जीने की राह / अपने ‘मैं’ को तलाशें, खुद को पा लेंगे



jeene ki raah by pandit vijay shnakar mehata
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jeene ki raah by pandit vijay shnakar mehata

Dainik Bhaskar

Jun 12, 2019, 10:50 PM IST

कभी आपने अपने ‘मैं’ को तलाशा है? यह पढ़-सुनकर आश्चर्य होगा कि क्या कोई अपने ‘मैं’ को तलाश सकता है? लेकिन, चाहें तो ऐसा हो सकता है। जब हम ‘मैं’ को तलाशने निकलेंगे तो ज़िंदगी की बहुत-सी अनुपयोगी बातें, परिस्थितियां हटती चली जाएंगी। ध्यान रखिएगा, बेकाम की चीजें यदि एकत्र कर लीं तो वह होता है कबाड़। हम भीतर से बहुत बड़ा कबाड़ बन चुके हैं।

 

कितनी ही पुरानी, टूटी हुई, बेकार और घातक चीजें हमने भीतर विचारों में, क्रियाओं में इकट्ठी कर रखी हैं, लेकिन जैसे ही ‘मैं’ ढूंढ़ने निकलेंगे, धीरे-धीरे ये सब हटती चली जाएंगीं, क्योंकि आपका जो नाम है, वह केवल उपयोगिता के लिए है। जब आप ‘मैं’ खोजेंगे तो सबसे पहले नाम ही आएगा।

 

इसे हटाइए, क्योंकि यह तो संसार ने दिया है। उसके बाद पाएंगे, एक शरीर है जो माता-पिता से मिला है और केवल एक माध्यम है। फिर पद-प्रतिष्ठा है आपकी पहचान है। योग्यता और शिक्षा अस्थायी कर्म है, धीरे-धीरे इनको भी हटाइए। यहां आपको लगेगा फिर मैंं क्या हूं? और तलाशेंगे तो बहुत गहराई में पाएंगे ‘मैं’ जैसा कुछ है ही नहीं।

 

सवाल कायम है कि जब ‘मैं’ जैसा कुछ नहीं तो मैं हूं क्या? हमने शरीर, नाम, योग्यता, पद-प्रतिष्ठा अादि को ‘मैं’ मान लिया और जैसे ही ‘मैं’ हटा, पता लगेगा आपके भीतर जो है, वह है असली आप यानी आत्मा। बहुत लोग आत्मा की तलाश में हैं। मिलेगी कब, यह छोड़िए, तरीका अपनाकर देखिए। कभी-कभी तरीका ही मंजिल बन जाता है..।    

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