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‘उड़ता पंजाब’ की राह पर क्यों चल पड़ा हरियाणा?

6 महीने पहलेलेखक: बलदेव कृष्ण शर्मा
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प्रतीकात्मक फोटो।
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ऐसे समय में जब हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्‌टर और गृहमंत्री अनिल विज के बीच इस बात को लेकर टकराव चल रहा हो कि सीआईडी किसे रिपोर्ट करेगी, नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीअारबी) ने एक डरावनी और चौंकाने वाली रिपोर्ट पेश की है। ड्रग की ओवरडोज से मौत के मामले में हरियाणा एक साल में अपने पड़ोसी और नशे के कारण गर्त में जा चुके पंजाब से आगे निकल गया है। हरियाणा में 86 मौत ड्रग की ओवरडोज से हुई हैं। इनमें 17 महिलाएं शामिल हैं। पंजाब में यह आंकड़ा 78 है। हरियाणा में अवैध शराब की बिक्री तो जगजाहिर है, लेकिन हेरोइन जैसा नशा यहां की नसों से दूर रहा है। आम तौर पर यह प्रदेश अच्छे खानपान और खेल उपलब्धियों के लिए जाना जाता है। कमोबेश ऐसी ही स्थिति दो दशक पहले तक पंजाब की होती थी। ‘ब्रेड बास्केट’ कहलाने वाला पंजाब प्रगति के सोपान पर था। तभी नशे के सौदागरों की नजर उसे लग गई और उसकी छवि ‘उड़ता पंजाब’ की बन गई। शुरुआत सीमापार से हुई। नेताओं से लेकर अफसरों तक की संलिप्तता धोखे के इस व्यापार में बढ़ती चली गई। तस्करी का यह कारोबार इस कद्र फैल गया कि हजारों परिवारों के सपनों को नशे ने रौंद दिया। धीरे-धीरे इसने पंजाब के सामाजिक-आर्थिक और पारिवारिक ताने-बाने को तबाही के कगार पर पहुंचा दिया। पंजाब को कड़ाई करने में देरी हुई, इसका बड़ा खामियाजा आज तक यह भुगत रहा है। सरकार की सख्ती और मीडिया की जागरूकता के बावजूद इस समस्या से उबरने में पंजाब को बरसों लगेंगे।  हरियाणा का उदय पंजाब से ही हुआ है और इस राज्य ने कम समय में अभूतपूर्व प्रगति करके मिसाल कायम की, लेकिन पंजाब की नशे की भयावह तस्वीर से उसने समय रहते सबक नहीं लिया। पंजाब के साथ लगते जिलों से नशे ने हरियाणा में पैर पसार लिए। पंजाब के साथ हरियाणा के कई गांव नशे की मंडी बन गए। पंजाब में सख्ती बढ़ने पर दिल्ली में यह गोरखधंधा पनपा, जिसमें नाइजीरियन सहित तमाम विदेशी तस्कर भी शामिल हैं। दिल्ली से भी यह नशा आसानी से हरियाणा में सप्लाई होने लगा। पंजाब और हरियाणा दोनों ही राज्यों की पुलिस ने दिल्ली में कभी दबिश नहीं दी। अासपास के राज्यों को बचाने के लिए दिल्ली में नशे के तंत्र को तोड़ना जरूरी था। उत्तर भारत के 8 राज्यों ने पिछले साल नशा तस्करी रोकने के लिए साझा बैठक बुलाकर संकल्प भी लिया। इसकी अध्यक्षता हरियाणा ने ही की, लेकिन सरकारें अक्सर अपनी प्राथमिकता बदलती रहती हैं। चुनाव से पहले सरकार संभावित जीत के नशे में चूर थी और बाद में वह गठबंधन की मजबूरी के सदमे से अब तक उबर नहीं पाई। इसलिए इस ओर से ध्यान हटा दिया। देखते-देखते हालिया रिपोर्ट में राज्य ड्रग की ओवरडोज से मौत के मामले में देश में तीसरे नंबर पर पहुंच गया।  जब तक सरकारें सत्ता का और पुलिस वर्दी का ‘नशा’ नहीं छोड़ती, तब तक पाकिस्तान सीमापार से शुरू हुआ मौत का यह धंधा एक के बाद एक राज्यों की सीमा लांघता जाएगा। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली से होते हुए इसने राजस्थान तक अपनी जड़ें जमा ली हैं। जब तक तस्करी का यह नेटवर्क ध्वस्त नहीं होता और जागरूकता के लिए व्यापक मुहिम नहीं चलाई जाती, तब तक यह चिट्‌टा युवाओं की ही नहीं, बल्कि प्रदेश की सेहत को भी खत्म कर देगा। खराब सेहत के साथ लंबा चलना सरकारों के लिए भी कहां मुमकिन है। 

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