खुली बात / पहले शांत क्षेत्रों में मिले महिला ऑफिसराें को कमान

women Commanding officers should be posted in silent areas first
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women Commanding officers should be posted in silent areas first

  • सेना में चयन के कड़े मानदंड होने से सुप्रीम कोर्ट का फैसला लागू करने में दिक्कत नहीं

दैनिक भास्कर

Feb 19, 2020, 12:28 AM IST

लेफ्टि. जनरल एसए हसनैन, कश्मीर में 15वीं कोर के पूर्व कमांडर. भारतीय सेना में पहली बार महिला ऑफिसरों का प्रवेश 1992 में हुआ था। उस समय सेवा की अवधि और शर्तें स्पष्ट थीं। यह पांच साल के लिए शॉर्ट सर्विस कमीशन (एसएससी) था। बाद में इसे 10 और फिर 14 साल किया गया। 2008 से महिला ऑफिसर्स दो विभागों जज एडवोकेट जनरल (जेएजी) व आर्मी एजुकेशन कोर (एईसी) में नियमित कमीशन ले सकती थीं। लेकिन युद्धक (कॉम्बेट) शाखाओं में उन्हें कमीशन हासिल नहीं था।

एएससी भी सिर्फ पांच युद्धक सहायक शाखाओं सिग्नल, इंजीनियर्स, आर्मी एयर डिफेंस, एविएशन और इंटेलीजेंस व तीन सेवाओं एएससी, एओसी व ईएमई में ही था। समय के साथ जब महिला ऑफिसर्स के बाहर जाने का समय आता था तो वे पुरुष सहयोगियाें के साथ दिक्क्तों को लेकर निराशा व्यक्त करती थीं और समाधान के लिए कानूनी कार्रवाई की मांग करती थीं। ये केस लंबे समय तक लटके रहते थे और इन्हें हर स्तर पर चुनौती दी जाती थी। कार्यकाल पूरा करने वाली कुछ महिला ऑफिसर चली जाती थीं, बाकी कानूनी फैसले का इंतजार करती थीं।


महिला ऑफिसरों के लिए स्थायी कमीशन न होने की वजह से उनके सामने कॅरियर के सीमित अवसर थे और उन्हें पहले सिलेक्ट रैंक कर्नल के लिए प्रोन्नत करने पर विचार भी नहीं होता था। भारतीय सेना में कॅरियर कमान दायित्व में प्रदर्शन पर निर्भर करता है। सेना में कमान का दायित्व कर्नल के रैंक से शुरू होता है। इसके लिए एक ऑफिसर को सब यूनिट स्तर पर एक मेजर/ले.कर्नल के रूप में कमान की मानदंड नियुक्ति प्रक्रिया से गुजरकर एक प्रमोशन बोर्ड के सामने खुद को सिद्ध करना होता है। लेकिन महिला ऑफिसरों को यह मौका ही नहीं दिया जाता था।

सितंबर 2019 में रक्षा मंत्रालय ने एक विसंगति को दूर कर दिया और अप्रैल 2020 से महिला ऑफिसरों को नियमित कमीशन देना स्वीकार कर लिया, लेकिन इसके लिए वे महिला ऑफिसर ही योग्य मानी गईं, जिनकी नियुक्ति 2014 के बाद हुई थी। हालांकि, इसमें महिला ऑफिसरों के लिए समान अवसरों और उनका कॅरियर मैनेजमेंट कैसे सुनिश्चित होगा, इस बारे में कोई जिक्र नहीं था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक सभी महिला ऑफिसर नियमित कमीशन ले सकेंगी, चाहे उनकी नियुक्ति की तिथि कोई भी हो।

इसका मतलब अपना कार्यकाल पूरा करने के बावजूद कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रही, महिला ऑफिसर भी नियमित कमीशन पा सकेंगी और 54 साल की उम्र तक नौकरी कर सकेंगी। हालांकि, कोर्ट के फैसले में यह स्पष्ट होना बाकी है कि महिला अधिकारियों की नियुक्ति पुरुष एसएससी ऑफिसरों की ही तरह चयन से होगी या अलग तरह से। क्याेंकि कार्यकाल और सेवा शर्तों में समानता की बात कही गई है, इससे संभावना है कि नियमित कमीशन के लिए एक चयन बोर्ड का गठन होगा और सभी महिला ऑफिसराें को नियमित कमीशन नहीं मिलेगा।

इसने महिला ऑफिसरों के कॅरियर मैनेजमेंट का मसला भी हल कर दिया है। अब सब यूनिटों में टेस्ट के बाद वे सभी 18 शाखाओं/सेवाओं में प्रोन्नति पा सकेंगी। महिला ऑफिसरों को कमान नियुक्ति न देने का तर्क दो बातों पर आधारित था। पहला इसमें शारीरिक खतरा बहुत अधिक था और दूसरा पुरुष सिपाही महिला कमांडिंग ऑफिसर को रिपोर्ट करने के लिए मानसिक तौर पर तैयार नहीं थे। सुप्रीम कोर्ट ने इन तर्कों को नकार दिया और महिला ऑफिसरों के कॅरियर मैनेजमेंट और दायित्व के नए दौर की शुरुआत कर दी। 


इस पर सोशल मीडिया में बहस चल रही है और सेना में भी राय बंटी है। मेरे जैसे अनेक ऑफिसरों ने कश्मीर जैसे चुनौती वाले इलाकों में महिला ऑफिसरों के साथ काम किया है और मैं उनकी प्रोफेशनल क्षमता और समर्पण का साक्षी रहा हूं। बेहतर होगा कि सेना चयनित महिला ऑफिसरों को पहले तीनों सेवाओं में शांत क्षेत्रों में कमान दे और उसके बाद फील्ड एरिया में भेजे। इसी तरह सेना की पांचों शाखाओं में यही नीति अपनाई जाए पर इसकी पांच साल में समीक्षा का प्रावधान हो। सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर आपत्ति जताने वाले लोगों को अहसास नहीं है कि सेना में चयन के कड़े मानदंड हैं।

ऐसा नहीं है कि हर अनुपयुक्त महिला ऑफिसर को कमान दायित्व मिल जाएगा। केवल सर्वोत्तम ही उन मानदंडों को पूरा कर पाएंगी, जो पुरुष अफसरों के ही समान हैं। सेना में उत्कृष्टों को सम्मान उनकी प्रोफेशनल क्षमताओं और मानवीय गुणों से ही मिलता है। सच यह है कि कॅरियर के पूर्ण अवसर मिलने से उनको हर स्तर पर बेहतर करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा और इससे वे उन कमियों से भी उबर सकेंगी, जो उनके प्रदर्शन में देखी जाती हैं। अभी महिलाओं का युद्धक शाखा में प्रवेश होना बाकी है। समय आने पर यह भी होगा पर इस फैसले के लिए जमीन अभी तैयार करनी होगी।

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