पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App
  • Hindi News
  • Government's Credibility Remains In Every Category

हर वर्ग में बनी रहे सरकार की विश्वसनीसयता

8 महीने पहलेलेखक: एन के सिंह
  • कॉपी लिंक
कश्मीर में इंटरनेट पर लगातार बैन के चलते विरोध प्रदर्शन करते लोग। -फाइल फोटो
  • कश्मीर में इंटरनेट बंदी पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की भावनाओं को सम्मान दे केंद्र

सुप्रीम कोर्ट की तीन-सदस्यीय पीठ ने एक क्रांतिकारी फैसला उस समय दिया है, जब देश की सत्ता लगातार अपनी शक्तियों का विस्तार करने के लिए हर संवैधानिक मूल्य को किनारे कर गवर्नेंस का एक नया इतिहास लिख रही है, जिसमें भाजपा-ब्रांड राष्ट्रभक्ति के तहत सरकार के हर काम पर मोहर लगाना, जनता के देशप्रेम का एसिड टेस्ट हो गया है। सीएए पर विरोध यानी राष्ट्रद्रोह, जेएनयू के घायल छात्रों के प्रति फिल्म स्टार दीपिका का सहानुभूति दिखाना राष्ट्र का विरोध, मुसलमानों का इसे लेकर डरना और सार्वजनिक प्रदर्शन करना उनके पाकिस्तान जाने का पासपोर्ट। संसद में बहुमत मिलने से यह अहंकार से पैदा हुआ है। स्थिति यह है कि जम्मू-कश्मीर में पांच महीने से ज्यादा समय से इंटरनेट ही नहीं, हर सामान्य सुविधा बाधित है। सरकार से जब देश की सबसे बड़ी अदालत पूछ रही है कि किस आदेश के तहत यह सब किया गया है तो सॉलिसिटर जनरल का जवाब आता है, ‘यह कार्यपालिका का विशेषाधिकार है और बताया नहीं जा सकता’। सुप्रीम कोर्ट का आदेश इसी अहंकार से शासन चलाने को लेकर है।    पहले अहंकारजनित फैसलों की कुछ बानगी देखें और फिर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर नजर डालें। दिल्ली और पास में ही बसे नोएडा को जोड़ने वाला सरिता विहार-ओखला मार्ग नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) पर जारी विरोध के कारण पिछले 27 दिनों से बंद है। लोगों को तीन किलोमीटर का रास्ता तय करने की जगह दस किलोमीटर जाना पड़ता है और भीड़ की वजह से इसमें चार घंटे लग रहे हैं। इस रोड को खोलने के लिए लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं। इस मार्ग के आसपास के इलाकों में मुस्लिम आबादी रहती है, जिनका कारोबार ठप हो गया है और रोजाना दोनों तरफ से लाखों लोगों को रोजी-रोटी के लिए कार्यस्थल पर जाने में परेशानी हो रही है। दिल्ली, गाजियाबाद में भी इंटरनेट सेवाएं दो बार बंद की गईं और उत्तर प्रदेश में अनेक बार। कोई कारण नहीं बताया गया कि संकट किस बात का है।  बीती 10 जनवरी को दिया गया सुप्रीम कोर्ट की तीन-सदस्यीय बेंच का फैसला गणतंत्र भारत के संवैधानिक इतिहास में सरकार की शक्तियों पर अंकुश लगाएगा। पिछले 70 वर्षों में जितने भी फैसले संविधान के अनुच्छेद 19(1) (अ) यानी अभिव्यक्ति का आज़ादी को लेकर आए थे, वे इसी अनुच्छेद में वर्णित अधिकारों में से केवल दो मौलिक अधिकारों प्रेस की आजादी और व्यापार की स्वतंत्रता में सरकार द्वारा अतिक्रमण को लेकर थे। चूंकि, कश्मीर में इंटरनेट बंद करने और कुछ अख़बारों का प्रकाशन रोकने के आदेश को लेकर पहली बार सुप्रीम कोर्ट में मुद्दा आया, लिहाज़ा इसमें समानता और शिक्षा के अधिकार पर भी अदालत ने संज्ञान लिया। जब सरकार ने अदालत को भी यह बताने से इनकार किया कि आदेश क्या था और किस खतरे के आधार पर दिया गया था तो सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार के इंटरनेट बंद करने से बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अलावा कई अन्य मौलिक अधिकार भी बाधित हो रहे हैं जैसे- व्यापार, वाणिज्य और पेशे का अधिकार। साथ ही शिक्षा का अधिकार। क्योंकि इंटरनेट के बिना न तो आज का व्यापारी व्यापार कर पाएगा और न ही इंजीनियरिंग का छात्र इसके बिना शिक्षा ले पाएगा।  सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि ऐसे प्रतिबंध लगाने से पहले सरकार और उसके अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि क्या ऐसी आपात स्थिति बनी है और क्या ये ‘आनुपातिक प्रतिबंध के सिद्धांत’ पर खरे उतरते हैं? सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश के बाद नोएडा और दिल्ली प्रशासन को सोचना पड़ेगा कि क्या विरोध को दबाने के लिए दिल्ली-नोएडा को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग हफ़्तों तक बंद रखना सही है? क्या यह अल्पसंख्यकों को राष्ट्र-भक्ति की नई परिभाषा के अनुरूप बदले भारत का सच समझाने का तरीका है? क्या यह आनुपातिक प्रतिबंध के सिद्धांत का नया पैरामीटर है? जो सामान्य लोग रोजाना चार घंटे जाम झेल रहे हैं, क्या उन्हें भी मिनिमम गवर्नेंस के इस नए विस्तार को समझकर मेरा भारत महान के भाव में फिर वोट करना होगा? एक शोध संस्थान के आंकलन के अनुसार दुनिया में इराक और सूडान के बाद भारत तीसरा देश है, जहां 4196 घंटों के इंटरनेट प्रतिबंध के कारण 1.3 अरब डॉलर (करीब एक लाख करोड़ रुपये ) का नुकसान हुआ है, जो देश के हर सीमांत और लघु किसान परिवार को करीब दस हज़ार रुपये की मदद के बराबर और बहुचर्चित प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना की राशि से डेढ़ गुना ज्यादा है। अगर सरकार की विश्वसनीयता हर वर्ग में रहती है और देश का वातावरण शांत रहता है तो मिनिमम गवर्नमेंट से मैक्सिमम गवर्नेंस को चार चांद लग सकते हैं।

आज का राशिफल

मेष
Rashi - मेष|Aries - Dainik Bhaskar
मेष|Aries

पॉजिटिव- आज घर से संबंधित कार्यों को संपन्न करने में व्यस्तता बनी रहेगी। किसी विशेष व्यक्ति का सानिध्य प्राप्त हुआ। जिससे आपकी विचारधारा में महत्वपूर्ण परिवर्तन होगा। भाइयों के साथ चला आ रहा संपत्ति य...

और पढ़ें