मन की आवाज / बाहर की परिस्थितियां हमारे भीतर खुशी कैसे पैदा करेंगी?

बी के शिवानी

बी के शिवानी

Feb 01, 2020, 12:17 AM IST

खुशी किस चीज से मिलेगी इसकी सूची में कई बार छोटी सी चीज तो कई बार बड़ी चीजें होती हैं। लेकिन इस खुशी को प्राप्त करने के लिए कई बार हमें बहुत कुछ त्याग भी करना पड़ता है। आप खुश होंगे तो मैं खुश होऊंगी ये समीकरण ठीक है। अगर मान लो कि सामने वाला पहले से ही चिंता और तनाव में है तो वह खुश नहीं हो सकता है। अभी कुछ दिन पहले की बात है हमारे पड़ोसी के पास गाड़ी नहीं थी।

उसकी पत्नी पति के जन्मदिन पर गिफ्ट देने के लिए बहुत मेहनत से एक शर्ट लेकर आयी। जो पति को पसंद नहीं आयी और उसने कहा कि मैं इसे रात में पहनकर सो जाऊंगा। पत्नी को यह बहुत बुरा लगा। उसने सोचा था कि पति खुश होगा तो उसे खुशी मिलेगी। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। कहीं न कहीं हमने यह समीकरण बना लिया है कि जब मेरे आस-पास के लोग खुश होंगे तब मैं खुश होऊंगी। 

मेरे आस-पास के लोग बीमार रहें और मैं खुश रहूं, ऐसा हो सकता है, इसमें स्वार्थ जैसी कोई बात नहीं है। यह बात सही है कि जब मेरे आस-पास के लोग बीमार हैं और उसमें भी वे लोग जो मेरे नजदीकी संबंधी हैं। उनका ध्यान रखने से पहले मुझे स्वयं का ध्यान रखना होगा। औरों को खुश करने के लिए सिर्फ काम पर ध्यान रखना जरूरी नहीं है कि मैं ये करूंगी, मैं वो करूंगी तो वे खुश हो जाएंगे।

इसका मूलमंत्र यही है कि - मैं खुश रहूंगी तभी वे खुश होंगे। कितनी बार हम कहते भी हैं कि- तुम मुझे खुश देख ही नहीं सकते हो। माना दूसरे की मन की स्थिति और उसके व्यवहार पर मेरी मन की स्थिति निर्भर कर रही है। सुबह मैं अच्छे मूड में थी लेकिन आपका मूड ठीक नहीं था और मैं परेशान हो गई। फिर मैं इसका सारा दोष आपको देती हूं।

आपका मूड ठीक नहीं है वो आपके मन की स्थिति है लेकिन मैं अपने ऊपर नियंत्रण नहीं रख पाई। ये मेरी गलती है। ये सब इसलिए हो रहा है कि हमारे जीवन का समीकरण ही व्यवस्थित नहीं हैं। जिसके कारण जीवन में बहुत सारे विवाद और उलझनें आती है। हमने सोचा था कि मैं ये करूंगी तो मैं खुश होऊंगी, बच्चे के अच्छे नंबर आएंगे तो मैं खुश होऊंगी, नौकरी होगी, शादी हो जाएगी तब मैं खुश होऊंगी।

मैंने ये सोचकर पिज्जा बनाया कि उसे खाकर बच्चों को अच्छा लगेगा। बच्चे बहुत खुश हैं, उनको खुश देखकर आप भी खुश हैं। उसी समय बॉस का फोन आता है और वह किसी बात पर नाराज है। आप अचानक दुखी हो जाती हैं। इस परिस्थिति में खुशी गुम होने में समय तो नहीं लगा। माना मेरा जीवन परिस्थितियों पर निर्भर हो चुका है।

लोगों के मूड, स्वभाव-संस्कार पर मेरी मानसिक स्थिति निर्भर हो चुकी है तो मैं कैसे खुश रह सकती हूं। ये सारी परिस्थितियां बाहर की है तो अब प्रश्न उठता है कि बाहर की परिस्थिति हमारे अंदर खुशी कैसे पैदा करेगी? जब मेरे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता ही कम है तब मुझे सभी प्रकार के संक्रमण हो जाते हैं।

अगर मैं अपने शरीर का अच्छे से ध्यान रखती हूं, प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत रखती हूं तो कोई भी वायरस अटैक नहीं कर सकता है। उसी प्रकार जब मैं अपने मन का अच्छे से ध्यान रखूंगी तो बाहर की परिस्थितियों का प्रभाव हमारे मन पर नहीं पड़ेगा।

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