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हम सभी के भीतर अमीर होने की लालसा छिपी हुई है। सबकी इच्छा होती है अमीर हो जाएं। होना भी चाहिए। तो इस इच्छा को दबाएं नहीं, बल्कि सही दिशा में मोड़ें। चलिए, पहले यह समझें कि कितने किस्म के अमीर होते हैं। बारीकी से चिंतन करें तो छह तरह के अमीर पाएंगे। एक वो जो पुश्तैनी हैं। मतलब जिनके लिए बाप-दादा छोड़कर गए। दूसरी तरह के वो होते हैं जो पहले अमीर थे, अब नहीं हैं। ऐसे लोग बावले से हो जाते हैं। अपने अभाव के किस्से सुनाते फिरते हैं या उसी अभाव में डूबकर बर्बाद हो जाते हैं। तीसरी किस्म के वो लोग जो नए-नए अमीर बने हैं। उनके शौक माथे चढ़कर बोलते हैं। भोग-विलास इनका आवरण हो जाता है। चौथे वो होते हैं जो भविष्य में अमीर होने की तैयारी में लगे हैं। खूब मेहनत करते हैं, धन कमाने का हर तरीका अपनाते हैं। पांचवें जो अमीर होने का केवल सपना देखते हैं। उसके लिए करेंगे कुछ नहीं। एक नंबर के आलसी-निकम्मे, लेकिन धनवान बनना चाहते हैं। और छठे प्रकार के अमीर वो लोग हैं जो ऐश्वर्य-वैभव या धन-सपंत्ति से नहीं, बल्कि सेहत, संबंध, व्यवहार और चरित्र से अमीर हैं। अब आप ही तय कीजिए कि आपको इन छह में से किस ढंग का अमीर होना है। किसी एक प्रकार से अमीर हो, यह भी जरूरी नहीं। इन छह में से कभी कोई तो कभी कोई स्थिति होगी। पर जो भी हो, छठे किस्म के अमीर होने की कोशिश जरूर कीजिए। इस प्रकार के लोग परमात्मा को भी बहुत पसंद होते हैं..।
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