मैनेजमेंट फंडा / बड़ी सोच का मतलब समस्या को पहचानकर समाधान खोजना



Big thinking means identifying the problem and finding solutions
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Big thinking means identifying the problem and finding solutions

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एन. रघुरामन

एन. रघुरामन

Jan 06, 2019, 11:54 PM IST

भ्रमित युवाओं से किसका सामना नहीं होता? वे चारों तरफ हैं, हमारे शहर में, गलियों में, हमारे पड़ोस में और यहां तक कि हमारे घर में भी। ज्यादातर युवा कला, इतिहास, खेल जैसा कुछ नया करना चाहते हैं लेकिन, पालक हमेशा चाहते हैं कि वे परम्परागत कोर्स करें। किंतु, यदि किसी को वाकई संगीत में रुचि हो तो वह उस क्षेत्र में किसी व्यावहारिक व टिकाऊ कॅरिअर के बारे में सोच भी नहीं सकता।

 

लेकिन, उनका असमंजस दूर करने के लिए हमने क्या किया है? व्यवहारिक रूप से कुछ भी नहीं या बहुत कम। गौरतलब है कि एक पत्र इन दिनों वॉट्सएप पर चल रहा है, जिसमें एक युवती आत्महत्या करने के पहले अपने पालकों से पत्र लिखकर कहती है, ‘आपने मेरे बचपन और बच्चा होने का फायदा उठाया और मुझे विज्ञान पढ़ने को मजबूर किया।

 

मैं भी विज्ञान पढ़ती रहीं ताकि आपको खुश रख सकूं। मैं आपको बता दूं कि मुझे आज भी अंग्रेजी साहित्य और इतिहास बहुत अच्छा लगता है, क्योंकि ये मुझे मेरे अंधकार के वक्त में मुझे बाहर निकालते हैं। इस तरह की चालाकी और मजबूर करने वाली हरकत छोटी बहन के साथ मत करना। वो जो बनना चाहती है और जो पढ़ना चाहती है उसे वो करने देना, क्योंकि वो उस काम में सबसे अच्छा प्रदर्शन कर सकती है, जिससे वो प्यार करती है।’


चूंकि हमउम्र व अनुभव में बड़े लोगों ने इस समस्या को सुलझाने के लिए ज्यादा कुछ नहीं किया तो बेंगलुरू स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल की नौंवीं कक्षा के छात्र रोहन नायर ने बड़ा सोचा। उसने छात्रों को विश्वस्तरीय उपलब्धियां हासिल करने वाले लोगों और विशेषज्ञों के काउंसिलिंग सत्र मुहैया कराने की पहल की।

 

रोहन ने स्काइप आधारित प्लेटफॉर्म ‘स्कूनीवर्सिटी’ निर्मित किया। यह डोमेन एक्सपर्ट का नए युग का वर्ल्ड क्लास औजार है। इसे गत वर्ष अगस्त में उन छात्रों के लिए आईआईटी मद्रास में लॉन्च किया गया, जो इस बारे में असमंजस में होते हैं कि विभिन्न विकल्पों में से किसमें अपना ड्रीम कॅरिअर चुनें पर जानते नहीं हैं कि क्या करें। ‘स्कूनीवर्सिटी’ के माध्यम से रोहन इन युवाओं को वर्ल्ड क्लास अचीवर्स से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं ताकि वे इनके साथ बातचीत करके इन्हें गाइड कर सकें। वह विविध क्षमताओं वाले ऐसे युवाओं की मदद करना चाहते हैं।

 

 जब रोशन ने यह प्लेटफॉर्म लॉन्च किया तो 50 स्टूडेंट्स ने स्काइप के जरिए काउंसलिंग सत्र में भाग लिया। वह इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के पूर्व डायरेक्टर जीपी पद्‌मनाभन, लंदन बिजनेस स्कूल के प्रोग्राम डायरेक्टर ब्रायन विलमैन, गो डैडी के वाइस प्रेसीडेंट व एमडी निखिल अरोरा और पूर्व रक्षा सचिव मोहन कुमार जैसे मेंटर्स हासिल करने में कामयाब हुआ है। आप सोच रहे होंगे कि इन विशेषज्ञों की सेवाएं उसने कैसे लीं?

 

उसने अथक परिश्रम कर दुनियाभर के अचीवर्स को 6,000 से ज्यादा आमंत्रण भेजे। अब उसे सात देशों व 14 विविध क्षेत्रों के 90 वर्ल्ड क्लास अचीवर्स से मदद मिल रही है। ये दिग्गज इस प्लेटफॉर्म पर आने वाले स्टूडेंट्स की मदद करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इन विशेषज्ञों में एक्टर, एंकर, पायलट, लॉयर, इंजीनियर्स, आंत्रप्रेन्योर, फिजिशियन, इन्वेस्टमेंट बैंकर और ब्यूरोक्रेट शामिल हैं।


तेरह वर्ष की उम्र में रोहन नारायण मूर्ति और रतन टाटा से मिला और उनके सामने अपनी कंपनी में इंटर्नशिप की पेशकश रखी। वह इन विषयों पर TED पर भी व्याख्यान देता है। रोहन विभिन्न स्कूलों में जाकर भी सेशन लेता है। वह स्कूल का चयन करता है बदले में स्कूल ऐसे छात्रों का चयन करता है, जिन्हें वाकई सलाह की आवश्यकता होती है। फिर वह स्काइप पर संबंधित विशेषज्ञों से संपर्क करता है। छात्रों के लिए यह सारी प्रक्रिया और काउंसलिंग भी नि:शुल्क है। अब वह ऐसा एप बनाने पर विचार कर रहा है, जहां कोई भी इसका फायदा ले सकता है।

 

वह सारे सेशन का शेड्यूल बनाता है, उन्हें मॉनिटर करता है और उन्हें रिशेड्यूल भी करता है। मैं फिर दोहराता हूं, यह सब वह 13 साल की उम्र में कर रहा है। उसे उम्मीद है कि वह इस प्लेटफॉर्म को वैश्विक विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध करा सके ताकि स्टूडेंट्स कॅरिअर को लेकर अपना भ्रम दूर कर स्पष्टता प्राप्त कर सकें।


फंडा यह है कि बड़ा सोचने में उम्र की कोई बाधा नहीं है। बड़ा सोचने का मतलब है वैश्विक समस्या की पहचान करना और फिर उसका समाधान खोजना।

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