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  • Dainik Bhaskar Khuli Baat Column By Preeti Shinoy

मैं किस्मतवाली हूं कि मुझे बेटी मिली है

एक वर्ष पहले
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  • उम्र के अठारह साल पूरे करने वाली बेटी के नाम एक पत्र
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मेरी प्रिय बेटी, अठारह साल पहले मई की एक खिली हुई सुबह, मैं अस्पताल में भावनाओं से अभिभूत लेटी थी। मुझे अनपेक्षित रूप से दर्द होने लगा था। मेरी गायनैकोलॉजिस्ट अभी अस्पताल नहीं पहुंची थी, क्योंकि सुबह के साढ़े पांच बजे थे। तुम इस दुनिया में आने के लिए बेताब थी। नाइट ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर घबराहट और वक्त की नज़ाकत को समझते हुए इधर-उधर तेजी से गतिविधियों में लगी थी। दर्द की लहरों की बीच मैंने डॉक्टर से जोर से पूछा ‘क्या आप इतने योग्य हैं कि मेरे बच्चे को हैंडल कर सकें?’ उसने जवाब दिया ‘हां मेडम’। जब उन्होंने बताया कि मुझे बेटी हुई है तो मैं खुशी से रो पड़ी। हम जब किसी चीज की शिद्दत से उम्मीद करते हैं और जब वह इच्छा पूरी होती है तो यह जादुई क्षण होता है। लेकिन, उस रात ड्यूटी पर मौजूद नर्स ये नहीं जानती थीं। ‘चिंता न करें, बेटे के लिए आप अगली बार कोशिश कर सकती हैं,’ उन नर्सेस ने कहा। मैंने खुशी के आंसुओं के बीच चिल्लाकर कहा, ‘मेरा पहले ही एक बेटा है। मैं तो एक बेटी चाहती थी।’ मेरी बेटी इस दुनिया में तुम्हारा ऐसा स्वागत हुआ। न जाने कैसे बेटे बेहतर होते हैं। क्या तुम्हें मालूम है कि भारत में आज भी औसतन 2332 महिला भ्रूण गर्भपात के जरिये प्रतिदिन गिरा दिए जाते हैं? एक समूह का अनुमान है कि 1990 के दशक से अब तक एक करोड़ बेटियों को इस दुनिया में आने से रोका गया है। हम ऐसे देश में रहते हैं, जहां बेटियों को कम करके आंका जाता है और उन्हें इस दुनिया में आने के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है। तुम तो परिवार की बिटिया हो। तुम्हारा बड़ा भाई, तुम्हारे पिता और मैं तुम पर जान छिड़कते हैं। बीते दिनों की बात करते हुए मेरे दोस्त मुझे कहते हैं कि उन्हें कोई दिन ऐसा याद नहीं आता जब नन्ही बेटी तुम्हारी गोद में न हो या पीठ पर सवार न हो। तुम उतरने के लिए तैयार ही नहीं होती थीं। तुम्हारे बचपन की मेरी प्रिय याद वह है जिसमें तुम हमारे पड़ोसी के बेटे आदि को एक चाकू लेकर डरा रही हो। आदि ने हमारे परिवार के बारे में कोई नकारात्मक बात कही थी। मैंने मां की जिम्मेदारी निभाते हुए तुमसे कहा कि इस तरह चाकू दिखाना कोई अच्छी बात नहीं है पर मुझे थोड़ा गर्व हुआ। मैंने सोचा ‘यह है मेरी बेटी’। अब तुम्हारे जीवन के अठारह बरस पूरे होने पर मैं तुमसे ये बातें कहना चाहती हूं: किसी को हक नहीं है कि वह तुम्हें बताए कि तुम क्या पहनो। कोई इसे तय नहीं कर सकता। हमेशा खुद को खुशी देने वाले कपड़े पहनो! तुम्हारी देह तुम्हारा मामला है। समाज को इस पर कुछ कहने का हक नहीं है। अपने वजन या ऊंचाई या अथवा त्वचा के रंग के लिए तुम्हें समाज की मान्यता की जरूरत नहीं है। तुम कुछ भी हासिल कर सकती हो! क्या तुम्हें पता है कि महिलाओं को द्वितीय विश्वयुद्ध तक जॉब करने की इजाजत नहीं थी? 1960 के बाद महिलाएं बड़ी संख्या में वर्कफोर्स में शामिल हुईं। जब 1990 में मैं भारतीय वायुसेना में पायलट के रूप में शामिल होना चाहती थी तो महिलाओं को इसकी इजाजत नहीं थी! पहले अपना कॅरिअर बनाओ। जो भी तुम करो, आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनो। यदि तुम्हे प्यार हो जाए तो इंतजार करो। किसी भी रिश्ते की सबसे अच्छी परीक्षा वक्त ही होता है। हमेशा यात्रा करो, ट्रेवल। जाओ और दुनिया देखो, खोज करो। नए लोगों से मिलो।   ढ़ो मेरी बच्ची, पढ़ो। अपने मन-मस्तिष्क के विकास का यही एकमात्र रास्ता है। मैं जानती हूं कि तुम बहुत पढ़ती हो लेकिन, कोशिश करो इसे थोड़ा और बढ़ाओ और सोचो कि क्या हासिल किया जा सकता है। तुम्हें आश्चर्य होगा कि तुम ज़िंदगी में कितना कुछ हासिल कर सकती हो। जिस भी आदमी से मिलो उसके प्रति करुणा, दयालुता दिखाओ। इसे कभी मत बदलो चाहे जितनी सफलता तुम्हें मिल जाए। हर दिन ऐसी चीजें करो जो तुम्हें खुशी दे। कुछ वक्त अकेले बिताओ। कोई चित्र बनाओ। संगीत सुनो। मौन होकर ही बैठ जाओ। प्राकृतिक वातावरण का आनंद लो। लोग मुझे कहते है ‘तुम्हारी बेटी किस्मतवाली है जो उसे तुम्हारी जैसी मां मिली है’। तुम जानती हो मैं क्या कहती हूं? ‘लेकिन, मैं ज्यादा किस्मतवाली हूं जो मुझे वह मिली है’। ऐसी बनो कि कोई तुम्हें किसी क्षेत्र में आगे बढ़ने से रोक न सके।   (प्रीति शिनॉय इंडियन ऑफ द अवॉर्ड से सम्मानित लेखिका हैं ‘लाइफ इज व्हाट यू मेक्स इट’ उनकी आगामी किताब है।)

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