जीने की राह / कुमार्ग पर ले जाती है आत्मविश्वास की कमी



jeene ki raah by pandit vijay shnakar mehata
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jeene ki raah by pandit vijay shnakar mehata

Dainik Bhaskar

Jul 03, 2019, 11:48 PM IST

मनुष्य कुमार्ग पर कब चलता है? हर एक के जीवन में कभी-कभी ऐसी घटना घट जाती है कि वह गलत रास्ते पर चल पड़ता है। किसी का कुमार्ग छोटा होता है। कोई समझाने वाला मिल जाता है, किसी नियम-कायदे, अनुशासन का डर सामने आ जाता है तो मनुष्य तुरंत सही रास्ते पर चला जाता है। लेकिन, कुछ लोगों को यह अवसर नहीं मिलता। वे बुरे रास्ते पर लंबे चले जाते हैं। यह न समझें कि जो गलत लोग हैं, अपराधी हैं उन्होंने जान-बुझकर ऐसा किया होगा। कुछ घटनाएं घटी होंगी और उन्हें अवसर नहीं मिल पाया।

 

हां, कुछ लोग ऐसे होते हैं जिन्हें अवसर मिला, पर इरादे गलत थे। आदमी किन कारणों से कुमार्ग पर चल पड़ता है? दो स्थितियों में ऐसा होता है- कॉन्फीडेंस यानी आत्मविश्वास की कमी और कन्फ्यूजन मतलब भ्रम की अधिकता। आत्मविश्वास गिर जाए और भ्रम बढ़ जाए तो कोई गलत रास्ता पकड़ लेता है।

 

अत: किसी को सुधारना हो तो पहले उसका आत्मविश्वास बढ़ाइए। उसे भरोसा दिलाएं कि भविष्य में सब अच्छा होगा और उसका भ्रम दूर करें, जो होगा थोड़ा भय दिखाने से। आदमी भय और लोभ के कारण बुराई छोड़ देता है। तो बुरी राह पर चलने वाले को थोड़ा भय दिखाना पड़ता है, लेकिन कुछ लोभ भी दिखाइए कि सुधर गए तो यह फायदा है और न सुधरने के ये खतरे हैं। आज जब अधिकांश परिवारों में कोई न कोई सदस्य खास तौर पर नशे के मामले में गलत राह पर चल रहा है, यह प्रयोग करना ही पड़ेगा..।  

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