संदर्भ / टेक्नोलॉजी ने बचाई चीन की अर्थव्यवस्था

रुचिर शर्मा

रुचिर शर्मा

Jan 29, 2020, 12:48 AM IST

हाल ही मैं शंघाई में था, मैंने खुद को ऐसी तकनीक क्रांति के बीच पाया, जो अपनी व्यापकता में उल्लेखनीय थी। पासपोर्ट स्कैनर आगंतुकों से उनकी भाषा में बात करता है। पेमेंट एप ने नगदी का स्थान ले लिया है। हांगझोऊ शहर में फ्लाईजू नामक होटल कमरे का दरवाजा खोजने के लिए फेशियल रिकगनिशन का इस्तेमाल करता है। रोबोट कॉकटेल मिक्स करता है और रूम सर्विस भी उपलब्ध कराता है।

शेन्जेन में हमने उन्हीं ड्रोनों को उड़ाया, जो ग्रामीण क्षेत्रों में ई-कॉमर्स के लिए डिलीवरी करते हैं। ट्रैफिक लाइटों और पुलिस के कैमरों से नियंत्रित यातायात आराम से संचालित होता है। चीन के बाहर आलोचक इन तकनीकों को स्वचालित तानाशाही के औजार के रूप में देखते हैं। लेकिन, चीन के भीतर सर्वे दिखाते हैं कि लोगों का तकनीक में भरोसा बहुत ऊंचा है और निजता की चिंता न्यूनतम है। अगर लोग सरकारी निगरानी से डरते हैं तो वे चुप रहते हैं। 


दुनिया के लिए खुलने के बाद चीन का उत्कर्ष शुरू हुआ, लेकिन अब वह बाहरी प्रतिस्पर्धा को रोककर तकनीकी दिग्गजों को बढ़ा रहा है। विदेशी यात्री यहां पर गूगल या फेसबुक नहीं खोल सकते और अमेरिका व चीन के नए व्यापार समझौते ने इन प्रतिबंधों पर चर्चा को टाल दिया है। इस तरह की नीति की वजह से ही सोवियत संघ विफल हो गया था, लेकिन उसके विपरीत चीन संरक्षणवादी दीवारों के पीछे प्रभावी तरीके से एक नई उपभोक्ता संस्कृति विकसित कर रहा है, जो राजनीतिक नियंत्रण के औजार के साथ ही आर्थिक विकास का एक इंजन भी है। यह एक महत्वपूर्ण मौके पर हुआ है।

चार दशक पहले शुरू हुए आर्थिक सुधार के बाद 2015 में चीन पहली मंदी के करीब पहुंचता दिख रहा था। जब दुनिया की विकसित अर्थव्यवस्थाएं लगभग स्थिर सी थीं, चीन में औसत आय मध्य वर्ग के दौर में पहुंच गई थी। उसकी कामकाजी जनसंख्या सिकुड़ने लगी थी, बे-लगाम ऋण देने, 2008 की मंदी से उबरने की कोशिश में निजी कर्ज जीडीपी का 150 से 230 प्रतिशत तक हो गया था। बढ़ती दुनिया में यह सबसे बड़ी उधारी थी और ऐसी बड़ी देनदारी बड़ी गिरावट की वजह बनती है। चीन की ग्रोथ दर दोहरी संख्या से घटकर महज छह फीसदी रह गई थी और उसे अपनी पहली मंदी का सामना करना था। 


ऐसे में अलीबाबा और टेंनसेंट जैसे इंटरनेट दिग्गजों की नई डिजिटल अर्थव्यवस्था ने स्टील और एल्युमीनियम जैसे पुराने उद्योगों में गिरावट की भरपाई की और यह काफी हद तक कर्जमुक्त भी थे। तीन ट्रिलियन डॉलर आकार की यह डिजिटल अर्थव्यवस्था अब चीन को पुरानी अर्थव्यवस्था के कर्ज को व्यवस्थित करने में मदद कर रही है और विकास दर को बनाए हुए है। 2017 तक टेक्नोलॉजी का चीन के आउटपुट में उतना बड़ा हिस्सा हो गया था, जितना जर्मनी में है। टफ्ट्स विश्वविद्यालय के सर्वे में चीन को सबसे तेजी से बढ़ती हुई डिजिटल अर्थव्यवस्था बताया गया है।

वीसा के सीईओ ने बीजिंग के एक नियामक की 18 महीने पहले कही बात को उद्धृत किया कि टेक दिग्गज ‘पहले चिंता करने के लिए बहुत छोटे थे और अब वे कुछ भी करने के लिए बहुत बड़े हैं।’ आज जो उपलब्ध अध्ययन हैं वे दो साल पुराने डाटा पर आधारित है और संभवत: एक टेक प्लेयर के तौर पर चीन के उभार को कम आंकते हैं। वह अब हर साल अनुसंधान और विकास पर 32800 अरब रुपए खर्च करता है, जो यूरोप से अधिक है। दुनिया की 20 सबसे बड़ी इंटरनेट कंपनियों में नौ चीन की हैं।


ऑनलाइन बैंकिंग तेजी से बढ़ रहा है, जिससे उपभोक्ता के ऋण लेने में तेजी आ रही है। निर्यात की तुलना मंे घरेलू खपत आर्थिक विकास का मुख्य कारक बन रहा है। 2015 में स्थापित अलीबाबा का मायबैंक 1.6 करोड़ लोगों को ऋण दे चुका है। इसमें ‘3-1-0’ अतिसूक्ष्म ऋण भी है, जिसके आवेदन के लिए तीन मिनट की जरूरत होती है, यह एक मिनट में स्वीकृत होता है। इसमें किसी भी मनुष्य की भूमिका नहीं होती।


ऑटोमेशन से नौकरियां जा रही हैं। अलीबाबा के हेमा ग्रॉसरी स्टोर में लंच काउंटर पर वेटर की जगह छोटे-छोटे सफेद रोबोट काम कर रहे हैं। जिम में लोग फर्श पर लगी वीडियो स्क्रीन के मुताबिक कदमताल कर रहे हैं और किसी प्रशिक्षक की जरूरत नहीं है। हालांकि टेक्नोलॉजी में उससे अधिक प्रोफेशनल्स की जरूरत हो रही है, जितनी नौकरियां उसकी वजह से जा रही हैं। अनुमान के मुताबिक रोजगार में आधी वृद्धि यहां से ही हो रही है।

अलीबाबा से जुड़ी कंपनियों ने ही पिछले दशक में तीन करोड़ रोजगार पैदा किए, जो पुराने उद्योगों में घटी नौकरियों से अधिक हैं। चीन की तकनीक क्रांति उन ताकतों की वजह से आई है, जो सामान्यत: अर्थव्यवस्था को धीमा करते हैं। यहां की जनसंख्या बूढ़ी हो रही है, लेकिन इसके बावजूद वह ऐसा बाजार उपलब्ध कराती है, जिसमें टेक स्टार्ट-अप्स खिल सकते हैं। अब औसत आय मध्य वर्ग में है, लेकिन चीन में ये नए उपभोक्ता मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को बढ़ा रहे हैं।


किसी और देश में ऐसी जोड़ी नहीं है। भारत में जनसंख्या है पर आय नहीं है। ब्राजील में आय है पर जनसंख्या नहीं है। इन लोकतांत्रिक देशों में समाज सरकार की निगरानी के प्रति अधिक शंकालु है। भारत में बायोमैट्रिक आईडी को लेकर हुए विवाद को याद करें। चीन के लोगों के निजी डाटा को लेकर कम चिंता ने उसे अब तक दुनिया का सबसे बड़ा ई-कॉमर्स मार्केट बनने में मदद की है। रोजगार बढ़ाने के लिए चीन को उत्पादन बढ़ाने की जरूरत है।

आईएमएफ के एक हालिया पेपर में कहा गया है कि एक दशक तक धीमी रहने के बाद 2015 में टेक बूम की शुरुआत होने से उत्पादकता ठीक होने लगी है और उम्मीद है कि अर्थव्यवस्था धीमी होगी, लेकिन अगर डिजिटलाइजेशन की गति तेज रही तो इसके धीमे होने की दर कम हो जाएगी। ऋण और जनसंख्या चीन की उम्मीदों पर भारी रहेगी और आसानी से मिलने वाले ऑनलाइन ऋण वित्तीय संकट के खतरे को बढ़ाएंगे। लेकिन फिलहाल तो टेक क्रांति ने चीन को एक गंभीर गिरावट से बचा लिया है। (यह लेखक के अपने विचार हैं।)

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