जीने की राह / आंखों के जरिये खुद को नियंत्रण में रखें



Keep yourself under control from eyes
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Keep yourself under control from eyes

पं. विजयशंकर मेहता

पं. विजयशंकर मेहता

Jul 03, 2019, 01:14 AM IST

‘आंखें खुल गईं’ इस मुहावरे का अर्थ है कुछ ऐसी गलतफहमी थी जो दूर हो गई, कोई अज्ञान था जो मिट गया। ऐसे ही ‘आखें बंद हो जाना’ यानी मृत्यु हो जाना। सामान्य रूप से कहा जाता है आंखें बंद कर लें तो दिखना बंद हो जाता है, खोलें तो दिखना शुरू हो जाता है। लेकिन, थोड़ा गहराई में जाएं तो इसका उल्टा भी है। लोग आंखें खुली रखकर भी देख नहीं पाते और आंख बंद कर भी देखा जा सकता है।

 

अध्यात्म आंखें बंद करके देख लेने को बड़ा महत्व देता है, क्योंकि जब बाहर से आंखें बंद होती हैं तो भीतर के कुछ दृश्य जो जीवन में बड़े उपयोगी होते हैं, वो देखे जा सकते हैं। क्या देखा जाए, क्या नहीं देखा जाए, यह विवेक यदि जग जाए तो इन्सान बहुत सारी झंझटों से मुक्ति पा सकता है। लेकिन आंखों के मामले में हम लोग बिलकुल परवाने की तरह हो जाते हैं। परवाना शमा में क्यों गिरता है?

 

दरअसल परवाने की आंख पर जब प्रकाश पड़ता है तो उसकी पेशियां एकदम उत्तेजित हो जाती हैं। वह अपने आपको रोक नहीं पाता और उसमें गिर जाता है। यही इन्सान की कहानी है। आंखों से जब कुछ ऐसे दृश्य देखे जाते हैं और खास तौर पर इन दिनों सोशल मीडिया में, तो फिर परवाने की तरह इन्सान भी अपना नियंत्रण खो बैठता है। इसलिए क्या देखें, क्या न देखें के मामले में आंखों पर नियंत्रण रखिए। रोज सुबह उठते समय या रात सोते वक्त आईने के सामने खड़े होकर आंख में आंख डालकर देखिए। क्या सही-क्या गलत, इसका जवाब मिल जाएगा..। 

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