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जीने की राह / जीवन में सुख-दुख दोनों के लिए तैयार रहें



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पं. विजयशंकर मेहता

पं. विजयशंकर मेहता

Jun 26, 2019, 11:30 PM IST

इंसान की ज़िंदगी मीठे और नमकीन का मिश्रण है। जीवन में मिठास का मतलब है सुख ही सुख और जब सुख-दुख दोनों मिले जाएं तो नमकीन मान लीजिए। नमकीन की भी एक श्रेणी है- मिर्च। अगर मिर्ची अधिक हो जाए तो फिर दुख का अंबार समझिए। अधिकतर लोग चाहते हैं जीवन में सदैव सुख ही बना रहे। यानी हर तरह से जीवन मीठा ही हो।

 

लेकिन, यह भी सच है भोजन बिना मीठे के भी चल सकता है। इसलिए हमेशा सुख की उम्मीद न रखें। फिर जरूरत पड़ती है नमकीन की। बिना नमक के तो भोजन हो ही नहीं सकता। यानी जीवन में सुख और दुख दोनों की जरूरत है। हमारे शास्त्रों में, वेद, उपनिषद में लवण का उल्लेख मिलता है। मतलब उस काल में भी नमक का महत्व था। नमक यानी जीवन में सुख और दुख दोनों का संतुलन।

 

पूरी दुनिया में अलग-अलग लोगों ने नमक को अलग-अलग बताया है। यूरोप के एक मशहूर कवि ने कहा है- यह स्वर्गीय पदार्थ है। प्लेटो इसे देवताओं का प्रिय पदार्थ बताते थे तो अरब निवासियों ने इसे खुदा की कसम कहकर याद किया है। वराह पुराण के अनुसार हमारे देश में तो नमक की गाय बनाकर दान किया गया है।

 

कुल मिलाकर नमक एक ऐसा पदार्थ है जो केवल खाने के लिए ही नहीं, औद्योगिक जगत में भी आवश्यक है। इसलिए जीवन में नमकीन होने का मतलब है सुख और दुख दोनों की तैयारी एक साथ हो। मीठे का आग्रह हो, लेकिन नमकीन होने की तैयारी भी रखें..।

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