अस्तित्व / आखिर दफ्तर में ऊंची एड़ी की चप्पल का दक्षता या सयानेपन से क्या संबंध?



why high heeled slippers compulsory in the office
X
why high heeled slippers compulsory in the office

Dainik Bhaskar

Jul 03, 2019, 01:30 AM IST

जापानी अभिनेत्री युमी इशिकावा ने अपने देश के श्रम मंत्रालय से गुहार लगाई है। उनके साथ 19000 औरतों ने भी आवाज़ बुलंद कर सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। जानते हैं जापान जैसे विकसित और कामयाबी की चकाचौंध में लिपटे रहने वाले देश की इन पेशेवर महिलाओं की मांग क्या है? महिलाओं के खिलाफ अत्याचारों या भेदभाव के मामलों में मताधिकार, शादी की उम्र, तलाक, लिव-इन रिलेशनशिप, घरेलू हिंसा या ड्राइविंग के हक अथवा गर्भपात जैसा कुछ भी नहीं। 

 

इन महिलाओं ने अपने एम्प्लॉयर द्वारा उन्हें हील्स पहनकर ही नौकरी पर हाज़िर होने जैसे मनमाने नियम के खिलाफ सरकार से कानून बनाने की फरियाद की है! क्या उस देश में ऐसी कोई घोषित या अघोषित नीति है कि पुरुष भी हील वाले जूतों में ही दफ्तर आ सकते हैं? नहीं न। तो फिर औरतों के जूतों की ऊंचाई तय करने का फैसला क्यों? यह अजब तमाशा है पुरुषवादी सोच का, जो अपने लिए सुविधा और मनमर्जी चुनती है तो औरतों पर बेसिर-पैर के नियम थोपती है। 

 

आखिर दफ्तर में ऊंची एड़ी के फुटवियर का किसी भी प्रोफेशनल की कर्मठता, ईमानदारी, दक्षता, चतुराई या सयानेपन से क्या संबंध? औपचारिक और अनौपचारिक पहनावे की बात तो समझ में आती है, लेकिन औपचारिक का मतलब एक खास माप वाली हील कैसे और कब हो गया, यह कौन समझाएगा? बहरहाल, उगते सूरज वाले देश की महिलाएं अब जंग के मैदान में उतर आई हैं और मसला है अपनी सुविधा और मन मुताबिक फुटवियर के चयन की आज़ादी का।

 

कभी आपने किसी बार, कॉफी शॉप या रेस्त्रां काउंटरों पर तैनात महिला पेशेवरों की उस परेशानी पर गौर किया है, जिसे वे अमूमन ज़ाहिर किए बगैर अपनी जिम्मेदारियों को मुस्तैदी से निभाती रहती हैं। बिना उफ्फ किए! अक्सर उनके कद की तुलना में वहां लगे शेल्फ ऊंचाई पर होते हैं। दरअसल, शेल्फों की डिजाइनिंग के वक्त जिस औसत कद, हाथ-पैरों की लंबाई को ध्यान में रखा जाता है, वह पुरुषों का होता है! लिहाज़ा, कभी उचककर या स्टूल-मेज-पटले इस्तेमाल करना महिलाओं की मजबूरी होती है। 


अब भेदभाव का जिक्र चला है तो आपको बताएं कि चिकित्सा विज्ञान तक की दुनिया भी इस बेरहम भेदभाव की गिरफ्त से बाहर नहीं है। सड़क दुर्घटनाओं में कारों और उनके सवारों के शरीरों पर कैसा असर पड़ता है, इसका पता लगाने के लिए जिन कार क्रैश-टेस्ट डमीज़ का इस्तेमाल होता है, उनके नाप-तौल तक सभी ‘औसत’ पुरुष शरीर के हिसाब से होते हैं। यानी, पुरुषों की इस दुनिया में औरतें दुर्घटना की शिकार नहीं होतीं या उनका शिकार होना अहम नहीं है! अच्छा इतना बता दो कि कभी देखी है ऐसी सीट बेल्ट जिसे प्रेग्नेंट महिला के लिए बनाया गया हो? नौ महीने के उस लंबे सफर की तकलीफों में एक और आफत जुड़ भी जाए, तो किसे फर्क पड़ता है। 


मगर हद तो तब हो गई जब नासा को हाल में अपना एक ऐतिहासिक अंतरिक्ष अभियान सिर्फ इस वजह से स्थगित कर देना पड़ा, क्योंकि उस अभियान की एक महिला यात्री के लिए उनके बदन पर फिट होने वाला स्पेस सूट एजेंसी समय पर नहीं उपलब्ध करा सकी। अब भी आप कहेंगे कि हमारी आधी आबादी को शेष आबादी से शिकायत क्यों है? 

COMMENT

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना