जीने की राह / आबादी को लेकर जागरूकता आवश्यक



jeene ki raah: Need awareness on population
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jeene ki raah: Need awareness on population

पं. विजयशंकर मेहता

पं. विजयशंकर मेहता

Jul 10, 2019, 11:53 PM IST

कर्मयोग की जब भी बात आती है तो सभी धर्मों ने माना है कि बिना कर्म किए कोई रह नहीं सकता। कर्म का अधिकांश संबंध शरीर से बनता है। मतलब शरीर के अंगों से ही मनुष्य काम करता है। देह का एक कर्म है कामऊर्जा के माध्यम से संतान की उत्पत्ति करना।

 

कर्मयोग के साथ लिखा गया है कि विवेकयुक्त बुद्धि से कर्म करिए, अन्यथा कर्म दुष्कर्म में बदल जाएगा। एक दुष्कर्म हम भारतवासी और करते हैं और वह है संतान की संख्या के मामले में। दुनिया जब जनसंख्या दिवस मनाए तो इसका मतलब ही यह है कि  आबादी चींटियों की तरह दुनिया में न फैल जाए। हर संतान इतनी योग्य बनाई जाए कि माता-पिता और स्वयं उस संतान को गर्व हो कि हम इस धरती पर आए हैं।

 

हम चींटियों की तरह दुनिया में फैल गए, पर चींटियां भी एक खास तारीख और तयशुदा वक्त पर ही विवाह करती हैं। सुनकर आश्चर्य होता है, विज्ञान ने भी इस पर शोध किया, यह बात अलग है कि वह इसे खोज नहीं पाया, लेकिन यह सच है। अब हम मनुष्यों को यह सोचना चाहिए कि चींटी जैसे प्राणी के पास भी अपनी योजना है और हमारे पास खासतौर पर संतान उत्पत्ति को लेकर कोई योजना नहीं।

 

जनसंख्या के प्रति जागरूकता एक योजना है, संतान को योग्य बनाने की तैयारी है। इस पर विचार करना चाहिए, वरना मनुष्य और जानवर में फर्क ही क्या रहा? दोनों ही बच्चे पैदा करते हैं, पर जानवर को फिक्र नहीं होती और यदि मनुष्य भी ऐसा ही करने लगे तो ठीक नहीं है..।

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