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जीने की राह / बेकाबू विचारों को ईश्वर की ओर मोड़ दें



Turn uncontrollable thoughts to God
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  • जीने की राह कॉलम पं. विजयशंकर मेहता जी की आवाज में मोबाइल पर सुनने के लिए टाइप करें JKR और भेजें 9200001164 पर

Dainik Bhaskar

Dec 07, 2018, 11:38 PM IST

विचारों का भी नियोजन कीजिए। जैसे पहले संतान के लिए परिवार नियोजन कार्यक्रम चलाया जाता था, एक रूप में आज भी चल रहा है। ऐसे ही विचारों को नियंत्रित करिए।

 

अपनी दिनभर की चर्या देखें तो आपने कई कामों के लिए समय तय कर रखा होगा। सुबह उठने का कोई समय होगा, भोजन का समय होगा, घूमने का होगा..।

 

लेकिन इन्सान की जि़ंदगी में बस, एक मामले में वक्त ऐसा हो जाता है जो कभी रुकता ही नहीं। विचार के मामले में कोई समय तय नहीं है, ये चलते ही रहते हैं। कुछ के तो नींद में भी चलते हैं। यहां हमें प्रॉपर काम करना होगा। जैसे कोई आपके पास भीख मांगने आए और आप उससे कहते हैं- चलो बाबा.. आगे बढ़ो..।

 

बस, ऐसे ही जब भीतर विचार आ रहे हों और उनको रोकना हो तो सबसे अच्छा तरीका है उन विचारों से कहिए- चलो.., आगे बढ़ो..। धीरे-धीरे पाएंगे विचार आना ही बंद हो गए। और जैसे ही विचार आना बंद होंगे, उस समय आप कर्म करिए। इस भाव के साथ कि काम हमें करना है, विचार करने का काम भागवान करेंगे।

 

जब कभी ऐसा लगे कि काम कुछ और कर रहे हैं, विचार रुक नहीं रहे हैं तो तुरंत विचारों को भगवान की ओर मोड़ दीजिए। आपका कर्म, भगवान का चिंतन दोनों मिलकर जो परिणाम देंगे वह निराला होगा। इस अभ्यास में योग बड़ा सहायक होता है। योग के माध्यम से अपने विचारों को रोक सकते हैं, भगवान की ओर मोड़ सकते हैं या जिस समय जो काम करें, उस समय मन में उसी के विचार ला सकते हैं..।  
 

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