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जीने की राह / दुख आने और दुखी होने के फर्क में छिपी है हमारी खुशी

Dainik Bhaskar

Jan 13, 2019, 11:32 PM IST


happiness of having sadness
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happiness of having sadness

  • जीने की राह कॉलम पं. विजयशंकर मेहता जी की आवाज में मोबाइल पर सुनने के लिए टाइप करें JKR और भेजें 9200001164 पर

खुश होने का मजा तब और बढ़ जाता है जब वह खुशी खोने के बाद फिर पा लें। जीवन में ऐसी कोशिश कभी न करिएगा कि खुशी स्थायी रहे। हम सारी ताकत इसमें लगाते हैं कि दुख कभी न आए, सुख सदैव बना रहे। लेकिन, ऐसा कैसे हो सकता है? सुख सिक्के का एक पहलू है तो दुख दूसरा।

 

जीवन में सुख आया मतलब अदृश्य दुख तैयार खड़ा है, मौका मिला कि प्रवेश किया। दुनिया में केवल मनुष्य के पास ही चुनाव कर सकने की स्वतंत्रता है। किसी पशु, पेड़ या अन्य किसी भी जीव में यह संभावना नहीं है। इसीलिए पशु को सुख-दुख से कोई लेना-देना नहीं।

 

चूंकि हम मनुष्यों के पास चुनाव की संभावना है तो किसी एक को चुनेंगे, लेकिन दूसरे को नकार देने का मतलब यह नहीं कि उसका अस्तित्व समाप्त हो जाए। तो बेशक अपनी खुशी का, अपने सुख का चुनाव करें, लेकिन जीवन में गम, दुख, परेशानी या समस्या आए ही नहीं, ऐसा अति आग्रह बिल्कुल न करें।

 

इनको भी सहजता से आने दें। उनका भी मजा लें। जब वो आकर जाएंगे और उस समय जो खुशी आएगी, जो आनंद प्राप्त होगा, उसका अपना ही स्वाद होगा। परिवर्तन, नवीनता ये सब अपना अलग प्रभाव रखते हैं, इसलिए बदलाव होने दीजिए। ऐसा कोई प्रयास न करें कि कभी दुखी नहीं होंगे या जीवन में दुख नहीं आएगा। बहुत बारीकी में जाएं तो दुख आना और दुखी होना, इसमें भी फर्क है और इसी फर्क में खुशी तथा आनंद छिपा हुआ है..। 

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