महावीर जयंती पर विशेष / सत्य, दया, करुणा अौर स्वार्थ हीनता में ही सबका कल्याण



All the welfare of truth, compassion, compassion and selfishness
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All the welfare of truth, compassion, compassion and selfishness

Dainik Bhaskar

Apr 17, 2019, 12:33 PM IST

सत्य वहीं है जहां अहिंसा है। मनुष्य जीवन की सार्थकता इसी में है कि हम सत्य-अहिंसा को अपने जीवन में स्थान दें। आज हमारे जीवन से अहिंसा निकल गई, सत्य चला गया उसी का परिणाम है कि भारत में हिंसा बढ़ गई है। हमारे जीवन में अनुकंपा भी चाहिए। मनुष्यता अनुकंपा यानी करुणा से ही पहचानी जा सकती है। मनुष्य के पास जब दया रहती है तब वह भेद नहीं करता कि यह जानवर है या आदमी है। दया के अभाव में आज मनुष्य जानवरों को खाने लगा है। जानवरों को मारना मनुष्यता की हत्या है। भारत की गौरवपूर्ण संस्कृति में लोग बड़े अहिंसक थे। एक समय था जब भारत में गाय का दूध भी नहीं बेचा जाता था।

 

उसे निःशुल्क बांट दिया जाता था। भारत को अपने अतीत को याद करना होगा। यह दायित्व हम सबका है। आज हमें हिंसा के विरोध में अभियान चलाना होगा, लोगों को जागृत करना होगा। करुणा, दया को जागृत करना होगा। आदमी को रात के बारह बजे भी पूछेंगे कि क्या दीक्षा लेना है तो वह मना कर देगा। क्योंकि वह अच्छी तरह जानता है कि धर्म क्या है, अधर्म क्या है? धर्म को वही समझ सकता है जो अधर्म को अच्छी तरह जानता है। अधर्म को समझना ही धर्म की पहचान है। हम धर्म को समझने की बात बहुत करते हैं, लेकिन अधर्म को छोड़ने की बात नहीं करते। यदि हम धर्म को समझना चाहते हैं तो हमें धर्म के अंगों को पहले समझना होगा तभी हम धर्म अर्थात चारित्र की बात को दूसरे के सामने कह सकते है।

 

निरीह होकर, निर्भीक होकर बोलना तो सबको आता है, लेकिन निर्भीक होकर धर्म का पालन सबको नहीं आता। यह वही कर सकेगा, जिसे संसार की कोई चाह नहीं। जो न ख्याति चाहता है, न पूजा, न अपना मान-सम्मान। स्वार्थ बाधा है, जिसे त्यागना होगा। स्वार्थ को छोड़े बिना परमार्थ की साधना संभव नहीं। आप चेतन हैं तो चेतना की बात करो, चेतना का काम करो। मानव जीवन कल्याण के लिए है। हमारे अंदर करुणा हो, दया हो, सत्य हो, बस इसी में हम सबका कल्याण है। 

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