कॉलम / विज्ञान के क्षेत्र में महिला सशक्तिकरण है जरूरी



dainik bhaskar column by Dr. Swati Piramal
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dainik bhaskar column by Dr. Swati Piramal

  • दुर्भाग्य-  घर की जिम्मेदारी के साथ नौकरी की दिक्कतों को महिलाओं की काम के प्रति प्रतिबद्धता में कमी मान लेते हैं

Dainik Bhaskar

Sep 14, 2019, 07:51 AM IST

मैरी क्यूरी दुनिया की मशहूर महिला वैज्ञानिक थीं। आधुनिक वक्त में देश और दुनिया दोनों ही जगह विज्ञान की दुनिया में महत्वपूर्ण पदों पर कम ही महिलाएं हैं। अक्सर कई जटिल और अमूर्त अड़चनेें महिलाओं को पुरुषों की तरह अपने करिअर में आगे बढ़ने नहीं देतीं। हालांकि वर्कफोर्स में पिछले एक दशक में महिलााओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। लेकिन वर्कप्लेस अब भी कर्मचारियों से जुड़ी अपेक्षाओं में सुधार नहीं कर पाया है। आज भी ऐसी वर्क पॉलिसी की कमी है, जो महिलाओं को काम और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच संतुलन की इजाजत दे।


 पिछली सदी में साइंस में महिलाओं की भागीदारी का पैटर्न बदल चुका है। टेलीकॉम रिवल्यूशन और इंटरनेट ने दूर से ही काम करने को संभव किया है जिससे काम करने के ढंग हमेशा के लिए बदल चुके हैं। जरूरत है कि संगठन महिलाओं को नौकरी, ट्रेनिंग, प्रमोशन देने और अपने यहां बरकरार रखने के तरीके को बदलें, ताकि इन अड़चनों से पार पाया जा सके। ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट किस तरह से काम करता है ये अहम है, क्योंकि इनके कुछ तरीकों के नतीजे पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं के लिए कम हितकारी हो सकते हंै। दैहिक शोषण से जुड़ी नीति को लागू करवाना बेहद अहम है। किसी भी संस्थान में योग्यता निर्धारित करने से नियुक्तियां, पदोन्नति और अनुसंधान मूल्यांकन मजबूत होता है। साइंटिफिक रिसर्च के मामले में योग्यता पब्लिकेशन और पेटेंट के नंबर, प्रकार और क्वालिटी के साथ-साथ साथियों की समीक्षा पर भी बहुत कुछ निर्भर करती है। विज्ञान में बाकी क्षेत्रों से ज्यादा सामाजिक निर्माण अहम होता है। प्रदर्शन आंकना मुश्किल है और ज्यादा व्यक्तिपरक भी। उदाहरण के लिए सेल्स के क्षेत्र में प्रदर्शन वस्तुओं और सेवाओं की बिक्री से नापा जा सकता है, जबकि विज्ञान के लिए ऐसा कोई पैमाना नहीं है। महिला वैज्ञानिक कम कमाती हैं, अपने विभाग में उनकी प्रतिष्ठा पुरुष वैज्ञानिकों से कम होती है। विज्ञान में स्नातक महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले कम अच्छी नौकरियां मिलती हैं, ज्यादातर को पढ़ाने जैसी जिम्मेदारियां ही दी जाती हैं। यही नहीं अनुदान प्राप्त करने में ज्यादा दिक्कतों का सामना करना होता है। वे काफी कम संख्या में अनुदान के लिए आवेदन देती हैं।     


हाई प्रोफाइल माने जाने वाली विदेशी कॉन्फ्रेंस या नौकरियों या प्रोजेक्ट्स के लिए आमतौर पर अनौपचारिक संपर्क और संरक्षकों की जरूरत पड़ती है। रिसर्च की मानें तो महिलाओं के पास ऐसे अनौपचारिक संपर्क कम होते हैं जो उन्हें इस तरह के अवसर मुहैया करवा सकें, जिसके चलते महिलाओं के पास वह अनुभव कम होते हैं, जो प्रमोशन की ओर ले जाते हैं। विकासात्मक अनुभवों और गतिविधियों तक उनकी पहुंच कम होती है, जो विश्वसनीयता के लिए जरूरी है। संरक्षक अपने पेशे में आत्मविश्वास और पेशेवर पहचान बनाने में मदद करते हैं। वे विकास के अवसरों तक पहुंच बनाते हैं और लोगों को क्षमता प्रदर्शित करने और विश्वसनीय बनने का मौका देते हैं। यही नहीं, मुश्किल वक्त में संरक्षक सूचनाओं का जरिया खुला रखते हैं और प्रतिक्रियाएं देते हैं। यह पाया गया है कि लगभग सभी सफल महिलाओं के पास किसी न किसी वक्त संरक्षक रहे हैं।


 िकसी संगठन की संस्कृति उसमें काम करने वालों पर प्रभाव डालती है। संस्कृति मूल्यों से प्रभावित होती है, जो संभवत: महिलाओं पर नकारात्मक असर डालती है। स्टीरियोटाइपिंग और भेदभाव को महिलाओं और पुरुषों द्वारा अलग-अलग तरीके से समझा जाता है और यह काम पर अलग-अलग तरीकों से असर भी डालता है। संस्थान की संस्कृति उसके सदस्यों की असलियत, मूल्यों, प्रतीकों और परंपराओं से तैयार होती है। जो व्यवहार के मानदंडों और अपेक्षाओं के निर्माण में योगदान देती है। यह मूल्य, जो संस्थान के बहुमत को रेखांकित करते हैं, अक्सर सफलता परिभाषित करते हैं, इनमें पैसा, पावर और स्टेटस शामिल होता है। इस व्यवहार में शामिल है काम करने के लंबे घंटे, दफ्तर में मौजूदगी, प्रतिस्पर्धा, काम को सभी से ऊपर रखने की सहमति और काम के लिए जीने को आदर्श बना लेना। इन व्यवहारों और मूल्यों को ज्यादा पुरुषवादी माना जाता है। जब महिलाएं खुद के चुने जाने और आकलन के लिए अपने अनुभव और क्षमताओं की जगह किसी पूरे समूह पर आधारित पाती हैं तो वह भेदभाव का अनुभव करती हैं।

 

संस्थान जब पारिवारिक जिम्मेदारियों को किसी नीति के संदर्भ में बताते हैं तो महिला कर्मचारी इसे अपने नुकसान या इसका इस्तेमाल अपने करिअर की सजा बतौर समझ लेती हैं। बच्चे या बुजुर्ग की देखभाल से जुड़ी अहम जिम्मेदारी के साथ नौकरी की दिक्कत महिलाओं के लिए उनके काम के प्रति प्रतिबद्धता में कमी मान लिया जाता है। एक स्टडी के मुताबिक, सर्वे में भाग लेने वाली सिर्फ 3% महिलाएं अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों को करिअर की सबसे गंभीर अड़चन मानती हैं। जबकि 50% ने महिला-पुरुष के बीच भेदभाव को इसका जिम्मेदार ठहराया है। केवल 7% महिला कर्मचारी पारिवारिक कारणों से किसी नौकरी को छोड़ती हैं जबकि 73% इसलिए, क्योंकि उन्हें उस नौकरी में सीमित अवसर नजर आ रहे थे। स्टडी के मुताबिक बेहतर ट्रेनिंग और अवसरों के जरिए नौकरी छोड़ने वाली महिलाओं की संख्या को कम किया जा सकता है। महिलाएं काम और परिवार में सामंजस्य बैठाने के लिए कई बार पार्ट टाइम नौकरी करने लगती हैं, लेकिन इन्हें दूसरे लोग कम जरूरी समझते हैं और इसके लिए पैसे भी कम दिए जाते हैं। 


विज्ञान को अच्छे वैज्ञानिकों की जरूरत है और यह महिलाओं की पूरी क्षमता को पहचान कर ही पूरा किया जा सकता है। विज्ञान मंे महिलाओं का कम प्रतिनिधित्व विज्ञान के उस लक्ष्य के लिए खतरा है जिसमें वह उत्कृष्ट होना चाहता है। साथ ही अनुचित और अनावश्यक होने से बचना भी चाहता है। यदि भारत 5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनना चाहता है तो हमें अपने सभी संसाधनों को गतिमान करना होगा, खासकर महिलाओं को। विज्ञान और तकनीक में जेंडर से जुड़ा असंतुलन हमारे देश की आर्थिक स्थिति को कमजोर करता है। इसमें सुधार से ज्यादा महिलाओं को विज्ञान के क्षेत्र में आने का मौका देगा और देश की संपूर्ण क्षमता का इस्तेमाल हो पाएगा। (डॉ. स्वाति पीरामल, वाइस चेयरपर्सन, पीरामल ग्रुप)

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