खुली बात / भारत को निभानी चाहिए तनाव घटाने में भूमिका

फाइल फोटो। फाइल फोटो।
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फाइल फोटो।फाइल फोटो।

  • एशिया के ज्यादातर देश नहीं चाहते कि अमेरिका और ईरान के बीच बात आगे बढ़े

दैनिक भास्कर

Jan 17, 2020, 12:03 AM IST

संजीव पांडेय (वरिष्ठ पत्रकार). ईरान और अमेरिका के बीच फिलहाल तनाव जारी है। लेकिन, मध्य-पूर्व और पश्चिम एशिया के ज्यादातर देश इस इलाके में अब तनाव नहीं चाहते हैं। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत जैसे तेल उत्पादक देश इस तनाव को किसी भी कीमत पर खत्म करना चाहते हैं। क्योंकि, ईरान और अमेरिका के बीच तनाव का सीधा नुकसान इन तेल उत्पादक देशों को होगा।

ईरान इस इलाके के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति रूट होरमुज जलडमरूमध्य को नियंत्रित करता है। तनाव बढ़ने की स्थिति में ईरान किसी भी समय होरमुज जलडमरूमध्य की तेल सप्लाई लाइन को काट सकता है। दूसरी तरफ ईरान इस इलाके के महत्वपूर्ण तेल उत्पादन केंद्रों पर मिसाइल और ड्रोन हमले की क्षमता भी विकसित कर चुका है।

बीते साल सऊदी अरब के तेल केंद्रों पर सफल हमला कर ईरान ने अपनी ताकत दिखा दी थी। सऊदी अरब अपने रक्षा बजट पर सलाना लगभग 70 अरब डालर खर्च कर रहा है। उसके बावजूद उसके तेल उत्पादन केंद्र हमले से बच नहीं पाए। दूसरी तरफ होरमुज जलडमरूमध्य से प्रतिदिन 2 करोड़ बैरल तेल गुजरता है। 


इस समय, सऊदी अरब की चिंता अपनी तेल कंपनी अरामको के लाभ को ज्यादा से ज्यादा बढ़ाना है। हाल ही में अरामको अपना पब्लिक इश्यू लेकर आया है। ऐसे में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव सऊदी अरब को भारी नुकसान पहुंचाएगा। दरअसल ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव से चीन, जापान और भारत जैसे देश भी खासे परेशान हैं।

चीन और भारत तो इस समय इस्लामिक मुल्कों से तेल के सबसे बड़े आयातक देशों में शामिल है। हालांकि ईरानी सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी की मौत के बाद यह आशंका व्यक्त की जा रही है कि ईरान समर्थित मिलिशियाओं की ताकत यमन, सीरिया, लेबनान आदि देशों में कमजोर होगी।

इन देशों में सक्रिय शिया मिलिशिया गुट ही ईरान की ताकत है, जिसे कासिम सुलेमानी ने कई सालों की मेहनत के बाद तैयार किया था। ईरान समर्थित मिलिशिया यमन में सऊदी अरब की सेना के खिलाफ लड़ रहे हैं। उन्होंने सऊदी सेना को अच्छी टक्कर दी है। ईरान समर्थित मिलिशिया ही सीरिया में इस्लामिक स्टेट के खिलाफ मैदान में हैं। 


कासिम सुलेमानी द्वारा तैयार किए गए शिया मिलिशिया गुटों ने ही रूसी फौजों के साथ मिलकर सीरिया में बशर अल असद की सरकार बचाई। आशंका जतायी जा रही है कि कासिम सुलेमानी की मौत के बाद अमेरिका सीरिया में अपना प्रभाव बढ़ाएगा। लेकिन, इस आशंका को फिलहाल इसलिए खारिज किया जा सकता है कि सुलेमानी की मौत के बाद ही रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने सीरिया का दौरा किया।

वहां के राष्ट्रपति असद से मुलाकात की। उन्होंने साफ संकेत दिए कि सीरिया समेत इस इलाके के कई देशों में रूस के अपने आर्थिक हित हैं। वो किसी भी कीमत पर सीरिया में अमेरिकी प्रभाव को बढ़ने नहीं देगा। दरअसल रूसी राष्ट्रपति पुतिन के सीरिया दौरे के बाद ईरान व सीरिया के भीतर मौजूद ईरान समर्थित मिलिशिया का मनोबल बढ़ा हुआ है। मध्य-पूर्व के इलाके में तनाव या युद्ध की स्थिति सीधे तौर पर भारत को प्रभावित करती है।

ऐसे में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव को खत्म करने में भारत को सक्रिय भूमिका निभानी होगी। क्योंकि, भारत आज भी अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत तेल दूसरे मुल्कों से आयात करता है। भारत के तेल आयात का बड़ा हिस्सा सऊदी अरब, इराक, कुवैत आदि मुल्कों से आता है। अगर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ा तो अंतराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ेगी। एेसे में भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव लाजिमी है। 


आर्थिक विकास दर में कमी और बढ़ती महंगाई दर के बीच अगर भारत का तेल आयात का बिल बढ़ा तो और नुकसान होगा। बीते वित्त वर्ष में भारत का तेल आयात बिल 111 अरब डालर के करीब था। भारत के बासमती चावल के निर्यातक ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव से काफी निराश है। क्योंकि, भारत के बासमती निर्यात में लगभग तीस प्रतिशत हिस्सा ईरान का है। बीते वित्त वर्ष में भारत ने 33 हजार करोड़ रुपये का बासमती निर्यात किया था।

इसमें 11 हजार करोड़ रुपये का बासमती निर्यात ईरान को था। वैसे भी ईरान अपनी विदेश नीति में भारत को महत्व देता है। कश्मीर जैसे मसलों पर ईरान ने भारत की मदद अंतराष्ट्रीय मंचों पर कई बार की। यही नहीं कश्मीरी शिया आबादी को ईरान ने हमेशा यही कहा कि उनका सुरक्षित भविष्य लोकतांत्रिक भारत के साथ है, पाकिस्तान के साथ कतई नहीं।

अफगानिस्तान में भी भारत के हितों की सुरक्षा में ईरान की अहम भूमिका है। क्योंकि, भारत को अफगानिस्तान में प्रवेश करने का महत्वपूर्ण रूट आज ईरान ही प्रदान कर रहा है। भारत और अफगानिस्तान के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूती ईरान के चाबहार पोर्ट ने ही दी है।

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