संदर्भ / आप के लिए राष्ट्रीय स्तर पर जाने का उचित समय

चेतन भगत

चेतन भगत

Feb 13, 2020, 01:40 AM IST

दिल्ली में आम आदमी पार्टी (आप) की शानदार जीत ने उसके एक बार फिर से राष्ट्रीय स्तर पर उभरने की संभावनाओं को बढ़ा दिया है। पार्टी की उत्पत्ति और पहचान सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं है, इसलिए देश के अन्य हिस्सों में भी उसकी संभावनाएं दिखती हैं। निश्चित तौर पर यह आसान नहीं है।

मायावती और शरद पवार दोनों ने ही राष्ट्रीय स्तर पर जाने का वादा किया था, क्योंकि दलितों व किसानों के मुद्दे राष्ट्रव्यापी हैं। लेकिन, ऐसा हो न सका। आप भी पहले ऐसा कर चुकी है, पर पंजाब में आंशिक सफलता को छोड़कर पार्टी को पहले प्रयास में बहुत कुछ हासिल नहीं हो सका। कठिन हालात के बावजूद अब उसके राष्ट्रीय स्तर उभरने के मौके पहले से कहीं अधिक हैं।


ताकतवर भाजपा को दो बार हराना व इतनी शानदार विजय हासिल करना कोई मजाक नहीं है। दूसरी जीत ने आप पर अराजक, अंदोलनकारी और शासन करने में अक्षम होने के सभी आरोपों को धो दिया है। आप इतनी बड़ी जीत तभी हासिल कर सकती है, जब उसने अच्छा शासन दिया हो और लोगों को खुश रखा हो। आप को राष्ट्रीय स्तर पर अभी क्यों जाना चाहिए?

प्रमुख विपक्ष की कमी, अर्थव्यवस्था की डगमगाती स्थिति, भाजपा सरकार (हालांकि वह अब भी काफी लोकप्रिय नजर आती है) का हनीमून दौर बीतना जैसे अनेक कारण हैं, जिसकी वजह से पांच साल पहले की तुलना में आप के विस्तार के लिए यह समय बेहतर है। पूर्व में आप ने जो आलोचना झेली, वह वांछनीय थी।

पार्टी ने लंबा समय भाजपा की आलोचना करने, लेफ्टिनेंट गवर्नर पर आरोप लगाने और प्रधानमंत्री से घृणा करने में लगा दिया। उसने इस बात की शिकायत की कि वह क्या नहीं कर सकती, खुद को सताया हुआ दिखाने की कोशिश की और उस पर कम ध्यान दिया जो वह कर सकती थी।

हालांकि, अंतर यह है कि आप ने सुना और एक तरह का री-इन्वेशन किया। उसके लिए शांत रहना और उस आनंद को छोड़ना, जो वह प्रधानमंत्री या किसी और भाजपा नेता के विवादास्पद बयान पर फब्तियां कसने से प्राप्त करती थी, आसान नहीं था। लेकिन, उसने बदलाव किया और दोबारा जीत हासिल की।

उन्होंने एक काम करने वाली सरकार के रूप में अपनी विश्वसनीयता बनाई। प्रधानमंत्री मोदी ने एक विश्वसनीय विकल्प के रूप में उभरने से पहले एक दशक से अधिक समय तक गुजरात में शासन किया। भारत में जब तक आप किसी कुलीन घराने में पैदा नहीं होते, आपको सर्वोच्च पद का दावेदार बनने के लिए आवश्यक संघर्ष करना ही होगा।

क्या आप ने अपने हिस्से का संघर्ष पूरा कर लिया है? शायद नहीं। इसे दूसरे कार्यकाल में यह दिखाना होगा कि वह अपने हाथ के काम पर फोकस कर सकती है और प्रकट रूप से महत्वाकांक्षी नहीं है। यद्यपि आप की जीत का अंतर बहुत शानदार है और उसने विलुप्त सी हो गई कांग्रेस का राजनीतिक विकल्प दे दिया है। आप को जिस तरह से खुद को मापना होगा, वह तरीका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहां पर कुछ कारक हैं, जो विचार करने योग्य हैं। 


यह समझें कि राष्ट्रीय पार्टी का मतलब पूरे देश में हर जगह मौजूद पार्टी नहीं है। भाजपा जैसी विशाल पार्टी की भी दक्षिण के तीन राज्यों में बहुत थोड़ी मौजूदगी है। उसने हाल में बंगाल और उत्तर पूर्व में जगह बनाई है। आप के राष्ट्रीय होने का मतलब अभी सिर्फ तीन-चार राज्यों में विस्तार से है। उसे ये राज्य बहुत ही सावधानी से चुनने चाहिए। इनके लिए एक समाचार योग्य और साधारण एजेंडा तय करना चाहिए। यह या तो गठजोड़ करे या फिर कांग्रेस के ऐसे नेताओं को खींचे, जो पार्टी नेतृत्व से नाराज हों पर उनमें अब भी उनके क्षेत्र में सांगठनिक क्षमता बाकी हो।


शक्ति का बंटवारा। पार्टियों के विस्तार न करने की सबसे बड़ी वजह यह होती है कि उसका नेता पार्टी में अन्य किसी के भी उभरने से हिचकता है, क्योंकि वह उसके लिए चुनौती बन सकता है। आप तेजी से नहीं उभर सकती, अगर उसने कुछ मिनी स्टार जैसे नेताओं को नहीं जोड़ा तो अरविंद केजरीवाल को उनके साथ शक्ति साझा करनी होगी। आप के साथ ‘इस्तेमाल करो और फेंको’ के कई मामले हो चुके हैं, इसलिए बड़े नेता उसमें शामिल होने को लेकर चिंतित हो सकते हैं।


शासन का दिल्ली मॉडल- प्रधानमंत्री से सीख लेकर आप शासन के दिल्ली माॅडल को देशभर में प्रचारित कर सकती है। दिल्ली ने क्या सही किया? हम इसे और जगहों पर कैसे ले जा सकते हैं? दिल्ली में अब तक जो दिखता है वह पानी, स्वास्थ्य, बिजली और शिक्षा यानी डब्लूएचईई (व्ही) नजर आता है। आप इस व्ही को ही प्रचारित कर सकती है।


अतिरिक्त उदारवादियाें से दूरी- ये उदारवादी पढ़े-लिखे, मुखर, अच्छी अंग्रेजी बोलने वाले और बहुत ही आकांक्षी हैं। भारतीय इन लोगों मान्यता चाहते हैं। यह उन्हें क्षमता से ज्यादा प्रभाव देता है। वे पहले आपकी प्रशंसा करेंगे, लेकिन बाद में चाहेंगे कि आप उनके अनुसार काम करें। उनकी अति प्रगतिवादी सोच भारतीय चुनाव में जिताने की क्षमता नहीं रखती। आप ने इसे जाना और एक छोटे और स्वीकार्य तरीके से राष्ट्रवाद व हुनमान चालीसा को आगे बढ़ाया। 


नियमित री-इन्वेंशन- इंडिया अगेंस्ट करप्शन से एक आंदोलनकारी आप, फिर गुस्से वाली आप से एक शासन पर ध्यान देने आप का जन्म हुआ। समय के साथ आप को बदलना काफी है। इस बात से कोई अंतर नहीं पड़ता कि अभी राष्ट्रीय स्तर पर जाने का रोडमैप क्या होगा, लेकिन कुछ तो होगा ही जो आप को फिर बदलेगा। जब तक आप के डीएनए में री-इन्वेंशन रहेगा यह बढ़ती और विकसित होती रहेगी।


हमारे देश को एक मजबूत विपक्ष की जरूरत है और इस दिशा में किसी भी कोशिश का स्वागत होना चाहिए, भाजपा समर्थकों द्वारा भी। किसी भी पार्टी की तुलना में भारतीय लोकतंत्र अधिक महत्वपूर्ण है और हमें उम्मीद करनी चाहिए आप इसे और मजबूती ही देगी। (यह लेखक के अपने विचार हैं।)

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