जीने की राह / चातुर्मास में रखें खान-पान पर नियंत्रण



jeene ki raah article on chatumasjeene ki raah article on chaturmas
X
jeene ki raah article on chatumasjeene ki raah article on chaturmas

Dainik Bhaskar

Jul 11, 2019, 11:44 PM IST

तिथियों से, महीनों से इन्सान की जिं़दगी का जो गहरा संबंध है, उसको समझने के लिए अब आने वाले चार महीने बड़े काम के हैं। इन्हें चातुर्मास कहा जाता है। आज से चार महीने परमपिता सो जाएंगे। यानी प्रकृति अपने नए रूप में होगी। हिंदुओं ने इस तिथि को देवशयनी एकादशी कहा है।

 

8 नवंबर को देवउठनी ग्यारस के दिन प्रकृति फिर नई अंगड़ाई लेगी। इसकी धार्मिक कथा यदि अलग हटा दी जाए तो चातुर्मास में एक बड़ा संदेश है संतुलित जीवनशैली का। इन चार महीनों में पांच महीने गुजरते हैं- आषाढ़, सावन, भादौ, अश्विन तथा कार्तिक और इन पांच माह में तीन ऋतुएं बीत जाती हैं- ग्रीष्म, वर्षा और शरद। इस अवधि में प्रकृति मनुष्य के शरीर को अपने ढंग से प्रभावित करती है।

 

हमें चाहिए- और कोई बड़ा संकल्प धर्म-कर्म का न लें, दान-पुण्य न करें तो कम से कम एक काम कीजिए कि ये चार महीने अन्न पर नियंत्रण रखिए। भोजन कम खाइए। हमारे यहां पूरे भोजन को रोटी भी कहा जाता है। रोटी शब्द आते ही गेहूं याद आता है। भारत में पहले गेहूं की बात नहीं होती थी। वेद में गेहूं नाम है ही नहीं। संस्कृत भाषा में तवा और रोटी शब्द भी नहीं हैं।

 

रोटी आई बाद में और उसने पूरे भोजन पर राज कर लिया। आज भी इसके कई नाम हैं- बाटी भवरी, मकुनी..। भावप्रकाश नाम के वैद्यों के ग्रंथ में रोटियों के गुण-दोष बताए हैं। बस, ये चार माह अवसर है कि अपनी रोटी पर नज़र रखिए। खान-पान का संयम बाकी आठ महीनों के लिए आपकी सेहत को ताजा कर देगा..।

COMMENT

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना