सुर्खियों से आगे / लोगों की सेहत से हो रहे छल पर शोर मचाने की जरूरत

शिव दुबे

शिव दुबे

Dec 05, 2019, 12:32 AM IST

एक बात पर शर्त लगाई जा सकती है कि इस देश में राजनीतिक शोर से बड़ा कोई और शोर नहीं हो सकता। जबकि, अनेक ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर इससे बड़ा शोर होना चाहिए। जब महाराष्ट्र की राजनीति में छल-कपट पर इतना शोर हो सकता है तो लोगों के जीवन से हो रहे छल-कपट पर इतनी चुप्पी क्यों? हमारी युवा पीढ़ी के साथ देशभर में हो रहा है छल। वह भी एक या दो नहीं, दस या बीस नहीं, देश के हर शहर में।


इस छल को समझने के लिए रायपुर की एक घटना ही पर्याप्त है। रायपुर में एक युवक संदीप ठाकुर की मौत इसलिए हो गई, क्योंकि जिम में उसको मसल पावर बढ़ाने के लिए प्रोटीन पाउडर के साथ जरूरत से ज्यादा स्टेराॅयड दिया जा रहा था। यह बात आई-गई हो गई। यह केवल रायपुर की घटना है, यह सोचकर चुप हो जाना शायद गलत होगा। 


हर शहर में इन दिनों युवा मसल्स बढ़ाने की कोशिशों में लगे हैं। इसलिए, संदीप की मौत ने एक अनचाहा सा भय खड़ा कर दिया। युवक मसल्स बढ़ाने के लिए जिम जाते हैं। वहां उनको पहलवानों की तस्वीरें दिखाकर लालच दिया जाता है कि आपको ऐसा गठीला शरीर बनाने के लिए प्रोटीन पाउडर और स्टेराॅयड लेने के अलावा अन्य उपाय करने होंगे। आकर्षक दिखने की चाह में युवा इनके फेर में आ जाते हैं। न तो उन्हें इस बात का ज्ञान होता है कि कौन सी दवाई कितनी मात्रा में लेनी चाहिए और न ही उन्हें बताने वाले को इसके नुकसान के बारे में जानकारी होती है।


एक व्यक्ति को निश्चित मात्रा में ही प्रोटीन का सेवन करना चाहिए। सर्वमान्य तथ्य है कि आपके शरीर का जितना किलो वजन होता है, उतने ही ग्राम प्रोटीन आपको एक दिन में लेना चाहिए। यानी अगर आपका वजन 60 किलो है तो आपको 60 ग्राम से अधिक प्रोटीन का सेवन दिनभर में नहीं करना चाहिए। एक किलो पर एक ग्राम। अगर यह एक किलो में डेढ़ ग्राम से ज्यादा हुआ तो शरीर को नुकसान होगा। प्रोटीन ज्यादा लेने पर आपका लीवर और किडनी खराब हो सकते हैं। शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा भी बढ़ेगी।


दूसरी ओर, स्टेराॅयड ज्यादा लेने से शरीर का मेटाबोलिक सिस्टम बिगड़ जाता है। ब्रेन पर असर होता है, हडि्डयां कमजोर होती हैं। वैसे भी स्टेराॅयड तो किसी भी हालत में बाॅडी बिल्डिंग में मान्य नहीं है। फिर भी शाॅर्टकट के चक्कर में युवा पीढ़ी इसका सेवन कर रही है या उनको जिम में बाध्य या भ्रमित किया जा रहा है। न तो ट्रेंड ट्रेनर है और न ही ट्रेंड न्यूट्रीशियन। बेरोकटोक कारोबार जारी है। प्रोटीन और स्टेराॅयड का फायदा तत्काल दिखता है और नुकसान दो से तीन साल बाद सामने आता है। इस कारण ऐसी दवाइयों की बाढ़ सी आ गई है। 


देश के कानून में फूड प्रोडक्ट के कारोबार के लिए सख्ती नहीं है और ऐसे प्रोटीन पाउडर को फूड प्रोडक्ट की श्रेणी में रखा गया है। एक्सरसाइज आपकी–हमारी सेहत के लिए जरूरी है और जिम उसके लिए अच्छा विकल्प है। पर उसकी आड़ में युवा पीढ़ी को बरबाद करने का इंतजाम पूरी तरह से गैरजरूरी। हर शहर के हर इलाके मेे जिम खुल रहे हैं। उनमें भीड़ बढ़ रही है पर उनके नियंत्रण व नियमन के लिए देश का कानून फिलहाल खामोश है। इस बारे में अब भी ध्यान नहीं दिया तो जो नुकसान सामने आएगा, उसका आकलन शायद संभव नहीं होगा। 

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