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अंडर-30 / बाघिन की मौत ने सामने लाए हैं हमारी समस्याओं के बुनियादी कारण



Avni death  raised  Many questionsby
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Avni death  raised  Many questionsby

Dainik Bhaskar

Nov 09, 2018, 11:53 PM IST

महाराष्ट्र के यवतमाल में टी-1 ‘अवनी’ बाघिन का शिकार किया गया। राष्ट्रपति के पास लगाई गई दया याचिका पर फैसला होने के पहले ही ‘अवनी’ का अंत हो गया। अब उसके दो शावकों का क्या होगा? अवनी की मौत को आपराधिक मामला करार दे चुकीं केंद्रीय महिला व बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस को पत्र लिखकर कहा कि राज्य के वनमंत्री सुधीर मुनगंटीवार थोड़ी संवेदना और धैर्य रखते तो अवनी को बचाया जा सकता था। उन्होंने उन्हें जिम्मेदार मानकर पद से हटाने का अनुरोध किया है।

 

गौरतलब है कि अवनी द्वारा इलाके में एक दर्जन से ज्यादा लोगों को मारने का दावा किया जाता रहा है लेकिन, अब तक हुए तीन पोस्टमार्टम में यह स्पष्ट नहीं हो सका कि अवनी ने ही इन लोगों का शिकार किया। उधर मुनगंटीवार ने मेनका पर पलटवार करते हुए कहा कि हाल के दिनों में कुपोषण के कारण बच्चों की मौतों की संख्या बढ़ी है। इसकी जिम्मेदारी लेते हुए पहले वे स्वयं इस्तीफा दें। उनका दावा है कि अवनी को मारने का फैसला राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के दिशानिर्देशों के मुताबिक लिया गया है। 
वास्तव में अवनी को मारने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन हुआ अथवा नहीं इसकी जांच होनी चाहिए। बाघ संरक्षण प्राधिकरण की नियमावली के अनुसार सूर्योदय के पहले व सूर्यास्त के बाद बाघ पर गोली नहीं चलाई जा सकती। पांढरकवड़ा के जंगलों में उस वक्त पांच बाघिनें और भी थीं। गोली उनमें से किसी को भी लग सकती थी। इंजेक्शन से बेहोश भी किया जा सकता था, जैसा कि हाल ही में ओडिशा के सतकोशिया टाइगर रिजर्व में ‘सुंदरी’ को किया गया। अवनी के दोनों शावकों के फुटमार्क चिकली वेडसी मार्ग पर बेंबला नहर के पास दिखाई दिए। अवनी की तरह फिर किसी वन्यजीव की ऐसी हत्या न हो इसे लेकर 11 नवंबर को देश-विदेश की वन्यजीव संस्थाएं मिलकर विरोध प्रदर्शन करेंगी। नागपुर में भी हो रहे प्रदर्शन में नुक्कड़ नाटक के माध्यम से अवनी की मौत को लेकर समाज को संवेदनशील बनाने का प्रयास किया जाएगा।
ध्यान दें कि अवनी की मौत के कुछ दिनों पहले ही चीन ने शेर की हडि्डयों और गेंडे के सींग की बिक्री पर लगी 25 साल पुरानी पाबंदी दवाई और रिसर्च के नाम पर हटा दी। इससे ऐसी घटनाओं की आशंका बढ़ जाएगी। चीन के इस फैसले का भारत पर खासतौर पर इसलिए असर पड़ेगा, क्योंकि यहां दुनिया के शेरों की 70 फीसदी और गेंडे की 85 फीसदी आबादी है। अवनी की मौत से यह तथ्य फिर सामने आता है कि देश में अनियोजित विकास के कारण तेजी से जंगलों व प्राकृतिक आवास घटता जा रहा है। इससे मानव व वन्य पशुओं का आमना-सामना होने के अवसर बढ़ जाते हैं। भारतीय समाज में बढ़ती संवेदनहीनता भी इसका एक कारण है। गौर करेंगे तो पाएंगे कि देश की लगभग हर महत्वपूर्ण समस्या की बुनियाद में यही दो कारण हैं- संवेदनहीनता और अनियंत्रित विकास। (लेखिका - रितिका बागोकर, कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग की छात्रा, पुणे)

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