जीने की राह / हम सभी परमात्मा के कार्यकर्ता हैं

पं. विजयशंकर मेहता

पं. विजयशंकर मेहता

Dec 05, 2019, 12:30 AM IST

दुनिया भी कैसे-कैसे दिन याद करती है। संसार का कारोबार इतना बड़ा है कि हर दिन के लिए कोई गतिविधि मुकर्रर हो सकती है। आज अंतरराष्ट्रीय कार्यकर्ता दिवस है। कामयाबी के दो मुखड़े होते हैं। एक दिखता है, दूसरा अदृश्य है। आमतौर पर कार्यकर्ता अदृश्य शक्ति है। कुछ लोगों की नजर में ये ‘यूज एंड थ्रो’ भी होते हैं। लेकिन, कार्यकर्ता बनना एक नशा है।

बड़े लोग अपने अहंकार को थपकी देने के लिए खुद को छोटा सा कार्यकर्ता कहते रहते हैं। चलिए इसके दूसरे अर्थ पर भी नजर डाल लें। हम सब परमात्मा के कार्यकर्ता हैं। उन्होंने हमें कुछ करने के लिए संसार में भेजा है। भगवान अपने कार्यकर्ताओं का मान भी करते हैं और ध्यान भी रखते हैं।

ईश्वर के लिए उसके कार्यकर्ता हथियार नहीं, अंग हैं। इसलिए उनकी मदद को तत्पर रहते हैं। यह अलग बात है कि हम उनकी मदद न लें या उनके दिए सहयोग का दुरुपयोग करें। शास्त्रों में दो पात्र हैं- बालि और दुर्योधन। दोनों योग्य थे, भगवान इनकी मदद भी करना करना चाहते थे, लेकिन परमात्मा नीयत पढ़ता है, हैसियत नहीं।

हैसियत बहुत अच्छी थी, लेकिन नीयत दोनों की खराब। ये दोनों अपने कार्यकर्ता होने के दुरुपयोग का उदाहरण हैं। दोनों ही किसी की सही सलाह सुनने को तैयार नहीं थे। दोनों के ही जीवन में परमात्मा काफी निकट था, लेकिन इन्होंने अपनी हठीली आदत के कारण उन्हें भी दूर किया। तो सावधान रहिए, ये दोनों वृत्तियां आपको कभी भी परेशानी में डाल सकती हैं..।

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