जीने की राह / नींद गहरी न हो तो व्यक्तित्व उथला होता है



jeene ki raah by pandit vijay shnakar mehata
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jeene ki raah by pandit vijay shnakar mehata

पं. विजयशंकर मेहता

पं. विजयशंकर मेहता

Jun 06, 2019, 11:21 PM IST

एक से एक मंत्र दिए हैं हमारे शास्त्रों ने। कहीं लिखा है, ‘रात को उत्तम नींद लें’। ऋषि-मुनि चाहते तो कह देते- रात को नींद लें, लेकिन साथ में ‘उत्तम’ शब्द जोड़ा गया है। नींद उत्तम यानी बहुत गहरी होनी चाहिए। नींद का असर आपके स्वास्थ्य के साथ व्यक्तित्व पर पड़ता है। जिन्हें गहरी नींद नहीं आती, उनका व्यक्तित्व उथला हो जाता है। अब उत्तम का मतलब समझें। शास्त्रों में बहुत अच्छी बात लिखी है, ‘माता-पिता, कुत्ता, विश्व का राजा सब सो जाएं तो उसे उत्तम नींद माना जाए।’ यानी रात का समय हुआ तो कुत्ते भी सो जाएं।

 

कुत्ता कब सोएगा? जब आसपास चोरी की शंका न हो, राजा कब सोएगा? जब प्रजा शांत, सुखी, निश्चिंत हो। माता-पिता कब सोएंगे? जब बच्चे अच्छे, स्वस्थ होंगे। कुल मिलाकर आसपास का सारा वातावरण इतना अच्छा हो कि नींद गहरी आ जाए। इसमें से बहुत कुछ आपके हाथ में हैं। रात को नींद आने से पहले कुछ क्रियाएं जरूर कीजिए। थके-भागे घर आए, धड़ाम से बिस्तर पर गिरकर सो गए, ऐसा न करें।

 

सोने से पहले अपने आंतरिक शरीर को बाहरी शरीर से थोड़ा अलग करिए, वरना बाहर की थकान आपके भीतर के चैन व नींद को गड़बड़ा देगी। क्या करना है इसकी जानकारी पुस्तकों में, योगियों से मिल जाएगी। नहीं तो नीचे लिखी वेबसाइट के जरिये हमसे जुड़कर प्राप्त कर सकते हैं। नींद व्यक्तित्व के लिए बहुत जरूरी है। इसे चेतावनी समझें, अच्छे से सोएं और बढ़िया उठें..।

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