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जीने की राह / अपने जागरण से भीतर प्रकाश उत्पन्न करें

Dainik Bhaskar

Jan 14, 2019, 11:11 PM IST


Generate light within your awakening
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Generate light within your awakening

  • जीने की राह कॉलम पं. विजयशंकर मेहता जी की आवाज में मोबाइल पर सुनने के लिए टाइप करें JKR और भेजें 9200001164 पर

कुछ प्रकाश ऐसे होते हैं, जिनमें अंधकार भी समाया है। कहने को लगता है उजाला है, रोशनी है, लेकिन फिर भी एक अंधकार छाया होता है। इसे दिन के प्रकाश से जोड़िए। दिन में जब सूरज निकल आता है और आप अपनी दिनचर्या में लग जाते हैं तो उसकी रोशनी में चीजें दिख रही होती हैं, उनका उपयोग आप कर रहे होते हैं, लेकिन फिर भी भीतर भ्रम का अंधकार पसर चुका होता है।

 

तो केवल रात हो जाना या वस्तु का न दिखना ही अंधकार नहीं है, बल्कि भीतर जब भ्रम पैदा हो जाए तो समझ लें सबसे बड़ा अंधकार शुरू हो चुका है। तो एक प्रकाश प्रभुकृपा का, आपकी अपनी समझ का, अपनी आत्मा की जागरूकता का अपने भीतर फैलाना होगा।

 

तब बाहर की चीज प्रकाश में हो या अंधकार में, आपका काम चल जाएगा। लंका कांड के एक दृश्य पर तुलसीदासजी ने लिखा है- ‘भालु बलीमुख पाइ प्रकासा। धाए हरष बिगत श्रम त्रासा।। हनुमान अंगद रन गाजे। हॉक सुनत रजनीचर भाजे।। रामजी की सेना के भालू और वानर प्रभुप्रकाश पाकर भय व श्रम से रहित तथा प्रसन्न हो गए।

 

उधर हनुमान और अंगद गरजे तो उनकी हुंकार सुनते ही सारे राक्षस भाग छूटे। रामजी के फैलाए प्रकाश में ऐसी ही ताकत होती है। यदि आप भी चाहें कि सब करते हुए विश्राम मिल जाए, भविष्य का भय न हो और सदैव प्रसन्न रहें तो उस प्रकाश को जगाइए जो प्रभुकृपा, योग या आपके अपने जागरण से, होश से पैदा होगा। फिर बाहर के प्रकाश या अंधकार की चिंता समाप्त हो जाएगी...।    

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