जीने की राह / योग से दूर होगी मानसिक दिव्यांगता

पं. विजयशंकर मेहता

पं. विजयशंकर मेहता

Dec 03, 2019, 01:03 AM IST

दिव्यांगता दो तरह की होती है। शारीरिक तो जग जाहिर है, लेकिन एक मानसिक दिव्यांगता भी होती है। इसी का परिणाम डिप्रेशन है। शारीरिक दिव्यांगता की सेवा के लिए कई संस्थाएं हैं, सरकार की भी योजनाएं हैं पर ऊपर जो जगत सरकार है, उसने मानसिक दिव्यांगता के लिए स्थायी योजना चला रखी है, जिसका नाम है मेडिटेशन। शारीरिक रूप से सक्षम व्यक्ति भी मानसिक दिव्यांग हो जाता है।

इसका उदाहरण है कुंभकर्ण। युद्ध में उसने ऐसा पराक्रम दिखाया कि वानर सेना को शारीरिक दिव्यांग बना दिया। त्राहि-त्राहि मच गई और वानर श्रीराम की शरण में गए। राम जानते थे मानसिक दिव्यांगता दुर्गुणों के कारण आती है। कुंभकर्ण दुर्गुणों का प्रतीक है। हमें मानसिक रूप से कमजोर हमारे अपने दुर्गुण ही बनाते हैं।

इनसे कैसे बचा जाए? ध्यान दीजिए वानरों के उस संवाद पर जो उन्होंने राम के लिए कहा- ‘कृपा बारिधर राम खरारी। पाहि पाहि प्रनतारति हारी।। हे कृपारूपी जल को धारण करने वाले मेघरूप श्रीराम, हे खर के शत्रु, शरणागत के दुख हरने वाले, हमारी रक्षा कीजिए..। ‘बारिधर’ शब्द बहुत प्यारा है।

ऐसा आसमान जो कृपा की, दया की वर्षा करता है। रामजी यही करते हैं। सही उपचार मिल जाए तो शारीरिक दिव्यांगता पर काबू पाया जा सकता है, लेकिन मानसिक दिव्यांगता से पार पाने में तो प्रभुकृपा और योग ही काम आएगा। आज दुनिया दिव्यांगता दिवस मना रही है तो हम खुद को मानसिक दिव्यांगता से बचाए रखें..। 

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