जीने की राह / कर्म व भाग्य को समझना लाभदायक

पं. विजयशंकर मेहता

पं. विजयशंकर मेहता

Dec 04, 2019, 01:04 AM IST

व्यावसायिक और खासकर राजनीतिक क्षेत्र के लोग यह बात जल्दी स्वीकार करते हैं कि चाहे कितने ही बड़े कर्मवीर हो जाओ, भाग्य अपना काम दिखाता ही है। अच्छे-अच्छे बहसबाज भी थककर चुप हो जाते दिखे, जब हमारे देश के एक प्रदेश में चुनाव के बाद सरकार गठन का दृश्य आया। किसी एक पर टिकने की गलती न की जाए।

कर्म और भाग्य ऐसे हैं जैसे दो हाथ, दो आंखें, माता-पिता, नदी-किनारा, दिन-रात, सुख-दुख..। दोनों को समझना, स्वीकारना लाभ की स्थिति होगी। सरकार बनाने के सारे मोड़दार गलियारे कर्म और भाग्य से भरे पड़े थे। किसी मोड़ पर कर्म खड़ा था तो कोई मोड़ भाग्य लिए था। यही जीवन की कहानी है।

भाग्य पर भरोसा करना आलस्य या निकम्मापन नहीं है। दरअसल भाग्य एक राहत का नाम है। आपके प्रयासों में पूरी ताकत के बाद भी जब असफलता हाथ लगे तो भाग्य एक सहारा है, वरना असफलता आपको तोड़ देगी। ‘चलो.., खूब किया, पर भाग्य में नहीं होगा तो नहीं मिला’ यह आश्वासन खुद को स्फूर्त कर देगा।

इसलिए किसी एक की जिद न करें। कर्म की प्रधानता रखकर आगे बढ़ जाइए, लेकिन भाग्य में भरोसे की छोटी सी पुड़िया भी जेब के किसी कोने में जरूर रख लीजिए। क्योंकि यदि केवल कर्मशक्ति से सफल हो गए तो अहंकार आने का खतरा बना रहेगा। इसके विपरीत यदि पूरी ताकत लगाने के बाद भी सफलता नहीं मिली तो अवसाद में डूब जाएंगे। ऐसे में खुद को समझाने के लिए भाग्य एक सहारा बन जाएगा..। 

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