महावीर जयंती विशेष / अहिंसा बदलाव लाने का सबसे कारगर तरीका; 106 साल में 64% हिंसक आंदोलन असफल, जबकि 54% अहिंसक सफल



most effective way to bring about nonviolence
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most effective way to bring about nonviolence

  • दुनियाभर में हुए 323 जन आंदाेलनों के परिणामों की स्टडी का निष्कर्ष

Dainik Bhaskar

Apr 17, 2019, 03:06 PM IST

नई दिल्ली . अहिंसा में हिंसा के मुकाबले बदलाव लाने की ताकत अधिक है। पिछले सौ वर्षोंं में हुए 323 जन आंदोलनों पर की गई स्टडी से यह बात निकलकर सामने आई है। यह स्टडी 1900 से 2006 के बीच हुए हिंसक और अहिंसक जन आंदोलनों पर की गई है। स्टडी हार्वर्ड कैनेडी स्कूल की प्रोफेसर एरिका चेनोवेथ और मारिया जे स्टीफन ने की है। चेनोवेथ कहती हैं कि 20 वीं सदी में सिर्फ 26% हिंसक आंदाेलन सफल और 64% असफल रहे। जबकि इस दौरान 54% अहिंसक अभियान सफल रहे। यानी हिंसक आंदोलनों की तुलना में अहिंसक आंदोलन बदलाव लाने में दो गुना ज्यादा सफल रहे।

 

अहिंसक आंदोलन में हिंसक आंदोलन की तुलना में चार गुना लोग शामिल होते हैं। 1940 के दशक यानी दूसरे विश्वयुद्ध के बाद से अहिंसक आंदोलनों की सफलता की दर लगातार बढ़ी है। सिर्फ 1960 और 1970 के दशक में हिंसक आंदोलनों की सफलता की दर थोड़ी बढ़ी। चेनोवेथ के अनुसार अगर कोई आंदोलन हिंसक हो जाता है तो उसकी असफलता की आशंका भी 50% अधिक हो जाती है। इसकी वजह यह है कि जब प्रदर्शनकारी बंदूकें उठा लेते हैं तो सरकार को भी हिंसक जवाब देने की वजह मिल जाती है। हिंसक आंदोलन, अगर सफल भी हो जाते हैं तो यह लंबे समय के लिए कई समस्याएं छोड़ जाते हैं। डेटा बताता है कि अहिंसक विद्रोह वाले देशों में लोकतांत्रिक संस्थानों के साथ उभरने की संभावना अधिक रहती है। इन देशों में फिर से गृहयुद्ध की स्थिति की आशंका हिंसक आंदोलनों की तुलना में 15 प्रतिशत कम रहती है। हालांकि दूसरी तरफ ग्लोबल पीस इंडेक्स के अनुसार 2008 की दुनिया 2018 की तुलना में 2.38% कम शांत है। इन बीते 10 वर्षों मेंे हर साल हिंसा बढ़ी है।

 

85 देशों में पिछले 10 वर्षों में अशंाति बढ़ी है। जबकि सुधार 75 देशों में हुआ है। यूरोप जो सबसे शांत माना जाता था, पिछले 10 वर्षों में वहां के 61% देशों में अशांति बढ़ी है। दुनिया के 25 सबसे अशांत देशों में इन वर्षों में अशांति का स्तर 12.5% और बढ़ गया है। 25 सबसे शांत देशों में सुधार तो जरूर हुअा, लेकिन सिर्फ 0.9%। अशांति बढ़ने के पीछे सबसे बड़ा कारण आतंकवाद रहा है। 

 

21वीं सदी में अहिंसक आंदोलनों की सफलता दर 70% और हिंसक आंदोलनों की 12% पहुंची

 

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  • ग्लोबल पीस इंडेक्स के अनुसार 2008 की दुनिया 2018 की तुलना में 2.38% ज्यादा अशांत है।
  • यूरोप जो सबसे शांत माना जाता था, पिछले 10 वर्षों में वहां के 61% देशों में अशांति बढ़ी है।
  • दुनिया के 25 सबसे अशांत देशों में इन वर्षों में अशांति का स्तर 12.5% और बढ़ गया है।

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