ज्यादातर युवा पहन रहे हैं। तो इसमें दिक्कत क्या है।’ यही तो दिक्कत की बात है कि उन्हे दिक्कत क्या है। उन्हें ओडिशा की विधानसभा में पोर्न देखते पकड़े गए विधायकों से दिक्कत नहीं, जेल जाकर आए अपराधियों से दिक्कत नहीं, घोटालों के सरताज सांसदों से दिक्कत नहीं, उन्हें दो युवा लड़कियों की जींस से दिक्कत है।


दिक्कत तो होगी ही। वो लड़कियां हैं और ये देश, जिसकी मर्दवादी आबो-हवा अभी बस बदलनी शुरू ही हुई है। दिक्कत तो होगी, जब लड़कियां उनके बनाए नियमों को तोड़ती, आज़ाद उड़ती, आत्मविश्वास से चमकती, सिर उठाकर चलती और अपने दिमाग से फैसले लेती दिखेंगी। लेकिन अब उनकी दिक्कत और बढ़ गई है, क्योंकि उनकी दिक्कत से लड़कियों को कोई दिक्कत ही नहीं हो रही। वे जींस पहनने के लिए लड़कियों को ट्रोल करते हैं तो लड़कियां डरने की बजाय पलटकर मुंहतोड़ जवाब देने लगती हैं। 


औरतों के कपड़ों और चरित्र पर उंगली उठाने का मर्दाना मनोविज्ञान अब तक कैसे काम करता था? ऐसे ही न कि लड़की पर उंगली उठाओ तो वह डर जाएगी। खुद को बचाने की कोशिश करेगी। ये लड़कियां तो ऐसा कुछ नहीं कर रहीं। वे तो कह रही हैं, मेरी जींस क्या देख रहे हो, अंदर बैठे अपराधियों के सफेद कुर्ते देखो, उन पर कितने दाग हैं। वो कल फिर जींस ही पहनकर आएंगी। वैसे ही काला चश्मा लगाकर, भरोसे और उम्मीद से ज़मीन पर पैर जमाती हुई। ये बदलते हिंदुस्तान की लड़कियां बाकी लड़कियों का प्रतीक हैं। ये हम लड़कियों की बेहतर जिंदगी की उम्मीद हैं।

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