परदे के पीछे / प्रेम को एक रिश्ते तक सीमित न रखें



Do not limit love to a relationship
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Do not limit love to a relationship

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पं. विजयशंकर मेहता

पं. विजयशंकर मेहता

Feb 14, 2019, 01:46 AM IST

पूरी दुनिया में आज का दिन प्रणय दिवस के रूप में मनाया जाता है। प्रणय शब्द में कोई बुराई नहीं है। यह प्रेम का ही पर्याय हैं, परंतु हमने इसके अर्थ को इतना सीमित कर दिया है कि आज यह ‘प्रेम दिवस’ का रूप लेकर एक विशेष रिश्ते के संदर्भ में ही जाना और मनाया जाने लगा है।

 

युवा वर्ग खासकर टीनएजर्स तो उंगलियों पर दिन गिन-गिनकर इसका इंतजार करते देखे जा सकते हैं। युवा पीढ़ी के लिए तो आज प्रेम का मतलब ‘प्यार’ और एक-दूसरे की देह के प्रति आकर्षण से ज्यादा कुछ नहीं रह गया है। उन्हें समझाया जाए कि प्रेम और प्यार में अंतर है। प्यार में दिखावा हो सकता है, स्वार्थ हो सकता है, परंतु प्रेम निष्कामता के साथ भीतर से उपजी अनुभूति है, जिसका परिणाम समर्पण, शांति और प्रसन्नता के रूप में सामने आता है।

 

प्रेम का निहितार्थ, उसकी पवित्रता, प्रदर्शन की मर्यादा और प्रकट करने के भाव को समझ लिया जाए तो प्रेम गृहस्थी की शांति का तत्व तो है ही, इसका भाव परिवार की पहचान और प्रतिष्ठा का प्रतीक भी है। वैलेंटाइन डे वासना का हुड़दंग नहीं है।

 

रोम के संत वैलेंटाइन के नाम से मनाए जाने वाले इस उत्सव का मतलब होता है प्रेम को वासना से दूर रखना। प्रेम को फूहड़ता के प्रदर्शन का माध्यम न बनाया जाए और दूसरा इसे किसी एक रिश्ते तक सीमित रखने की भूल न की जाए।  प्रेम एक-दूसरे के प्रति आदर है और यही आदर हमारे परिवारों में उतर आए तो गृहस्थी में हर दिन वैलेंटाइन डे बन जाएगा..।

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