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अच्छे ड्राइवर अपनी गाड़ी को सुबह-सुबह थोड़ी देर स्टार्ट करके रखते हैं। उसके बाद उसे बढ़ाते हैं, गति देते हैं। उनका मानना है गाड़ी यदि बिना चले थोड़ी देर स्टार्ट रहे तो उसके इंजन में ऑइल का, हर तत्व का प्रॉपर सर्कुलेशन हो जाता है और इससे इंजन मजबूत रहता है। बस, अब इस बात को जोड़िए अपने शरीर से। हमें अपने शरीर के इंजन को सुबह-सुबह ऐसे ही स्टार्ट करना चाहिए बिना गति दिए। जागने के बाद एकदम से पलंग मत छोड़िए। लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं कि बिस्तर पर पड़े रहें। जब भी पलंग से उतरें, इस शरीर के भीतर कुछ ऐसा है, जिसमें ऊर्जा को बहने दीजिए, फिर उसका उपयोग कीजिए। दार्शनिकों ने कहा है इस शरीर को श्वान से सीखना चाहिए। कुत्ते में जो छह खूबियां होती हैं, वो हमारे शरीर में भी होना चाहिए। पहली अधिक खाने की शक्ति रखना, दूसरी अभाव की स्थिति में थोड़े में ही संतोष करना। कुत्ते की तीसरी विशेषता है गहरी नींद में सोना और चौथी गहरी नींद में सोते हुए भी सजग रहना। पांचवीं स्वामीभक्ति और छठी होती है वीरतापूर्वक शत्रुओं का सामना करना। मनुष्य हर दिन अपने भीतर इन खूबियों का समावेश कर सकता है। इसका यह अर्थ नहीं है कि मनुष्य कुत्ते जैसा हो जाए। बस, मनुष्य एक कुत्ते की विशेषताओं को स्वीकार करे, क्योंकि वह भी एक प्राणी है। जैसे ही दूसरे प्राणियों की अच्छी बातें या खूबियां अपने से जोड़ते हैं, आप प्रकृति के सच्चे प्रतिनिधि होते हैं..।
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