धूप का टुकड़ा / कठिन लक्ष्य से डरने की बजाय हर क्षण का करें इस्तेमाल, कोशिश करने वालों की हार नहीं होती



प्रतीकात्मक फोटो। प्रतीकात्मक फोटो।
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प्रतीकात्मक फोटो।प्रतीकात्मक फोटो।

Dainik Bhaskar

Nov 11, 2019, 12:20 AM IST

सीख : कई बार हम कठिन लक्ष्य देखकर उसे पाने की कोशिश करने से पहले ही उसे असंभव मानने लगते हैं। हकीकत यह है कि हर क्षण का इस्तेमाल करके कोशिश करने वालों की कभी हार ही नहीं होती। गुरु-शिष्य की कहानी से इसे समझें-

 

एक बार एक शिष्य ने अपने गुरु से कहा कि ‘गुरुदेव! मैं अपने कठिनतम लक्ष्यों को  कैसे प्राप्त कर सकता हूं?’ गुरूजी ने उसे भरोसा दिया कि वह उसे अाज रात उसके सवाल का जवाब देंगे। शिष्य हर रोज शाम को नदी से गागर भरकर जल लाता था, ताकि रात को उसका इस्तेमाल हो सके। लेकिन, गुरूजी ने उसे उस दिन शाम को पानी लाने से मना कर दिया।

 

रात को शिष्य ने गुरुदेव को अपने सवाल की याद दिलाई। गुरूजी ने शिष्य को एक लालटेन दी और कहा कि जाओ! पहले नदी से इस गागर में पानी भर लाओ। उस दिन अमावस्या थी और घोर अंधेरा होने की वजह से हाथ को हाथ नहीं सुझाई दे रहा था। वह शिष्य कभी इतनी अंधेरी रात में बाहर नहीं गया था। अतः उसने कहा कि गुरूजी! नदी तो यहां से बहुत दूर है और इस लालटेन के प्रकाश में तो केवल दो कदम तक भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं दिखाई देता है, भला मैं इतना लंबा सफ़र अंधेरे में कैसे तय करूंगा?

 

आप सुबह तक प्रतीक्षा कीजिए, मैं गागर सुबह भर लाऊंगा। गुरूजी ने कहा कि हमें जल की आवश्यकता तो अभी है और तुम सुबह लाने की बात कर रहे हो। जाओ और गागर भरकर लाओ। शिष्य बोला कि गुरूजी अंधेरे में जाना संभव नहीं है। गुरूजी ने कहा कि ‘अरे मूर्ख अंधेरे को क्यों देखता है? रोशनी को देख और आगे बढ़। रोशनी तेरे हाथों में है और तू अंधेरे से डर रहा है’। गुरूजी के ऐसे वचन सुनकर शिष्य आगे बढ़ा तो प्रकाश भी आगे बढ़ गया। बस फिर क्या था।

 

शिष्य लालटेन लेकर आगे बढ़ता रहा और नदी तक पहुँच गया और गागर भरकर लौट आया। शिष्य ने कहा कि गुरूजी मंै गागर भरकर ले आया हूं, आप अब मेरे सवाल का जवाब दीजिए। तब गुरूजी ने कहा कि मैंने तो तेरे सवाल का जवाब दे दिया है, लेकिन शायद तेरी समझ में नहीं आया है। गुरूजी ने उसे समझाया कि ‘यह दुनिया एक अँधेरी नगरी है, जिसमें हर एक क्षण एक लालटेन की रोशनी की तरह मिला हुआ है। अगर हम उस हर एक क्षण का इस्तेमाल करते हुए आगे बढ़ेंगे तो आनंदपूर्वक अपनी मंजिल तक पहुंच जाएंगे। किन्तु यदि भविष्य के अंधकार को देखकर कोशिश करने से पहले ही घबरा जाएंगे तो कभी भी अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच पाएंगे ।’ (धर्मग्रंथ से)
 

 

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