सेकंड आर्टिकल / भारतीय रियल एस्टेट के लिए क्रांति लेकर आया यह महीना

जक्षय शाह

जक्षय शाह

Mar 16, 2019, 05:22 PM IST


This month brought revolution for Indian real estate
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This month brought revolution for Indian real estate
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  • केंद्रीय बजट की कई अनुकूल घोषणाओं ने रियल एस्टेट के लिए ठोस नींव रखी

यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि फरवरी 2019 में हुए घटनाक्रम को देश की रियल एस्टेट बिरादरी बहुत लंबे समय तक शिद्दत से याद करेगी। इस माह में ऐसी उल्लेखनीय घोषणाएं और संशोधन हुए, जो न सिर्फ इस साल बल्कि इसके आगे भी भारतीय रियलिटी क्षेत्र का भविष्य तय करेगी।

 

केंद्रीय बजट की कई अनुकूल घोषणाओं ने रियल एस्टेट के लिए ठोस नींव रखी है। यह बजट इस सेक्टर के लिए सपना सच होने से कम नहीं था। बजट में औपचारिक रूप से यह स्वीकृति कि मंत्री समूह की सिफारिश के मुताबिक घर खरीदने वालों पर से जीएसटी का बोझ हटाना होगा, भारतीय रियल एस्टेट उद्योग के लिए बड़े संतोष की बात रही।


धारा 80आईबीए का एक साल के लिए विस्तार किफायती आवास के लिए वरदान है। फिर 5 लाख रुपए की आमदनी को आयकर से मुक्त करने का मतलब है साढ़े छह लाख रुपए या इससे अधिक तक रियायत। इससे एक बड़े वर्ग की खरीद क्षमता बढ़ेगी। इससे आवास में निवेश करने में सक्षम उपभोक्ता की क्षमता बढ़ेगी।

 

धारा 24 दूसरे मकान को आयकर के दायरे से मामूली रेंट पर मुक्त करती है और दूसरे मकान में निवेश को कैपिटल गैन्स से भी छूट मिलती है। इन सारी घोषणाओं से आवास के क्षेत्र में धीमी मांग रफ्तार पकड़ेगी। इसी तरह टीडीएस की सीमा रेखा 2.40 लाख रुपए तक बढ़ाने और अनबिकी इन्वेंटरी पर नोशनल रेंट से दो साल की छूट ने अहम बाधाएं दूर की हैं। क्रेडाई सरकार की इस महत्वाकांक्षा में सहयोगी है कि आर्थिक वृद्धि का नया युग ‘न्यू इंडिया’ के उदय के लिए बहुत जरूरी है। बजट वह उचित मंच प्रदान करता है, जिस पर अर्थव्यवस्था की वृद्धि को आगे बढ़ाकर आठ साल में 10 खरब डॉलर का आंकड़ा हासिल करने का हमारे वित्तमंत्री का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।


भारतीय रियलिटी को प्रोत्साहित करने के लिए शायद बजट ही काफी नहीं था और सरकार ने सामान्य व किफायती आवास के लिए जीएसटी दरें क्रमश: 5 फीसदी और 1 फीसदी तक घटा दीं। इसने इस इंडस्ट्री को बड़ा बल दिया है। किफायती आवास के लिए 1 फीसदी जीएसटी दर तो रियल एस्टेट इंडस्ट्री के लिए क्रांतिकारी कदम है। यह मकान खरीदने वालों के लिए भी महत्वपूर्ण जीत है। आगमी तिमाहियों में हमें इस सेक्टर में मांग बढ़ने की अपेक्षा है। रेरा के बाद से अब इस सेक्टर में अत्यधिक  ग्राहक  अनुकूल वातावरण बन गया है और यह फैसला इस रफ्तार को और ईंधन देगा।

 

सेक्टर की अग्रणी व शीर्ष संस्था के रूप में क्रेडाई लंबे समय से जीएसटी दरें घटाने की वकालत करती रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ताऱीफ करना होगी कि वे जो कहते हैं, करके दिखाते हैं और 2022 तक सबके लिए आवास भी इसका अपवाद नहीं है। आम सहमति निर्मित करने के लिए वित्तमंत्री अरुण जेटली भी सराहना के पात्र हैं।

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