पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App
  • Hindi News
  • Not Strict Law, Strict Compliance Required

सख्त कानून नहीं, सख्ती से अनुपालन जरूरी

6 महीने पहलेलेखक: विराग गुप्ता
  • कॉपी लिंक
फाइल फोटो।
  • दिल्ली के चुनाव में नियमों की खुलेआम उड़ रही धज्जियां, आयोग को देना चाहिए दखल
Advertisement
Advertisement

दिल्ली विधानसभा के चुनाव, शाहीन बाग का धरना और संविधान की प्रस्तावना के देशव्यापी त्रिभुज में राजनीति के चौथे कोण से लोकतंत्र को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है। संविधान में ‘वी द पीपुल’ के नागरिकों की अहमियत पांच साला चुनावी रस्म के बाद ख़त्म हो जाती है। दूसरी ओर, संविधान में राजनीतिक दलों के बारे में कोई प्रावधान नहीं होने के बावजूद लोकतंत्र अब दलों का अस्तबल बन गया है। स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के तीन बड़े पहलू हैं- मतदाताओं की स्वतंत्र मनःस्थिति, उम्मीदवार के खर्चों और संसाधनों पर कानूनी बाध्यता और चुनावों में सरकारी मशीनरी के बेजा इस्तेमाल पर रोक। 21वीं सदी के चुनावों में ‘तू डाल-डाल मैं पात पात’ की तर्ज पर उम्मीदवार और पार्टियों ने नियम, कानून और संहिता को ध्वस्त करने के लिए नए तरीके अख्तियार कर लिए हैं। वोटरों को लुभाने और वोट हासिल करने के लिए चुनावों में उम्मीदवार, पार्टी और सरकारों की मार्फत हो रहे खर्च का शायद ही किसी को अनुमान हो। लोकसभा के पिछले आम चुनावों में लगभग 3400 करोड़ की कुल जब्ती हुई थी।  दिल्ली विधानसभा की 70 सीटों के चुनावों में, उम्मीदवारों पर 70 लाख तक के खर्च की पाबंदी है, लेकिन 39 करोड़ की शराब और नगदी की जब्ती तो चुनावों के शुरुआती दिनों में हो चुकी है। दिल्ली में नेताओं और पार्टियों के चार लाख से ज्यादा पोस्टर हटाए गए हैं, लेकिन नियमों के अनुसार इस पर हुए खर्चे और जुर्माने की वसूली उम्मीदवारों और पार्टियों से नहीं की गई। दिल्ली के चुनावों को भारत बनाम पाकिस्तान बनाने का ट्वीट करने वाले भाजपा नेता पर चुनाव आयोग ने एफआइआर दर्ज करा दी, लेकिन सोशल मीडिया तो ऐसे कंटेंट से लबालब है, जो पार्टियों के आईटी सेल की फैक्ट्री में हज़ारों विशेषज्ञों की निगरानी में बन रहा है। फेक न्यूज़ और आपत्तिजनक कंटेंट को फेसबुक, व्हाट्सएप और ट्विटर के माध्यम से नेताओं द्वारा वोटरों के दिमाग में ठेले जाने के बाद, स्वस्थ मतदान कैसे संभव है? पुलिस, प्रशासन और चुनाव आयोग की जानकारी में चल रहे इन आईटी सेलों के न तो खर्चे का ही कोई हिसाब है और न ही इनकी निगरानी की कोई व्यवस्था। चुनाव पूर्व 48 घंटे के ‘साइलेंस पीरियड’  में कोई भी चुनाव प्रचार गैरकानूनी होता है, जिसे पार्टियों के आइटी सेल द्वारा खुलेआम चुनौती दी जा रही है। चुनावों के पहले यदि कानूनन शराब की बिक्री बंद हो जाती है तो फिर मतदान के पहले इन गैरकानूनी आईटी सेलों की बंदी क्यों नहीं होनी चाहिए?  चुनाव आयोग ने सन 2017 में विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए थे, जिनका बाइक रैली, रोड शो और चुनावी रथों के इस्तेमाल में तनिक भी पालन नहीं हो रहा है। दिल्ली में जहरीली हवा और पानी पर सियासी शोर शराबा है, लेकिन मुख्यमंत्री खुद ही प्रदूषक रोड शो से इसे बढ़ावा दे रहे है। नेताओं के गैरकानूनी रोड शो से आम जनता को हो रही तकलीफ पर चुनाव आयोग की चुप्पी चिंताजनक है। आम जनता पर ऑड-इवन जैसे प्रयोग करने के साथ भारी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध भी लग गए, लेकिन दिल्ली में गैरकानूनी तरीके से बाइक रैलियों और रोड शो को खुलेआम इजाजत मिल रही है। एनजीटी और ईपीसीए के आदेशों के बाद दिल्ली एनसीआर में डीजल जनरेटर सेट के इस्तेमाल पर अनेक पाबंदियां हैं तो फिर चुनावी रथ में इन डीजी सेट के इस्तेमाल को मंजूरी कैसे मिल रही है?  देश में जब भी कोई अव्यवस्था अराजकता या अपराध बढ़ता है तो हम सख्त कानूनों की बात करते हैं। थिंक टैंक सीएएससी के अनेक अध्ययनों से यह जाहिर है कि कानूनों को और सख्त बनाने की बजाय कानूनों के सख्त अनुपालन से चुनाव और न्यायिक व्यवस्था में अनेक सुधार हो सकते हैं। साफ़ सुथरी चुनावी प्रक्रिया होने से आपराधिक और दागी लोगों का राजनीति में वर्चस्व कम होने से लोकतंत्र और भी अधिक मजबूत होगा। उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक डा. विक्रम सिंह ने इस बारे में चुनाव आयोग को विस्तृत प्रतिवेदन दिया है। सोशल मीडिया और हाईटेक प्रचार के नए दौर में नेताओं के हथकंडों से निपटने के लिए संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग के पास असीमित अधिकार हैं, जिन्हें अब शेषन की तर्ज़ पर देशहित में इस्तेमाल करने की जरूरत है। देश की राजधानी से चुनावी व्यवस्था को सुधारने की कोई भी मुहिम, पूरे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को ठीक करने में मददगार होगी।

Advertisement

आज का राशिफल

मेष
मेष|Aries

पॉजिटिव - आज आप कई प्रकार की गतिविधियों में व्यस्त रहेंगे। साथ ही सामाजिक दायरा भी बढ़ेगा। कहीं से मन मुताबिक पेमेंट आ जाने से मन में राहत रहेगी। धार्मिक संस्थाओं में सेवा संबंधी कार्यों में महत्वपूर्ण...

और पढ़ें

Advertisement