जीने की राह / भीतर के केंद्र को पकड़ पाएं तो रोम रोम में होगी खुशी



If you catch the inner center then Rome will be happy in Rome
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If you catch the inner center then Rome will be happy in Rome

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पं. विजयशंकर मेहता

पं. विजयशंकर मेहता

Jun 09, 2019, 11:48 PM IST

पकड़िए उन भावनाओं को जो आपको हर उम्र में खुश रख सकती हैं। जो भावनाएं युवा अवस्था में होंगी, वैसी बुढ़ापे में नहीं रहेंगी। बुढ़ापे में जिन भावनाओं के साथ जीते हैं, वे युवा अवस्था में न हों। अपनी भावनाएं पकड़ने के लिए भीतर के मुख्य केंद्र तक जाना पड़ेगा।

 

केंद्र का मतलब यहां चक्र से है। हमारे शरीर में मेरूदंड के निचले हिस्से से लेकर मस्तिष्क के ऊपरी हिस्से तक सात चक्र माने गए हैं। ध्यान लगाकर अभ्यास करें तो पता लग जाएगा आपका मूल चक्र कौन-सा है। उदाहरण के लिए यदि वह नाभि चक्र है तो प्रतिदिन आंखें बंद कर पूरी चेतना नाभि पर टिकाइए। एकदम विचारशून्य हो जाएं। यहां जो भावनाएं पकड़ में आएंगी वही आपकी खुशी का कारण होंगी। यह कोई कठिन क्रिया या गहरी फिलोसॉफी नहीं, जीने का सरल तरीका है। बूढ़ा व्यक्ति पुरानी स्थितियों को स्मरण कर जीने लगता है, इसीलिए संभवत: वर्तमान उसे कम पसंद होता है।

 

‘हमारे समय तो ऐसा होता था, वैसा होता था..’ यह कई बूढ़े लोगों का आदर्श वाक्य बन जाता है, जो उनकी खुशी छीन लेता है। युवा कृतिजीवी होकर वर्तमान में जीता है, लेकिन यह उसके लिए तनाव का कारण बन जाता है। आप किसी भी उम्र में हों, मनोवैज्ञानिक रूप से एक-दूसरे की भावनाओं के केंद्र को जानें। यदि एक-दूसरे को जान लिया, अपने केंद्र को पकड़ लिया तो किसी भी स्थिति में आपकी खुशी को कोई रोक नहीं सकेगा, वह रोम-रोम से फूटेगी..।  
 

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