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  • Understanding Anger, Sorrow And Stress Is Normal

गुस्सा, दुख और तनाव को सामान्य समझना एक बीमारी है

7 महीने पहलेलेखक: बी के शिवानी
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प्रतीकात्मक फोटो।

जब हम कोई प्रतिज्ञा करने के लिए तैयार होते हैं तो प्रतिज्ञा करने से पहले ही एक शक्ति पूरे वातावरण में फैल जाती है। हम सबको ये पता है कि क्या सही है और क्या नहीं है। कौनसा जीवन जीने का तरीका सही है और कौन सा नहीं है। फिर क्या कारण है कि इतना सबकुछ पता होते हुए भी आज तनाव, दुख और सबसे महत्वपूर्ण अवसाद क्योंं है? ज्ञान इतना है, सुनते भी हैं, पढ़ते भी हैं, औरों को सुनाते भी हैं, कोई अच्छा सा मैसेज आता है तो फटाफट सबको फॉरवर्ड भी कर देते हैं। हमारा उद्देश्य अच्छा है कि लोग इसे पढ़े और जानें कि ये कितनी अच्छी बात है। लेकिन सुना, देखा, पढ़ा और शेयर किया। पर हम सभी उस अच्छी बात को पहले अपने जीवन में लागू करना भूल गए। तो फिर इतनी समझ हमारे पास है लेकिन हम उसको कभी इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं।  जब हम दिमागी स्वास्थ्य और अवसाद की बात करते हैं तो उसे लागू करना जरूरी है। अगर किसी से पूछा जाए कि आपको डिप्रेशन है तो शायद कोई नहीं कहेगा कि हां मुझे है। तो फिर दिक्कत भी किसी और को है और ध्यान भी उनको ही रखना हैं, फिर हम कहां से आए उसमें? परिस्थितियां बाहर आती है और लोग अलग-अलग तरह से व्यवहार करते हैं तो हम बीमार तो नहीं हो जाते हैं। कोई और परेशान होता है नाराज होता है हम उनका संक्रमण तो ले नहीं लेते हैं। हमें अपनी भावनात्मक परिस्थिति को समझना होगा। कोई बात मुझे बहुत बड़ी लगती हैं या छोटी बातें हल्की करके खत्म कर देते हैं। हमारी सोच और भावनाओं पर हमारी क्या प्रतिक्रिया है। हर परिस्थिति में हमारा व्यवहार कैसा होता है। किसी ने मुझसे ठीक से बात नहीं की हम उस समय कैसा अनुभव करते हैं। कोई पूछे क्या हाल-चाल है तो कहते हैं - बस चल रहा है। जीवन अच्छा कट रहा है क्या दिक्कत है।  कभी-कभी गुस्सा आ जाता है। कभी-कभी थोड़ा रोना आ जाता है। कभी-कभी थोड़ा बुरा लग जाता है तो इसमें गलत क्या है ये तो सामान्य ही है। तो मैं औसत स्वास्थ्य के साथ जीवन को जी सकती हूं। लेकिन उस औसत स्वास्थ्य में अगर अचानक कुछ थोड़ी बड़ी परिस्थिति आ जाती है तो मेरा औसत स्वास्थ्य कभी-कभी उसको झेल नहीं पाता। जैसे अगर मेरा पैर दर्द हो रहा है तो मैं चल सकती हूं। यह बहुत आसान है। यह इतना आसान है कि इसे मैं अपने जीवन का अंग बना लेती हूं। ठीक हो नहीं रहा है तो चलते रहो। लेकिन किसी दिन अगर भागना पड़ गया उसी पैर से तो हम भाग नहीं सकते हैं और हम गिर जाते हैं। तब मुझे खड़े होने के लिए किसी के सहारे की जरूरत होती है। कुछ ऐसे दर्द हैं अन्दर जिनको हमने स्वीकार कर लिया है और हम जीवन उन्हीं के साथ चल रहे हैं। गुस्सा करना सामान्य है, तनाव सामान्य है। दुखी होना भी सामान्य है। कोई ऐसा कुछ कह दे तो बुरा लगना सामान्य है। ये सारी चीजें एक बीमारी है। वो सिर्फ एक मेंटल हेल्थ का मसला नहीं है। यह बुरी इमोशनल हेल्थ का मसला है।

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